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भीलवाड़ा के पॉश इलाके में मकान की छत पर एक साथ तीन उल्लू मिलने से हड़कंप, वन विभाग ने सुरक्षित रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ाराजस्थान
26 सित॰ 2026, 3:18 pm (53 मिनट पहले)· 0

भीलवाड़ा के पॉश इलाके में मकान की छत पर एक साथ तीन उल्लू मिलने से हड़कंप, वन विभाग ने सुरक्षित रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ा

राजस्थान के भीलवाड़ा शहर के शास्त्री नगर में एक मकान की छत पर तीन बार्न आउल मिलने से सनसनी फैल गई। वन विभाग की टीम और वन्यजीव संरक्षकों ने मौके पर पहुंचकर तीनों पक्षियों को सुरक्षित पकड़ लिया और प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया।

भीलवाड़ा शहर के शास्त्री नगर क्षेत्र में एक आवासीय मकान की छत पर अचानक तीन दुर्लभ पक्षियों के आ जाने से इलाके में चर्चा का माहौल बन गया। स्थानीय निवासियों ने एक मकान की ऊपरी मंजिल पर जब एक साथ तीन बार्न आउल को बैठे हुए देखा, तो उनके बीच अफरा-तफरी मच गई। इस अनूठी घटना की जानकारी मिलते ही तुरंत वन विभाग को इसकी सूचना दी गई, जिसके बाद बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला।

शास्त्री नगर के एक घर की छत का मामला

यह पूरी घटना शास्त्री नगर में पार्किंग गैराज के नजदीक बने मकान नंबर 845 से जुड़ी हुई है। मकान मालिक कोनार्क मंगनानी के घर की छत पर इन पक्षियों को देखा गया था। सूचना मिलने के तुरंत बाद वन विभाग की टीम और वन्यजीव कार्यकर्ता हरकत में आ गए। वनरक्षक दीपा कंवर, सावित्री तेली और नागरिक सुरक्षा के स्वयंसेवक व वन्यजीव रक्षक नारायण लाल बैरवा घटनास्थल पर पहुंचे। टीम ने वहां पहुंचकर हालात का जायजा लिया और बिना देर किए एक सुनियोजित बचाव अभियान की शुरुआत की।

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सुरक्षित तरीके से पूरा किया गया अभियान

बचाव दल ने अत्यधिक सावधानी बरतते हुए तीनों पक्षियों को अपने कब्जे में लिया। इस पूरी कार्रवाई के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि पक्षियों को किसी भी प्रकार की शारीरिक चोट न पहुंचे और उन्हें अनावश्यक तनाव का सामना न करना पड़े। सफलतापूर्वक पकड़े जाने के बाद, वन अधिकारियों की देखरेख में इन तीनों बार्न आउल को उनके प्राकृतिक और अनुकूल वातावरण वाले जंगल क्षेत्र में सकुशल वापस छोड़ दिया गया।

बार्न आउल से जुड़ी खास जानकारियां

इस सफल बचाव अभियान के बाद वन्यजीव रक्षक नारायण लाल बैरवा ने पक्षी के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि रेस्क्यू किए गए इन पक्षियों का वैज्ञानिक नाम Tyto alba है, जो दुनिया भर में व्यापक रूप से पाई जाने वाली उल्लू की प्रजातियों में से एक है। पूरी दुनिया में उल्लुओं की करीब 223 से ज्यादा प्रजातियां पाई जाती हैं, हालांकि आम नागरिकों को इनमें से बहुत ही सीमित प्रजातियां अपने आसपास देखने को मिलती हैं। कई बार खाने की तलाश में, सुरक्षित ठिकाने की चाहत में या खराब मौसम से बचने के लिए वन्यजीव व पक्षी रिहायशी बस्तियों तक आ पहुंचते हैं। ऐसी स्थिति में घबराने या उन्हें भगाने की कोशिश करने के बजाय वन विभाग या प्रशिक्षित विशेषज्ञों को तुरंत सूचित करना चाहिए।

विभाग की तरफ से आम जनता के लिए अपील

प्रशासन और वन विभाग ने नागरिकों से स्पष्ट अपील की है कि यदि भविष्य में कभी भी किसी के घर, छत या आसपास कोई अनजान वन्यजीव या पक्षी दिखाई दे, तो उसे खुद पकड़ने या नुकसान पहुंचाने का प्रयास न करें। स्थानीय लोगों को तुरंत इसकी सूचना विभाग या अधिकृत वन्यजीव रक्षक तक पहुंचानी चाहिए, जिससे सही समय पर सुरक्षित रेस्क्यू किया जा सके और जीव को उसके प्राकृतिक ठिकाने पर पहुंचाया जा सके।

सवाल-जवाब

भीलवाड़ा में एक साथ कितने उल्लू मिले थे?
भीलवाड़ा के शास्त्री नगर में एक मकान की छत पर एक साथ तीन बार्न आउल देखे गए थे।
यह घटना भीलवाड़ा के किस मकान में हुई थी?
यह घटना शास्त्री नगर में पार्किंग गैराज के पास स्थित मकान नंबर 845 में हुई थी।
बार्न आउल का वैज्ञानिक नाम क्या है?
बार्न आउल का वैज्ञानिक नाम Tyto alba है।
इस रेस्क्यू अभियान में कौन-कौन शामिल था?
इस अभियान में वनरक्षक दीपा कंवर, सावित्री तेली और वन्यजीव रक्षक नारायण लाल बैरवा शामिल थे।
रेस्क्यू के बाद उल्लुओं का क्या किया गया?
सुरक्षित रेस्क्यू करने के बाद तीनों बार्न आउल को उनके अनुकूल प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·19 मिनट पहले

एक साथ तीन उल्लू छत पर कैसे आ गए, यह बात पूरी तरह गले नहीं उतरती। बार्न आउल आमतौर पर अकेले या जोड़े में दिखते हैं, एक साथ तीन का यूं रिहायशी इलाके में मिलना थोड़ा अजीब ज़रूर है।

Rohan Verma@rohan-verma·18 मिनट पहले

करण जी, यूपी के गांवों में भी अक्सर ऐसी जगहों पर उल्लू दिख जाते हैं जहां पुराने खंडहर या बड़े पेड़ हों, शायद यहां भी आसपास कोई ऐसा ठिकाना होगा।

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