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उम्र नहीं, एक इलाज वाली बीमारी है पेशाब का बेकाबू रिसाव, छींकने-खांसने पर लीक होना ऐसे रुकेगास्वास्थ्य
1 घंटे पहले· 2

उम्र नहीं, एक इलाज वाली बीमारी है पेशाब का बेकाबू रिसाव, छींकने-खांसने पर लीक होना ऐसे रुकेगा

वर्ल्ड इनकॉन्टिनेंस वीक के मौके पर डॉक्टरों ने साफ किया कि पेशाब रोक न पाना बढ़ती उम्र का हिस्सा नहीं, बल्कि एक चिकित्सकीय स्थिति है, जिसका सही समय पर असरदार इलाज मुमकिन है।

Pooja BhattPooja BhattHealth Correspondent 3 मिनट पढ़ें AI के लिए
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पेशाब का बेकाबू होकर निकल जाना, छींकते या खांसते ही कपड़े गीले हो जाना, या अचानक इतनी तेज पेशाब लगना कि शौचालय तक पहुंचना मुश्किल हो जाए, इन परेशानियों को ज्यादातर लोग चुपचाप झेलते रहते हैं और इसे उम्र बढ़ने की निशानी मान लेते हैं। लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक यह सोच ही गलत है। इन दिनों भारत समेत दुनिया भर में वर्ल्ड इनकॉन्टिनेंस वीक मनाया जा रहा है, जिसका मकसद यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस यानी पेशाब पर नियंत्रण न रख पाने की समस्या को लेकर लोगों को जागरूक करना है।

समाज में आज भी इस विषय पर खुलकर बात नहीं होती, और यही वजह है कि लाखों लोग शर्म के मारे इसे छिपाते रहते हैं। जमशेदपुर के वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट डॉ. संजय जौहरी कहते हैं कि यह कोई आम बात नहीं, बल्कि एक चिकित्सकीय स्थिति है, जिसका सही समय पर इलाज पूरी तरह संभव है।

आखिर यह समस्या है क्या

डॉ. जौहरी बताते हैं कि यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस का मतलब है पेशाब का अनियंत्रित रूप से निकल जाना। कई लोग इसे उम्र बढ़ने का सामान्य हिस्सा मान बैठते हैं, जबकि हकीकत में ऐसा नहीं है। यह दिक्कत महिलाओं और पुरुषों, दोनों को हो सकती है, हालांकि महिलाओं में इसकी आशंका ज्यादा देखी जाती है।

दो तरह की होती है दिक्कत

मुख्य रूप से यह समस्या दो किस्म की होती है, स्ट्रेस इनकॉन्टिनेंस और अर्ज इनकॉन्टिनेंस। स्ट्रेस इनकॉन्टिनेंस में खांसने, छींकने, हंसने, दौड़ने, सीढ़ियां चढ़ने या कोई भारी सामान उठाने भर से पेशाब की कुछ मात्रा अपने आप निकल जाती है। इसकी वजह है मूत्राशय और पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियों का कमजोर पड़ जाना। महिलाओं में यह परेशानी खासतौर पर गर्भावस्था, प्रसव या बढ़ती उम्र के बाद ज्यादा सामने आती है। वर्ल्ड इनकॉन्टिनेंस वीक के दौरान इसी तरह की दिक्कतों को लेकर लोगों को सचेत किया जा रहा है।

दूसरी ओर अर्ज इनकॉन्टिनेंस में व्यक्ति को अचानक और बेहद तेज पेशाब लगती है और वह वक्त रहते शौचालय तक नहीं पहुंच पाता। ऐसे में पेशाब निकल जाने की आशंका बढ़ जाती है। इस स्थिति को ओवरएक्टिव ब्लैडर सिंड्रोम से भी जोड़कर देखा जाता है।

कब डॉक्टर के पास जाना चाहिए

डॉ. जौहरी के मुताबिक अगर किसी को बार-बार कपड़े गीले होने, पेशाब रोकने में दिक्कत, अचानक तेज पेशाब लगने, रात में कई बार उठकर पेशाब जाने या खांसने-छींकने पर पेशाब निकल जाने जैसी परेशानियां हो रही हैं, तो बिना देर किए विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

