अगर आप यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उम्र बढ़ने के साथ आपका शरीर मजबूत और स्वस्थ बना रहे, तो इसकी शुरुआत आज से ही करनी होगी। दिन-प्रतिदिन की जाने वाली छोटी-छोटी आदतें और बदलाव आने वाले समय में आपकी पूरी सेहत पर गहरा असर डालते हैं। कैलिफ़ोर्निया में प्रैक्टिस करने वाले गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. सौरभ सेठी ने अपनी दिनचर्या में किए गए ऐसे ही असरदार बदलावों की जानकारी साझा की है। हाल ही में 27 अगस्त को सोशल मीडिया पर शेयर किए गए एक वीडियो में उन्होंने बताया कि आज 44 वर्ष की आयु में वे खुद को 34 वर्ष की तुलना में कहीं अधिक चुस्त और बेहतर महसूस करते हैं, और इस बदलाव के पीछे उनकी अनुशासित जीवनशैली का बड़ा हाथ है।
दैनिक जीवनचर्या में किए गए ये खास बदलाव
डॉक्टर सौरभ सेठी ने अपनी सेहत को बेहतर बनाए रखने के लिए कई ऐसी आदतें अपनाई हैं जिन्हें कोई भी व्यक्ति अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल कर सकता है। इन बदलावों ने उनके शरीर को आंतरिक रूप से मजबूत बनाने के साथ-साथ उम्र के असर को भी काफी हद तक थाम कर रखा है।
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खाना खाने के तुरंत बाद टहलना: डॉ. सौरभ सेठी का कहना है कि वे हर मुख्य भोजन के बाद खाना खाने के बाद वॉक जरूर करते हैं। थोड़ा सा टहलने से शरीर में ग्लूकोज का स्तर अचानक तेजी से बढ़ने यानी स्पाइक्स की समस्या को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।
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विविध प्लांट-बेस्ड फूड्स का सेवन: वे अपनी डाइट में हर हफ्ते 30 से अधिक विभिन्न प्रकार के पौधों पर आधारित खाद्य पदार्थों को शामिल करते हैं। अलग-अलग पौधों से मिलने वाले भोजन में अनगिनत पोषक तत्व पाए जाते हैं। रिसर्च के अनुसार, जो लोग हफ्ते में 30 से ज्यादा तरह के प्लांट-बेस्ड फूड्स का सेवन करते हैं, उनके पेट में गट माइक्रोबियल डाइवर्सिटी उन लोगों की तुलना में बहुत बेहतर होती है जो 10 से कम प्रकार के ऐसे फूड्स खाते हैं।
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सोने से पहले खाने का सही समय: बहुत देर से भोजन करने से रात के वक्त शरीर का ग्लूकोज नियंत्रण बिगड़ सकता है और तुरंत बिस्तर पर लेट जाने से एसिडिटी या रिफ्लक्स का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसलिए डॉक्टर हमेशा सोने से 2 से 3 घंटे पहले अपना डिनर पूरा कर लेते हैं।
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नियमित रूप से वेट ट्रेनिंग करना: वे हफ्ते में दो से तीन बार वजन उठाने यानी वेट लिफ्टिंग का अभ्यास करते हैं। उनके अनुसार जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, मांसपेशियों के घनत्व और हड्डियों की मजबूती को बनाए रखने के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
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पर्याप्त फाइबर का दैनिक सेवन: डॉक्टर रोजाना कम से कम 30 ग्राम से ज्यादा फाइबर का सेवन करने का लक्ष्य रखते हैं। अधिक मात्रा में फाइबर लेने से हृदय रोग, टाइप 2 डायबिटीज़, कोलोरेक्टल कैंसर और किसी भी कारण से होने वाली असामयिक मौत के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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7 से 9 घंटे की गहरी नींद: अच्छी सेहत के लिए केवल खानपान और व्यायाम ही काफी नहीं है, बल्कि पूरी नींद लेना भी उतना ही जरूरी है। लंबे समय तक कम नींद लेने का बुरा असर केवल शारीरिक ऊर्जा पर ही नहीं पड़ता, बल्कि इसका सीधा संबंध बिगड़े हुए ग्लूकोज रेगुलेशन और दिल की कमजोर सेहत से भी होता है।


















