मशहूर पार्श्व गायिका अलका याग्निक को 23 जून 2026 को आयोजित एक समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हाथों भारत का तीसरा सबसे बड़ा नागरिक सम्मान पद्म भूषण मिला। लेकिन इस खास मौके पर उनकी कमजोर सेहत देखकर फैंस की चिंता बढ़ गई। बाद में अलका याग्निक ने खुद सोशल मीडिया पर इसकी वजह साफ की। उन्होंने बताया कि पिछले दो साल से वह एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या से जूझ रही हैं और यही कारण है कि वह सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखती हैं।
गायिका के मुताबिक साल 2024 में एक हवाई यात्रा के बाद उन्हें सुनने की क्षमता से जुड़ी एक दुर्लभ बीमारी ने जकड़ लिया। इसका नाम सेंसरिन्यूरल हियरिंग लॉस यानी SNHL है। इस बीमारी ने उनकी सुनने की शक्ति पर ऐसा असर डाला कि वह न तो नए गाने रिकॉर्ड कर पा रही हैं और न ही पहले की तरह संगीत की दुनिया में सक्रिय रह पा रही हैं।
आखिर क्या है यह बीमारी
सेंसरिन्यूरल हियरिंग लॉस एक ऐसी स्थिति है जिसमें कान के भीतर मौजूद बेहद छोटी कोशिकाएं या फिर ध्वनि को दिमाग तक पहुंचाने वाली नसें खराब हो जाती हैं। इसका सीधा नतीजा यह होता है कि व्यक्ति को सुनने में दिक्कत होने लगती है। खास बात यह है कि यह परेशानी धीरे-धीरे भी पनप सकती है और अलका याग्निक की तरह अचानक भी सामने आ सकती है। कई मामलों में तो यह जिंदगी भर के लिए स्थायी रूप ले लेती है।
किन वजहों से होती है यह समस्या
इस बीमारी के पीछे एक नहीं, कई कारण हो सकते हैं। बढ़ती उम्र, लंबे समय तक तेज शोर के बीच रहना, कानों का संक्रमण, वायरल बीमारी, सिर पर लगी चोट, कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट और परिवार से मिले आनुवंशिक कारण, ये सभी खतरे को बढ़ा देते हैं। अलका याग्निक के मामले में वायरल संक्रमण को ही इसकी मुख्य वजह माना गया है।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
इस बीमारी के लक्षण काफी अहम होते हैं। सुनने की क्षमता का घटना, आवाजों का साफ की जगह धुंधला सुनाई देना, भीड़भाड़ वाली जगह पर किसी की बात समझ न पाना, कानों में घंटी या सीटी जैसी आवाज गूंजना, कान भरे-भरे से महसूस होना और बीच-बीच में चक्कर आना इसके आम संकेत हैं।
जांच और इलाज का तरीका
इस बीमारी को पकड़ने के लिए सुनने की जांच, एमआरआई और कई दूसरे टेस्ट किए जाते हैं। अगर समस्या शुरुआती चरण में पकड़ में आ जाए तो डॉक्टर स्टेरॉयड दवाओं के जरिए इलाज करते हैं। लेकिन अगर सुनने की शक्ति हमेशा के लिए प्रभावित हो चुकी हो, तो ऐसे में हियरिंग एड या कॉक्लियर इम्प्लांट जैसे विकल्प अपनाने पड़ते हैं।
बचाव के लिए क्या करें
यह सच है कि हर मामले को पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, फिर भी कुछ सावधानियां खतरे को घटा सकती हैं। तेज आवाज से दूरी बनाना, हेडफोन का इस्तेमाल सीमित रखना, समय-समय पर कानों की जांच करवाना और सेहतमंद जीवनशैली अपनाना काफी मददगार साबित होता है। अलका याग्निक भी अक्सर युवाओं को तेज संगीत और हद से ज्यादा हेडफोन के इस्तेमाल से बचने की सलाह देती रही हैं।













