गांव-देहात की सड़कों और खेतों की मेड़ों पर अक्सर एक झाड़ीनुमा पौधा नजर आता है, जिसे ज्यादातर लोग महज जंगली झाड़ी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, गांवों में तो इसे सीधे-सीधे जंगली पौधा ही कहा जाता है। लेकिन यही घनेरी नाम का पौधा दरअसल एक बहुउपयोगी औषधीय पौधा है और आयुर्वेदिक चिकित्सा में इसका खासा महत्वपूर्ण स्थान है। इसकी पत्तियों, फल और छाल में ऐसे प्राकृतिक तत्व मौजूद हैं जो कई गंभीर बीमारियों में राहत देने की क्षमता रखते हैं।
सदियों पुराना है इसका इस्तेमाल
घनेरी का इस्तेमाल कोई नया चलन नहीं है, प्राचीन काल से ही इसे अलग-अलग बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल किया जाता रहा है। यह शरीर के लिए एक प्राकृतिक टॉनिक की तरह काम करता है और नियमित सेवन से सेहत को कई तरह से फायदा मिल सकता है। यही वजह है कि कई आयुर्वेदिक दवाओं में भी इसका उपयोग होता है।
डॉक्टर ने बताए इसके गुण
राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय, नगर बलिया में पांच साल से सेवाएं दे रहीं चिकित्साधिकारी डॉ. वंदना तिवारी बताती हैं कि घनेरी एक औषधीय पौधा है और इसके फल, पत्ते तथा छाल सेहत के लिए बेहद लाभकारी और गुणकारी साबित होते हैं। उनके मुताबिक इस पौधे में भरपूर मात्रा में औषधीय गुण मौजूद रहते हैं।
शरीर को मिलते हैं ये जरूरी पोषक तत्व
घनेरी के पौधे में मैग्नीशियम, सल्फर, बोरॉन, क्लोरीन, लोहा, जिंक, नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटैशियम जैसे कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। यही तत्व शरीर को कई तरह की बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं।
बवासीर में मिलता है आराम
बवासीर की तकलीफ में घनेरी की छाल, आँवला के फल और लाल कचनार को बराबर मात्रा में लेकर काढ़ा तैयार किया जाता है। इस काढ़े से बने खड्यूष में अनार और इमली जैसे फलों का रस मिलाकर सेवन करने पर खूनी बवासीर में राहत मिलती है।
खूनी दस्त और पेचिश में भी कारगर
खूनी दस्त और पेचिश की शिकायत में घनेरी के ताजे फलों को कूटकर उनका रस निकाला जाता है। दिन में 3 से 4 बार इस रस का एक-एक चम्मच सेवन करने की सलाह दी जाती है। लगातार कुछ दिनों तक इसका सेवन करने से खूनी दस्त की समस्या थम सकती है।
बुखार और सिरदर्द से दिलाए राहत
घनेरी में बुखार और दर्द दूर करने के गुण भी मौजूद हैं। इसकी पत्तियों को पीसकर सिर पर लेप लगाने से बुखार की वजह से होने वाला सिरदर्द कम होता है, साथ ही सिर में जलन और भारीपन जैसी दिक्कतों से भी छुटकारा मिलता है। बुखार में 20 से 40 मिलीलीटर घनेरी के काढ़े में चीनी या मिश्री मिलाकर उसे ठंडा कर लिया जाता है। सुबह-शाम इसका सेवन करने से तेज जलन और अत्यधिक प्यास वाले गंभीर बुखार में आराम मिलता है। इसके अलावा दिन में तीन बार एक चम्मच घनेरी के फल का रस नियमित रूप से पीने से भी बुखार ठीक होने लगता है।
गठिया और पेट की समस्याओं में उपयोगी
जोड़ों के दर्द यानी गठिया में मुलेठी और गंभारी के फल को मिलाकर काढ़ा तैयार किया जा सकता है। इस काढ़े का दिन में तीन बार 20 से 40 मिलीलीटर की मात्रा में सेवन करने से आमवात या गठिया में फायदा मिलता है। वहीं गंभारी की जड़ से बना 40 मिलीलीटर काढ़ा सुबह-शाम पीने से पेट की बीमारियों में लाभ होता है। ये दोनों ही उपाय पेट में गैस बनने या कीड़े होने जैसी परेशानियों में भी असरदार माने जाते हैं।
बिना सलाह सेवन करना खतरनाक
इतने सारे फायदों के बावजूद विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि घनेरी का सेवन कभी भी मनमाने ढंग से न करें। इसे हमेशा डॉक्टर की देखरेख और सही सावधानी के साथ ही इस्तेमाल करना चाहिए, क्योंकि गलत मात्रा में इसका सेवन जहरीला भी साबित हो सकता है।
कुल मिलाकर घनेरी के ये पारंपरिक नुस्खे बवासीर और पेचिश से लेकर बुखार, सिरदर्द, गठिया और पेट की गड़बड़ी तक फैले हुए हैं, यही वजह है कि पीढ़ी दर पीढ़ी घरेलू इलाज में इस पौधे का इस्तेमाल होता आ रहा है।



















