सितंबर का महीना मानसून की विदाई और हल्की ठंड की आहट के साथ मौसम बदलाव का संदेश लाता है। इस बदलते मौसम में शरीर को स्वस्थ रखने के लिए खान-पान की आदतों में बदलाव करना बेहद जरूरी हो जाता है। भारी, अधिक तला-भुना या डिब्बाबंद डिहाइड्रेटेड खाना खाने के बजाय बाजार में मिलने वाली ताजी, रंग-बिरंगी और स्थानीय मौसमी फल-सब्जियों को आहार का हिस्सा बनाना चाहिए। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) भी संतुलित आहार के लिए स्थानीय और मौसमी खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल करने की सलाह देता है।
सितंबर में मिलने वाली प्रमुख हरी और स्थानीय सब्जियां
सितंबर के महीने में भारतीय बाजारों में बैंगन, भिंडी और लौकी जैसी कई स्थानीय सब्जियां प्रचुर मात्रा में मिलती हैं। एफएसएसएआई के सीज़नल वेजिटेबल कैलेंडर के अनुसार, बैंगन की फसल की उपलब्धता सितंबर से नवंबर तक बनी रहती है। वहीं लौकी की कटाई का समय कई इलाकों में अक्टूबर से दिसंबर तक चलता है। हालांकि, अलग-अलग राज्यों के मौसम और कृषि चक्र के हिसाब से यह समय थोड़ा भिन्न हो सकता है।
इसके साथ ही सितंबर में पालक और मेथी जैसी हरी पत्तेदार सब्जियों को भोजन में शामिल करना सेहत के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है। इन पत्तेदार सब्जियों में प्रचुर मात्रा में फाइबर और आवश्यक माइक्रोन्यूट्रिएंट्स पाए जाते हैं। चूंकि यह समय बारिश के तुरंत बाद का होता है और नमी अधिक रहती है, इसलिए सब्जियों की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। हरी सब्जियों को पकाने से पहले साफ पानी में अच्छी तरह धोना चाहिए।
आने वाली सर्दियों की सब्जियों की बुवाई और उपलब्धता
सितंबर का महीना सर्दियों की कई पसंदीदा सब्जियों की खेती की शुरुआत का समय भी होता है। एफएसएसएआई के कैलेंडर के मुताबिक, गाजर की बुवाई का समय अगस्त से अक्टूबर के बीच होता है, जबकि मटर और मूली की बुवाई सितंबर से अक्टूबर में की जाती है। इसी प्रकार फूलगोभी और पत्तागोभी की बुवाई के लिए भी सितंबर और अक्टूबर का समय सबसे उपयुक्त माना गया है।
इन सब्जियों की बुवाई शुरू होने का सीधा मतलब यह है कि आने वाले हफ्तों में बाजारों में इनकी आवक धीरे-धीरे बढ़ने लगेगी। हालांकि, हर क्षेत्र में इनका पीक सीज़न मौसम के मिजाज के आधार पर थोड़ा अलग-अलग समय पर आ सकता है।
सितंबर के पौष्टिक फल और उनके स्वास्थ्य लाभ
फलों की बात करें तो सितंबर में अमरूद, केला, पपीता, सेब और अनार जैसे फल हर बाजार में आसानी से उपलब्ध होते हैं। मौसमी फल खाने से शरीर को भरपूर फाइबर, विटामिन्स और अन्य जरूरी पोषक तत्व प्राप्त होते हैं। एफएसएसएआई की सलाह है कि फल का जूस पीने के बजाय पूरा फल चबाकर खाना ज्यादा बेहतर विकल्प होता है, क्योंकि साबुत फल में प्राकृतिक फाइबर पूरी तरह सुरक्षित रहता है।
सितंबर के महीने में शरीफा यानी सीताफल भी बाजारों में दिखने लगता है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के अनुसार, शरीफा अगस्त और सितंबर के आसपास पककर तैयार होने वाली फसल है। इसे ताजा खाने के अलावा मिल्कशेक, कस्टर्ड और अन्य स्वादिष्ट व्यंजनों में मिलाकर भी उपयोग किया जाता है।
सब्जियों और फलों की खरीद व सफाई में बरतें सावधानी
सितंबर में हवा में उमस और नमी के कारण बैक्टीरिया पनपने का खतरा ज्यादा रहता है। ऐसे में फल और सब्जियां खरीदते समय ताजगी के साथ स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। बाजार में काफी देर से खुले में रखे या पहले से कटे हुए फल और सब्जियां खरीदने से बचें। एफएसएसएआई के अनुसार, फल और सब्जियों को काटने या छीलने से पहले हमेशा साफ पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए और काटने के तुरंत बाद उनका सेवन कर लेना चाहिए।



















