सर्दियों का मौसम आते ही अक्सर लोगों का वजन अचानक बढ़ने लगता है। आमतौर पर माना जाता है कि ठंड की वजह से व्यायाम या चहलकदमी कम होना ही इसका इकलौता कारण है, मगर हकीकत यह भी है कि इस मौसम में लोग जरूरत से ज्यादा भोजन करने लगते हैं। ठंड के दिनों में बार-बार भूख लगना और तेल या घी से बने पकवान जैसे गर्मागर्म पराठे, पकौड़े, हलवा, सूप और मिठाइयों की तीव्र इच्छा होना काफी सामान्य बात है। कई मर्तबा देखा जाता है कि पेट भरकर मुख्य भोजन कर लेने के कुछ ही देर बाद फिर से कुछ न कुछ मीठा या चटपटा खाने की तलब उठने लगती है। इस मौसमी बदलाव के पीछे हमारे शरीर की जैविक बनावट और दिनचर्या से जुड़े कई गहरे पहलू छिपे होते हैं।
भूख और खानपान में बदलाव के मुख्य कारण
न्यूट्रीवाइब्स वेलनेस क्लिनिक में डायबिटीज एजुकेटर, एनएलपी प्रैक्टिशनर और क्लिनिकल डाइटिशियन शिवानी कंडवाल के अनुसार, सर्दियों में खानपान की बढ़ी हुई इच्छा के पीछे शरीर का अंदरूनी तापमान, हार्मोन्स का स्तर, नींद की गुणवत्ता, मानसिक स्थिति और शारीरिक सक्रियता जैसे कई कारक शामिल होते हैं। जब बाहर का पारा गिरता है, तब मानव शरीर अपने अंदरूनी तापमान को संतुलित रखने के लिए अतिरिक्त ऊर्जा का इस्तेमाल करता है। हालांकि, इसका यह बिल्कुल मतलब नहीं है कि हर व्यक्ति को भारी मात्रा में कैलोरी का सेवन शुरू कर देना चाहिए। जो लोग गर्म ऊनी कपड़े पहनते हैं और अधिकांश वक्त घर या बंद कमरे के भीतर बिताते हैं, उन्हें बहुत अधिक अतिरिक्त कैलोरी की जरूरत नहीं पड़ती है। केवल मौसम सर्द होने की वजह से थाली में भोजन बढ़ा लेना सेहत के लिहाज से जरूरी नहीं है।
हार्मोनल संतुलन और धूप की कमी का असर
भूख लगने और पेट भरने की पूरी प्रक्रिया में दो प्रमुख हार्मोन्स की भूमिका होती है। घ्रेलिन हार्मोन दिमाग तक भूख लगने का संदेश पहुंचाता है, वहीं लेप्टिन हार्मोन तृप्ति या पेट पूरी तरह भर जाने का एहसास दिलाता है। जब हमारी नींद में खलल पड़ता है, तनाव बढ़ता है या दैनिक दिनचर्या बिगड़ती है, तो इन दोनों हार्मोन्स का नाजुक संतुलन प्रभावित हो जाता है। इसके अलावा, सर्दियों में दिन छोटे होने की वजह से लोगों को धूप कम मिल पाती है। सूरज की रोशनी कम मिलने से मानसिक स्थिति और मूड में बदलाव आता है, जिससे कई बार भोजन करने की तलब अचानक बढ़ जाती है।
तला-भुना खाने की तलब और सुस्त दिनचर्या
ठंड के महीनों में मीठे और अधिक वसा वाले पकवान तुरंत ऊर्जा प्रदान करते हैं और जुबान को बढ़िया स्वाद देते हैं। लेकिन दिमाग में पराठे या हलवे जैसी चीजों की लालसा पैदा होने का यह अर्थ कदापि नहीं है कि आंतरिक तंत्र को अतिरिक्त शर्करा या चिकनाई की वास्तविक आवश्यकता है। इसके साथ ही, ठंडी हवाओं और छोटे दिनों के चलते लोग सुबह की सैर या नियमित कसरत टालने लगते हैं। घर के भीतर बैठकर टीवी देखने या स्क्रीन पर समय बिताते वक्त बेवजह स्नैक्स चबाने की आदत पनप जाती है। यह सुस्ती शरीर में गैर-जरूरी कैलोरी का अंबार लगा देती है। पर्याप्त नींद न लेना, देर रात तक स्मार्टफोन का इस्तेमाल करना और मानसिक बेचैनी भी इस स्थिति को और गंभीर बना देते हैं। उदासी या आलस से राहत पाने के लिए कई लोग भोजन को सहारा बना लेते हैं।
भूख की तीव्र इच्छा को नियंत्रित करने के उपाय
सर्दियों में अनियंत्रित भूख और बढ़ते वजन पर लगाम लगाने के लिए दैनिक खानपान में पोषक तत्वों का तालमेल बिठाना जरूरी है। भोजन की थाली में दालें, अंडे, दही, मेवे, हरी पत्तेदार सब्जियां, साबुत अनाज और ताजा मौसमी फल प्रचुर मात्रा में शामिल करने चाहिए। इनके अलावा गर्म सूप, पतली दाल और पौष्टिक खिचड़ी जैसे हल्के और सुपाच्य व्यंजन लंबे समय तक पेट भरा रखने में कारगर साबित होते हैं। दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, रोजाना कसरत करना और रात को पूरी नींद लेना बेहद जरूरी है। यदि भरपेट भोजन करने के बावजूद लगातार अत्यधिक भूख महसूस हो रही हो, और साथ में बार-बार पेशाब आना, जरूरत से ज्यादा प्यास लगना, शरीर के वजन में अचानक तेज बदलाव आना या हर समय कमजोरी-थकान बनी रहने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत किसी विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क कर चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।


















