राजस्थान के धौलपुर जिले में शनिवार रात से जारी तेज बारिश ने पूरे प्रशासनिक अमले को अलर्ट मोड में ला दिया है। शहर से लेकर गांव तक सड़कों पर पानी भर गया है और आवागमन पूरी तरह गड़बड़ा गया है। सबसे बड़ी चिंता की वजह चंबल नदी है, जिसका जलस्तर महज एक दिन में करीब 8 मीटर उछल गया, जिससे जल संसाधन विभाग और जिला प्रशासन दोनों सतर्क हो गए हैं।
खतरे की रेखा से मुश्किल से 19 सेंटीमीटर दूर चंबल
रविवार सुबह आठ बजे मापी गई ताजा रिपोर्ट के हिसाब से चंबल नदी का गेज 129.60 मीटर तक पहुंच चुका है। इससे ठीक एक दिन पहले यही गेज 121.80 मीटर पर था, यानी महज चौबीस घंटों के भीतर नदी 7.80 मीटर ऊपर आ गई। चेतावनी स्तर के तौर पर तय 129.79 मीटर के मुकाबले नदी अभी सिर्फ 19 सेंटीमीटर नीचे बह रही है, जबकि खतरे का असली निशान 130.79 मीटर पर लगा है। इस रफ्तार से बढ़ते जलस्तर ने निचले इलाकों की निगरानी को और सख्त कर दिया है, क्योंकि थोड़ी सी और बारिश नदी को चेतावनी रेखा पार करा सकती है।
पार्वती बांध के चार फाटक खुले, हजारों क्यूसेक पानी की निकासी
चंबल के इस उछाल के पीछे एक बड़ी वजह पार्वती बांध से हो रही पानी की निकासी भी है। कैचमेंट इलाके में लगातार बरस रहे पानी के चलते बांध में आवक इतनी बढ़ गई कि रविवार सुबह सात बजे जल संसाधन विभाग को दो और फाटक खोलने पड़े। इसके साथ ही बांध पर खुले गेटों की कुल संख्या चार हो गई है और हर गेट को दो-दो फीट तक उठाया गया है। फिलहाल इन चारों फाटकों से 4401.52 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। बांध की पूर्ण भंडारण क्षमता यानी FRL 223.41 मीटर तय है, जबकि इस वक्त गेज 223.05 मीटर पर दर्ज हुआ है। कैचमेंट क्षेत्र में बारिश का सिलसिला अभी थमा नहीं है, इसलिए इंजीनियर लगातार बांध में पानी की आवक पर नजर बनाए हुए हैं।
जिले के आठ केंद्रों पर मूसलधार बारिश, मुख्यालय में सबसे ज्यादा 65 MM
बीते चौबीस घंटों में धौलपुर जिले के आठ अलग-अलग स्थानों पर बारिश दर्ज हुई। सबसे तेज बरसात खुद जिला मुख्यालय में हुई, जहां 65 MM पानी गिरा। इसके बाद सैंपऊ में 61 MM, उर्मिला सागर क्षेत्र में 49 MM और बाड़ी कस्बे में 35 MM बारिश नापी गई। तालाबशाही में 33 MM, राजाखेड़ा में 23 MM जबकि आंगई में 15 MM बारिश रिकॉर्ड हुई। सबसे कम बरसात बसेड़ी में हुई, जहां सिर्फ 11 MM पानी गिरा। इस तरह की व्यापक और लगातार बारिश ने ही चंबल और पार्वती जैसी नदियों में उफान ला दिया है और गांवों के आसपास के नाले भी उफनने लगे हैं।
पार्वती नदी की तीन रपटों पर रुका आवागमन
पार्वती नदी पर बनी तीन रपटों पर पानी चढ़ने से रास्ते पूरी तरह बंद करने पड़े हैं। सैंपऊ की पुरानी रपट पर पानी इतना बढ़ गया कि वहां से गुजरना पूरी तरह वर्जित कर दिया गया। इसी तरह मालौनी और सखवारा की रपटों पर भी करीब दो से तीन फीट पानी बह रहा है। पार्वती बांध से हो रही लगातार निकासी का सीधा असर इन्हीं रपटों पर दिखा है, जहां जलस्तर पल-पल बढ़ रहा है। प्रशासन ने तीनों जगह बैरिकेड लगाकर वाहनों और पैदल आवाजाही दोनों पर रोक लगा दी है और लोगों से रपट पार करने की कोशिश न करने की अपील की गई है।
27 संवेदनशील स्थानों पर सख्त निगरानी, उल्लंघन पर कार्रवाई की चेतावनी
बढ़ते जलस्तर और थमती न दिख रही बारिश को देखते हुए जिला प्रशासन ने पूरे जिले में 27 ऐसे स्थान चिन्हित किए हैं जिन्हें फिलहाल संवेदनशील माना जा रहा है। टूटी-फूटी रपटों, पुलियों और पानी में डूबी सड़कों पर हर तरह की आवाजाही पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है। जिला कलेक्टर श्रीनिधि बी.टी. ने हादसों की आशंका के मद्देनजर अफसरों को सख्त निर्देश दिए हैं कि संवेदनशील रपटों तक लोगों की पहुंच किसी भी सूरत में न हो। जहां तेज बहाव है, वहां बांस-बल्ली और बड़े पत्थर रखकर रास्ते बंद किए जा रहे हैं, जबकि लोक निर्माण विभाग को चेतावनी संकेतक और जंजीर लगाने को कहा गया है। जोखिम भरी रपटों, पुलियों और डूबे हुए पुलों पर पुलिस और राजस्व विभाग के कर्मचारी तैनात कर दिए गए हैं ताकि कोई नियम तोड़कर पार करने की कोशिश न करे। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि पाबंदी के बावजूद अगर कोई व्यक्ति संवेदनशील स्थानों से आवाजाही करता पकड़ा गया तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरी प्रशासनिक मशीनरी की नजर तीन चीजों पर टिकी है, चंबल का बढ़ता जलस्तर, पार्वती बांध में हो रही पानी की आवक और निचले इलाकों के हालात।


















