बरसाती मौसम में खान-पान का तरीका बदलना बेहद स्वाभाविक है। इस दौरान बाजार में तरह-तरह की हरी और पत्तेदार तरकारियां बिकने के लिए आती हैं। इन्हीं सब्जियों के बीच पोई भी नजर आती है, जिसे बहुत से लोग पहली नज़र में पालक समझ लेते हैं। हालांकि, पकने के बाद इसका स्वाद और बनावट पालक से काफी भिन्न होती है। पोई केवल साग तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे बेहद स्वादिष्ट पकौड़े और आलू के साथ मिलाकर सूखी सब्जी भी पकाई जा सकती है। इसे घर में उगाना भी बेहद आसान है।
पोई के पत्ते की पहचान और प्रमुख किस्में
फरीदाबाद की निवासी और गृहणी वंदना के अनुसार, पोई मुख्य रूप से दो रंगों या किस्मों में पाई जाती है। इसमें एक किस्म हरे रंग की होती है, जबकि दूसरी किस्म हल्के लाल तने वाली होती है। मानसून के समय जब रोजाना की साधारण हरी सब्जियों से मन ऊब जाता है, तब पोई रसोई में एक बेहतरीन विकल्प बनकर सामने आती है।
पोई के पत्तों की सबसे बड़ी खासियत इनकी अत्यधिक कोमलता है। मुलायम पत्तियां होने के कारण इन्हें पकाने में बहुत कम समय लगता है। यह सब्जी किसी एक विशिष्ट मौसम की मोहताज नहीं है, हालांकि बारिश के दिनों में स्थानीय मंडियों और दुकानों पर इसकी उपलब्धता काफी बढ़ जाती है।
स्वास्थ्य के लिए पोई के अद्भुत फायदे
अपनी दैनिक खुराक में पोई को शामिल करने से शरीर को कई अनिवार्य पोषक तत्व हासिल होते हैं। वंदना बताती हैं कि यह हरी सब्जी आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम और फाइबर का एक शानदार स्रोत है। शरीर में हीमोग्लोबिन और आयरन की कमी का सामना कर रहे व्यक्तियों के लिए यह सब्जी विशेष रूप से फायदेमंद मानी जाती है।
इसके अतिरिक्त, इसमें मौजूद कैल्शियम और मैग्नीशियम हड्डियों की मजबूती को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पोई में पाया जाने वाला फाइबर पाचन तंत्र को दुरुस्त रखता है। फाइबर से भरपूर भोजन करने से पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है, जिससे अवांछित भूख नहीं लगती।
स्वादिष्ट साग बनाने के लिए आवश्यक सामग्री
घर पर पोई का साग बनाने के लिए लगभग आधा किलो यानी 0.5 किलोग्राम ताजे पोई के पत्ते बिल्कुल पर्याप्त रहते हैं। इसके तड़के और मसाले के लिए सामग्री का सही अनुपात चुनना जरूरी है।
- मुख्य सब्जी: 0.5 किलो ताजे पोई के पत्ते।
- तीखापन और सुगंध: 5 से 7 ताजी हरी मिर्च और 8 से 10 छिली हुई लहसुन की कलियां।
- सब्जियां: 1 प्याज और 1 टमाटर।
- सूखे मसाले: स्वादानुसार नमक, लाल मिर्च पाउडर, थोड़ी सी हल्दी और 1 छोटी चम्मच धनिया पाउडर।
- तड़का: 2 से 3 साबुत सूखी लाल मिर्च और पकाने के लिए आवश्यकतानुसार तेल।
पोई का साग तैयार करने की चरणबद्ध विधि
पोई का साग बनाने की प्रक्रिया बहुत सरल है। सबसे पहले पोई के पत्तों को साफ पानी में अच्छी तरह धो लें। धुले हुए पत्तों को छोटे या मोटे टुकड़ों में काट लें। अब एक बर्तन में पानी गर्म करें और उसमें कटे हुए पत्ते डालकर उबलने दें। जब पत्ते पूरी तरह गलकर नरम हो जाएं, तो उन्हें ठंडा होने के लिए रख दें।
पत्ते ठंडे होने के बाद, उन्हें मिक्सी में डालें। साथ में कुछ हरी मिर्च और लहसुन मिलाकर महीन पेस्ट तैयार कर लें। इस पिसे हुए मिश्रण को अलग रख दें।
अब एक कढ़ाही में थोड़ा सा तेल गर्म करें। तेल गर्म होते ही बारीक कटा लहसुन और साबुत लाल मिर्च डालें। इसके बाद कटी हुई प्याज डालें और हल्का सुनहरा होने तक भूनें। प्याज भून जाने पर बारीक कटा टमाटर डालें और तब तक पकाएं जब तक टमाटर पूरी तरह गल न जाए।
जब टमाटर पक जाए, तो उसमें हल्दी पाउडर, धनिया पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और नमक मिलाएं। मसालों को तब तक भूनें जब तक कि तेल अलग न दिखाई देने लगे। अब इसमें तैयार पोई का पेस्ट मिला दें। चम्मच की सहायता से मसाले और साग को अच्छी तरह मिलाएं। इसे धीमी आंच पर केवल 2 से 3 मिनट तक पकने दें। इसे ज्यादा देर तक पकाने की आवश्यकता नहीं होती।
पोई से बनने वाले अन्य पसंदीदा पकवान
तैयार पोई के साग को गरम रोटी, पराठे या दाल-चावल के साथ परोसा जा सकता है। वर्षा के मौसम में घर पर बनी यह सब्जी भोजन के जायके को बढ़ा देती है। यदि साग खाने का मन न हो, तो पोई के पत्तों से पकौड़े भी बनाए जा सकते हैं। इसके अलावा आलू के साथ पोई की सूखी सब्जी भी बेहद पसंद की जाती है।


















