अक्सर लोग फिटनेस बनाए रखने के लिए रोजाना 10,000 कदम पूरा करने की होड़ में लग जाते हैं, मगर चिकित्सा विज्ञान की नजर में महज कदमों का आंकड़ा पूरा कर लेना ही तंदुरुस्ती की गारंटी नहीं है। गाजीपुर स्थित महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज में उपप्रधानाचार्य एवं एनाटॉमी विभाग के विशेषज्ञ डॉ. नीरज पांडे का स्पष्ट मानना है कि चलने की गिनती के साथ-साथ आपकी रफ्तार भी उतनी ही अहमियत रखती है। शरीर को समुचित लाभ पहुंचाने के लिए ब्रिस्क वॉक यानी तेज चाल से टहलना एक बेहतरीन शारीरिक अभ्यास साबित होता है।
दूरी और गति का सही संतुलन
डॉ. नीरज पांडे की सलाह है कि हर व्यक्ति को प्रातः काल कम से कम दो से तीन किलोमीटर तक तेज गति से पैदल चलना चाहिए। जब कोई इंसान नियमित तौर पर ऐसी तेज चहलकदमी करता है, तो उसका जिस्म पूरी तरह सक्रिय हो जाता है और जमा कैलोरी बर्न होने लगती है। इसका सीधा असर बढ़े हुए वजन को घटाने या संतुलित बनाए रखने पर पड़ता है। हालांकि, यह जरूरी नहीं कि हर शख्स पहले ही दिन से तेज दौड़ने लगे। हर व्यक्ति की शारीरिक बनावट, उम्र और मौजूदा फिटनेस स्तर भिन्न होता है। ऐसे में नए लोगों को पहले छोटी दूरी तय करनी चाहिए और फिर वक्त के साथ अपनी गति में इजाफा करना चाहिए।
शुगर और दिल की बीमारियों पर असर
मधुमेह के रोगियों के लिए तेज कदमों से टहलना किसी दवा से कम नहीं माना जाता। शारीरिक श्रम करने से खून में मौजूद ग्लूकोज का स्तर नियंत्रित रहता है, जिससे डायबिटीज बिगड़ने की आशंका कम हो जाती है। फिर भी, शुगर पीड़ित मरीजों को अपनी खानपान की दिनचर्या और दवाइयों की खुराक को ध्यान में रखते हुए ही चलने की तीव्रता तय करनी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य पुरानी बीमारी से भी जूझ रहा है, तो उसे कसरत की मियाद तय करने से पहले चिकित्सीय परामर्श जरूर लेना चाहिए।
इसी तरह, कार्डियोवैस्कुलर यानी दिल की सेहत को दुरुस्त रखने में भी तेज चाल मददगार साबित होती है। नियमित रूप से ब्रिस्क वॉक करने से हृदय रोगों का खतरा काफी हद तक घट जाता है और शरीर की धमनियों में रक्त संचार सुचारु रहता है। मोटापा घटने से भी दिल पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव कम होता है। हालांकि, जिन मरीजों को पहले से हृदय विकार की शिकायत है, उन्हें बिना डॉक्टर की अनुमति के अचानक तेज गति से वॉक शुरू करने से बचना चाहिए।
मानसिक शांति और दिनचर्या का अनुशासन
शारीरिक फायदों के अलावा, टहलने का गहरा नाता इंसानी जेहन और मानसिक सुकून से भी जुड़ा हुआ है। सुबह के वक्त शांत और हरे-भरे माहौल में पैदल चलने से दिमाग तरोताजा महसूस करता है और दिनभर का तनाव दूर होता है। जब कोई व्यक्ति रोज टहलने का नियम बना लेता है, तो उसकी पूरी जीवनशैली में एक सकारात्मक अनुशासन आ जाता है। मुख्य बात यह है कि अपनी शारीरिक सहनशक्ति से बाहर जाकर खुद पर दबाव न डालें, बल्कि इसे धीरे-धीरे अपनी रोजमर्रा की आदत में ढालें।
धूप निकलने के बाद टहलें और जरूरी एहतियात बरतें
सैर पर निकलने के सही समय को लेकर डॉ. पांडे का सुझाव है कि सूर्योदय के पश्चात ही वॉक के लिए निकलना चाहिए। पैदल चाल पूरी करने के बाद कुछ देर योगाभ्यास भी किया जा सकता है। दिनभर में करीब एक से दो घंटे की कुल शारीरिक गतिविधि शरीर को चुस्त रखने के लिए काफी असरकारक मानी जाती है, पर शुरुआत करने वालों को इतना लंबा समय बिताने की जरूरत नहीं है। अपनी क्षमता के अनुसार धीरे-धीरे समय सीमा बढ़ाएं। सैर के दौरान हमेशा आरामदायक जूते पहनें, शरीर में पानी की कमी न होने दें, और यदि अचानक चक्कर आएं, सीने में भारीपन या दर्द महसूस हो, अथवा असामान्य रूप से सांस उखड़ने लगे, तो तत्काल रुककर डॉक्टर से जांच कराएं।



















