सदियों पुरानी परंपरा, लेकिन सही तरीका जरूरी
तांबे के बर्तन में पानी पीने की परंपरा भारत में बहुत पुरानी है। आयुर्वेद के मुताबिक, जब पानी कुछ घंटों तक तांबे के बर्तन में रहता है, तो वह कॉपर आयन सोख लेता है, जो शरीर के लिए जरूरी सूक्ष्म पोषक तत्वों में से एक है। विशेषज्ञ भी इसे स्वास्थ्यवर्धक मानते हैं, मगर साथ में यह भी कहते हैं कि सही तरीका अपनाना उतना ही जरूरी है। अगर गलत तरीके से उपयोग हो, तो यह फायदेमंद आदत नुकसानदायक बन सकती है।
किसने दी यह जानकारी?
हाथरस, उत्तर प्रदेश स्थित प्रेम रघु आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. सरोज गौतम ने TrendKia को बताया कि लोग अनजाने में 3 ऐसी गलतियां करते हैं, जिनकी वजह से तांबे का बर्तन उपकार करने की बजाय नुकसान पहुंचाने लगता है।
गलती 1: पानी को जरूरत से ज्यादा देर तक रखना
डॉ. सरोज गौतम के अनुसार, बहुत से लोग तांबे के बर्तन में पानी भरकर उसे पूरे दिन या कई-कई दिनों तक वैसे ही छोड़ देते हैं। असल में पानी जितनी देर तांबे के संपर्क में रहेगा, उतना ज्यादा कॉपर वह सोखेगा। आमतौर पर 6 से 8 घंटे तक रखा पानी पर्याप्त माना जाता है। इस सीमा से ज्यादा समय तक रखे पानी में कॉपर की मात्रा बढ़ जाती है, जो कुछ लोगों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। इसलिए बर्तन में नियमित रूप से ताजा पानी भरना और पुराना पानी बदलते रहना जरूरी है।
गलती 2: बर्तन में खट्टी या एसिडिक चीजें रखना
आयुर्वेद विशेषज्ञ का स्पष्ट मत है कि तांबे के बर्तन में नींबू पानी, इमली का पानी, सिरका, जूस या किसी भी तरह के खट्टे पदार्थ नहीं रखने चाहिए। ये एसिडिक चीजें तांबे के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया करती हैं, जिससे ऐसे यौगिक बनते हैं जो सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। आयुर्वेद में भी तांबे के बर्तन में खट्टी चीजें रखना शरीर के लिए बेहद हानिकारक बताया गया है। इसीलिए इन बर्तनों का उपयोग सिर्फ पानी रखने के लिए किया जाना चाहिए।
गलती 3: बर्तन को साफ न रखना
डॉ. गौतम के मुताबिक, समय के साथ तांबे के बर्तन की सतह पर एक परत जमा हो जाती है और उसकी चमक फीकी पड़ जाती है। अगर बर्तन की नियमित सफाई नहीं की जाती, तो उसकी स्वच्छता पर सीधा असर पड़ता है और उसमें रखा पानी पीना सुरक्षित नहीं रहता। सफाई के लिए नींबू और नमक का मिश्रण या बाजार में मिलने वाले कॉपर क्लीनर का इस्तेमाल किया जा सकता है। साफ बर्तन न सिर्फ देखने में बेहतर लगता है, बल्कि उपयोग के लिहाज से भी ज्यादा सुरक्षित होता है।
कितना पीना चाहिए तांबे का पानी?
डॉ. सरोज गौतम की सलाह है कि तांबे के बर्तन का पानी सीमित मात्रा में ही पिएं। पूरे दिन सिर्फ इसी बर्तन से पानी पीने की आदत सही नहीं है, इसे अपनी दिनचर्या में संतुलित तरीके से शामिल करना चाहिए। जिन लोगों को पहले से लिवर, किडनी या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या की शिकायत है, उन्हें डॉक्टर की सलाह लेने के बाद ही तांबे का पानी अपनी रूटीन में शामिल करना चाहिए।