बचाव के आसान तरीके

इस समस्या से बचने के लिए कुछ अहम उपाय अपनाए जा सकते हैं। नियमित केगल एक्सरसाइज करने से पेल्विक फ्लोर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। इसके साथ ही वजन को काबू में रखना, धूम्रपान से दूरी, पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और कब्ज की शिकायत को दूर रखना भी फायदेमंद साबित होता है। मधुमेह और दूसरी पुरानी बीमारियों को नियंत्रण में रखना भी जरूरी है। पेल्विक मांसपेशियों को ताकत देने वाली कसरत को रोजमर्रा का हिस्सा जरूर बनाएं।

शर्म नहीं, इलाज की जरूरत

डॉ. जौहरी जोर देकर कहते हैं कि सबसे जरूरी बात यह है कि लोग शर्म या संकोच में आकर इस समस्या को छिपाएं नहीं। आधुनिक चिकित्सा में दवाइयों, फिजियोथेरेपी, जीवनशैली में बदलाव और जरूरत पड़ने पर सर्जरी के जरिए इस बीमारी का असरदार इलाज मौजूद है, जिससे मरीज को राहत मिल जाती है।

वर्ल्ड इनकॉन्टिनेंस वीक का संदेश साफ है कि पेशाब रोक न पाना शर्म की बात नहीं, बल्कि एक स्वास्थ्य समस्या है। समय पर पहचान और सही इलाज से मरीज एक सामान्य और आत्मविश्वास से भरा जीवन जी सकता है।

इसका आप पर असर

  • आपके लिए: छींकने-खांसने पर पेशाब लीक होना या बार-बार तेज पेशाब लगना उम्र का हिस्सा नहीं, बल्कि इलाज से ठीक होने वाली स्थिति है, इसलिए शर्म छोड़कर विशेषज्ञ डॉक्टर से जरूर मिलें।
  • बचाव में मददगार: रोजाना केगल और पेल्विक मांसपेशियों की कसरत, वजन काबू में रखना, पर्याप्त पानी, धूम्रपान से दूरी और कब्ज से बचाव इस दिक्कत का खतरा घटा सकते हैं।

सवाल-जवाब

यूरिनरी इनकॉन्टिनेंस क्या है?
यह पेशाब का अनियंत्रित रूप से निकल जाना है, यानी बार-बार बिना चाहे पेशाब लीक हो जाना। यह कोई आम बात नहीं, बल्कि एक चिकित्सकीय स्थिति है।
क्या यह समस्या सिर्फ बढ़ती उम्र की वजह से होती है?
नहीं, इसे उम्र बढ़ने का सामान्य हिस्सा मानना गलत है। यह महिलाओं और पुरुषों दोनों में हो सकती है, हालांकि महिलाओं में इसकी आशंका ज्यादा रहती है।
स्ट्रेस इनकॉन्टिनेंस और अर्ज इनकॉन्टिनेंस में क्या फर्क है?
स्ट्रेस इनकॉन्टिनेंस में खांसने, छींकने, हंसने या भारी सामान उठाने पर पेशाब निकल जाता है, जबकि अर्ज इनकॉन्टिनेंस में अचानक बहुत तेज पेशाब लगती है और व्यक्ति समय पर शौचालय तक नहीं पहुंच पाता।
किन लक्षणों पर डॉक्टर से मिलना चाहिए?
बार-बार कपड़े गीले होना, पेशाब रोकने में दिक्कत, अचानक तेज पेशाब लगना, रात में कई बार उठकर पेशाब जाना या खांसने-छींकने पर पेशाब निकलना जैसी परेशानियों पर तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
इस समस्या से बचाव कैसे करें?
नियमित केगल और पेल्विक मांसपेशियों की कसरत, वजन नियंत्रण, धूम्रपान से बचाव, पर्याप्त पानी पीना, कब्ज दूर रखना और मधुमेह जैसी बीमारियों को काबू में रखना मददगार होता है।
क्या इसका इलाज संभव है?
हां, आधुनिक चिकित्सा में दवाइयों, फिजियोथेरेपी, जीवनशैली में बदलाव और जरूरत पड़ने पर सर्जरी के जरिए इसका असरदार इलाज मौजूद है।
#स्वास्थ्य#यूरिनरीइनकॉन्टिनेंस#वर्ल्डइनकॉन्टिनेंसवीक#पेशाबकीसमस्या#ओवरएक्टिवब्लैडर#केगलएक्सरसाइज#पेल्विकफ्लोर#महिलास्वास्थ्य

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