सर्दियों का मौसम आते ही लोग ठंड से बचने के लिए घरों में ही रहना पसंद करते हैं और भारी कपड़े पहनते हैं। इसकी वजह से शरीर को पर्याप्त धूप नहीं मिल पाती है, जिसके परिणामस्वरूप शरीर में विटामिन डी की कमी होने लगती है। यह पोषक तत्व हमारे शरीर के लिए बहुत अहम है क्योंकि यह हड्डियों को मजबूत रखने और शरीर द्वारा कैल्शियम को सोखने में सहायता करता है। जब इसकी मात्रा कम होने लगती है, तो हड्डियों में दर्द, मांसपेशियों में कमजोरी और थकान जैसी दिक्कतें पैदा होने लगती हैं। कई बार लोग शुरुआती लक्षणों को मामूली मानकर छोड़ देते हैं, लेकिन समय के साथ यह स्थिति गंभीर रूप ले सकती है। इसलिए ठंडे मौसम के दौरान खान-पान का विशेष ध्यान रखना आवश्यक हो जाता है।
डॉक्टर की सलाह और विटामिन D का महत्व
आयुष चिकित्सक डॉ. राजकुमार ने बातचीत में स्पष्ट किया कि विटामिन डी हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद आवश्यक है। यह शरीर को कैल्शियम को ठीक से अवशोषित करने में मदद करता है, जिससे दांत और हड्डियां मजबूत बनी रहती हैं। इसकी पर्याप्त मात्रा शरीर के सुचारू रूप से काम करने के लिए जरूरी है। इस तत्व की कमी होने पर कई तरह की शारीरिक परेशानियां सामने आने लगती हैं। इससे हड्डियां कमजोर होने के साथ उनमें दर्द की शिकायत शुरू हो जाती है। इसके अतिरिक्त, मांसपेशियों में कमजोरी, लगातार थकान और बदन दर्द जैसी समस्याएं भी महसूस हो सकती हैं।
हड्डियों के विकास और स्वास्थ्य पर असर
बच्चों में विटामिन डी की कमी होने पर हड्डियों का उचित विकास रुक सकता है। वहीं, वयस्कों में हड्डियों के कमजोर होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। जब शरीर में इस विटामिन की कमी होती है, तो यह कैल्शियम को ठीक प्रकार से सोख नहीं पाता है, जिसका सीधा असर हड्डियों की सेहत पर पड़ता है। यदि यह कमी लंबे समय तक बनी रहे, तो हड्डियों से जुड़ी बीमारियां और गंभीर रूप धारण कर सकती हैं।
सर्दियों में क्यों घट जाता है विटामिन D का स्तर
ठंड के मौसम में इस पोषक तत्व की कमी होने का प्रमुख कारण सूर्य की रोशनी का कम मिलना है। इस अवधि में दिन छोटे हो जाते हैं और लोग ठंड के डर से ज्यादातर समय घरों के भीतर ही बिताते हैं। इस वजह से शरीर को जरूरी धूप नहीं मिल पाती है। सूरज की किरणों में मौजूद यूवीबी किरणें त्वचा के अंदर विटामिन डी का निर्माण करने में मदद करती हैं। इसके अलावा, सर्दियों में शरीर ऊनी और गर्म कपड़ों से पूरी तरह ढका रहता है, जिससे त्वचा सीधे धूप के संपर्क में नहीं आ पाती। इन तमाम कारणों की वजह से शरीर में इस विटामिन का उत्पादन कम हो जाता है और इसकी कमी होने लगती है।
खान-पान और धूप से ऐसे दूर करें कमी
धूप इस पोषक तत्व का सबसे मुख्य स्रोत है, इसलिए कोशिश करें कि सर्दियों के दिनों में कुछ समय धूप में जरूर बैठें। जब त्वचा धूप के सीधे संपर्क में आती है, तो शरीर प्राकृतिक रूप से विटामिन डी का निर्माण शुरू कर देता है। इसके अतिरिक्त, आहार के जरिए भी इसकी पूर्ति की जा सकती है। सैल्मन और सार्डिन जैसी मछलियों में यह प्रचुर मात्रा में पाया जाता है। अंडे की जर्दी, विटामिन डी से समृद्ध दूध और मशरूम भी इसके बेहतरीन स्रोत माने जाते हैं। इसके साथ ही, कई प्रकार के अनाज और डेयरी उत्पादों में भी इसे मिलाया जाता है। सही आहार लेने और नियमित रूप से थोड़ी धूप सेकने से शरीर में इस विटामिन के स्तर को बनाए रखने में काफी मदद मिलती है।



















