आम तौर पर सिविल सेवा परीक्षा पास करने वाले अधिकारियों के बारे में यही धारणा बनी होती है कि वे अपने शुरुआती स्कूली जीवन से ही पढ़ाई में अव्वल रहे होंगे। समाज में यह आम सोच है कि जो छात्र अपनी शुरुआती कक्षाओं या परीक्षाओं में लड़खड़ा जाते हैं, वे जीवन की सबसे चुनौतीपूर्ण और बड़ी परीक्षाओं में सफलता हासिल नहीं कर सकते। लेकिन बिहार के मुजफ्फरपुर में सिटी एसपी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे मोहिबुल्लाह अंसारी ने इस पारंपारिक सोच को पूरी तरह से गलत साबित कर दिया है। उनकी यह प्रेरणादायक यात्रा इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि शुरुआती नाकामी या असफल्रताएं कभी भी किसी इंसान के भविष्य की अंतिम मंजिल और उसकी क्षमताओं का निर्धारण नहीं करती हैं।
कठोर आलोचना से मिली प्रेरणा और आईआईटी तक का सफर
बिहार के सिवान जिले से ताल्लुक रखने वाले मोहिबुल्लाह अंसारी का शुरुआती शैक्षणिक सफर आसान नहीं रहा और उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। स्थिति तब और चुनौतीपूर्ण हो गई जब वह 10वीं और 12वीं कक्षाओं की प्री-बोर्ड परीक्षाओं में उत्तीर्ण नहीं हो पाए और असफल हो गए। इस निराशाजनक परिणाम के बाद उनके पिता ने उन्हें बेहद खरी-खोटी सुनाई और ताना मारा कि वह प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान में जाने का सपना तो बड़े-बड़े देखते हैं लेकिन सामान्य परीक्षाएं तक पास नहीं कर पा रहे हैं। पिता की यह कड़ी और चुभने वाली बात उनके दिल पर सीधे असर कर गई। उन्होंने इस ताने को अपमान मानने के बजाय एक खुली चुनौती के रूप में स्वीकार किया और अपनी कमजोरियों पर गहराई से काम करना शुरू कर दिया। दिन-रात की कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा को न केवल सफलतापूर्वक पूरा किया, बल्कि प्रतिष्ठित जेईई परीक्षा को पास करते हुए साल 2011 में आईआईटी दिल्ली के केमिकल इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम में प्रवेश पा लिया।
शानदार कॉर्पोरेट नौकरी को अलविदा कह सिविल सेवा में रखा कदम
आईआईटी दिल्ली से बीटेक की अपनी तकनीकी डिग्री पूरी करने के बाद मोहिबुल्लाह अंसारी ने एक जानी-मानी आईटी कंपनी में नौकरी ज्वाइन कर ली और कॉर्पोरेट दुनिया में कदम रखा। लेकिन उनका मन आधुनिक कॉर्पोरेट जीवन की चकाचौंध और भागदौड़ में पूरी तरह से नहीं लग पाया क्योंकि उनकी सोच बहुत बड़ी थी। वह अपने देश, समाज और जरूरतमंद लोगों के लिए कुछ ऐसा महत्वपूर्ण और बड़ा योगदान देना चाहते थे जो धरातल पर बदलाव ला सके। इसी उद्देश्य के साथ उन्होंने अपनी आकर्षक और मोटी कमाई वाली कॉर्पोरेट नौकरी से इस्तीफा दे दिया और देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली यूपीएससी परीक्षा की तैयारी करने का पक्का इरादा कर लिया। साल 2011 के बाद वह देश की राजधानी दिल्ली की तरफ रवाना हुए और सिविल सेवा की प्रशासनिक तैयारी में जुट गए। शुरुआत में इस कठिन रास्ते पर उन्हें कुछ असफलताओं का सामना भी करना पड़ा लेकिन उन्होंने कभी भी अपने कदम पीछे नहीं खींचे और अपनी कमियों से लगातार सीखते रहे। आखिरकार उनकी कड़ी मेहनत रंग लाई और यूपीएससी सीएसई के अपने तीसरे ही प्रयास में सफलता हासिल कर उन्होंने आईपीएस अधिकारी बनने का अपना सपना सच कर दिखाया।
अब सात समंदर पार अमेरिका में मिलने वाला है बड़ा अंतरराष्ट्रीय सम्मान
वर्तमान समय में बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में सिटी एसपी के रूप में अपनी जिम्मेदारियां संभाल रहे मोहिबुल्लाह अंसारी को उनकी असाधारण पुलिसिंग कार्यशैली, बेदाग छवि, ईमानदारी और समाज के उत्थान में उनके निरंतर योगदान के लिए अब वैश्विक स्तर पर सम्मानित किया जा रहा है। संयुक्त राज्य अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य स्थित टाम्पा शहर में आगामी 13 दिसंबर 2026 को आयोजित होने वाले 7वें वर्ल्ड फेयर एंड फेस्टिवल के दौरान उन्हें प्रतिष्ठित 'द एशियन हीरो अवार्ड 2026' से नवाजा जाएगा। यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान एसोसिएशन ऑफ वर्ल्ड फेयर एंड फेस्ट यूएसए इंक की तरफ से प्रदान किया जा रहा है, जिससे न सिर्फ उनके परिवार बल्कि पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा हो गया है। उनकी यह शानदार सफलता साबित करती है कि यदि किसी व्यक्ति के इरादे बुलंद हों और वह सही दिशा में निरंतर प्रयास करता रहे तो दुनिया का कोई भी मुकाम हासिल करना असंभव नहीं है।



















