सुबह जागने पर तकिए पर गीलापन नजर आना एक बेहद सामान्य शारीरिक प्रक्रिया हो सकती है, जिससे ज्यादातर लोग कभी न कभी दो-चार होते हैं। कई बार लोग इसे केवल एक अजीब आदत समझ लेते हैं, जबकि कुछ लोगों के मन में यह चिंता पैदा करता है कि कहीं यह शरीर के भीतर पनप रही किसी गंभीर बीमारी का संकेत तो नहीं है। ईएनटी सलाहकार डॉ क्षितिजा पाठक के अनुसार, तकिए पर नजर आने वाले लार के दागों का सामान्य तौर पर किसी छिपी हुई बीमारी से सीधा वास्ता नहीं होता, पर जब यह स्थिति जरूरत से ज्यादा होने लगे तो चिकित्सकीय दृष्टिकोण से ध्यान देने की दरकार होती है।
सोने की मुद्रा और लार बहने की प्रक्रिया
जब इंसान गहरी नींद में होता है, तो चेहरे और मुंह की मांसपेशियां पूरी तरह शिथिल हो जाती हैं। यदि कोई व्यक्ति पीठ के बल सोने के बजाय पेट के बल या करवट लेकर सोता है, तो गुरुत्वाकर्षण के स्वाभाविक असर से मुंह में बनने वाली लार बाहर की ओर बहने लगती है। सामान्य परिस्थितियों में जागते समय इंसान बिना सोचे-समझे लगातार लार निगलता रहता है, लेकिन नींद में निगलने की यह गति धीमी पड़ जाती है। इसी कारण जब सिर एक तरफ मुड़ा होता है या चेहरा तकिए से सटा होता है, तो लार मुंह के कोनों से रिसकर सीधे तकिए पर आ जाती है।
मुंह से सांस लेने की आदत और श्वसन मार्ग की बाधाएं
लार बहने की सबसे प्रमुख वजहों में से एक है सोते समय मुंह खोलकर सांस लेना। सामान्य तौर पर सांस नाक के जरिए भीतर जानी चाहिए, लेकिन जब नाक का मार्ग अवरुद्ध हो जाता है, तो शरीर ऑक्सीजन पाने के लिए स्वाभाविक रूप से मुंह खोल देता है। हवा के इस प्राकृतिक रास्ते में रुकावट आने के पीछे कई शारीरिक कारण हो सकते हैं, जिनमें गंभीर नाक एलर्जी, मौसम बदलने से नाक बंद होना, नाक की बीच वाली हड्डी का टेढ़ा होना और एडेनॉइड्स ग्रंथि का बढ़ना शामिल है।
इसके अलावा, गले में टॉन्सिल का आकार असामान्य रूप से बड़ा होना और ऑब्स्ट्रक्टिव स्लीप एपनिया की स्थिति भी नींद में मुंह खोलने के लिए मजबूर करती है। जब व्यक्ति पूरी रात मुंह से सांस लेता है, तो मुंह खुला रहने के कारण लार अनियंत्रित होकर बाहर निकलने लगती है। कुछ मामलों में भोजन या लार निगलने की सामान्य प्रक्रिया में रुकावट, तंत्रिका तंत्र यानी नर्वस सिस्टम से संबंधित विकार और कुछ विशेष दवाओं का नियमित सेवन भी लार के अत्यधिक उत्पादन या उसके बहने का कारण बन सकता है।
रोजमर्रा की आदतें और घरेलू सुधार
यदि तकिए पर लार का कभी-कभार ही दिखना होता है और इसके अलावा शरीर में कोई दूसरा असामान्य लक्षण नहीं है, तो जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव राहत दे सकते हैं। सोने की सही मुद्रा अपनाना, जैसे पीठ के बल सोने की कोशिश करना, इसमें काफी मददगार साबित होता है। इसके साथ ही नाक की एलर्जी की समय पर रोकथाम, नाक बंद रहने की स्थिति में उचित उपचार, भरपूर पानी पीने की आदत और मुंह की नियमित सफाई बनाए रखना सहायक होता है। हालांकि, केवल पर्याप्त मात्रा में पानी पी लेने से यह समस्या पूरी तरह ठीक हो जाएगी, ऐसा सोचना सही नहीं है क्योंकि यह अंतर्निहित कारणों पर निर्भर करता है।
डॉक्टर को कब दिखाना जरूरी है
यदि लार टपकने का सिलसिला रोजाना और अत्यधिक मात्रा में बना रहता है, तो इसे केवल सोने का गलत तरीका मानकर अनदेखा नहीं करना चाहिए। खासतौर पर यदि इसके साथ तेज खर्राटे लेना, नींद के दौरान सांस का अचानक कुछ सेकंड के लिए रुक जाना, रात में घबराहट या दम घुटने जैसे एहसास के साथ नींद टूटना, तरल या ठोस चीजें निगलने में तकलीफ होना या नाक हमेशा ही जाम रहना जैसे लक्षण भी दिखाई दे रहे हों, तो तत्काल किसी ईएनटी विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। विशेषज्ञ जांच करके यह तय करते हैं कि कहीं श्वसन नली में कोई रुकावट, बढ़े हुए टॉन्सिल या नींद से जुड़ा कोई विकार तो शरीर को प्रभावित नहीं कर रहा है।



















