राशिफल 29 अक्टूबर: करवा चौथ पर कैसा रहेगा 12 राशियों का हाल, जानिए किन लोगों को मिलेगा जबरदस्त लाभटी20 रैंकिंग में नंबर एक की कुर्सी पर मंडराया खतरा, न्यूजीलैंड को रौंदकर टॉप पर पहुंचने के बेहद करीब पहुंचा भारतअस्ताना में भारतीय महिला पहलवानों का कमाल, काजल और नीलम विश्व खिताब के बेहद करीब100 गज में आशियाना बनाने से पहले जान लें जरूरी बातें, आगरा के विशेषज्ञ से समझें नींव से लेकर प्लंबिंग तक के टिप्सजाह्नवी कपूर ने खोला राज, श्रीदेवी के निधन के बाद लंदन से पढ़ाई छोड़कर मुंबई आ गए थे शिखर पहाड़ियाचंद्रपुर में जिला अस्पताल के सामने खूनी संघर्ष, पेवर ब्लॉक से कुचलकर युवक की हत्यामारुति और टाटा की सीएनजी कारों का दबदबा, जानिए सितंबर 2026 की टॉप बिकने वाली गाड़ियांट्रेडिशनल कपड़ों के साथ वेस्टर्न फुटवियर का ट्रेंड, साड़ी और लहंगे पर स्नीकर्स का जलवालॉस एंजिल्स में हुआ नितेश तिवारी की रामायण का ग्लोबल प्रीमियर, रणबीर कपूर और साई पल्लवी ने लूटी महफिलकरवाचौथ की सरगी में ऐसे बनाएं सेवई, दिनभर नहीं लगेगी भूख और प्यास, नोट करें आसान रेसिपी
लखीमपुर खीरी के मुनीर खान ने बनाई बिना सुई के शुगर जांचने वाली एआई डिवाइस, ब्रिटेन में मिला डिजाइन पेटेंटस्वास्थ्य
6 सित॰ 2026, 12:37 pm (52 दिन पहले)· 3

लखीमपुर खीरी के मुनीर खान ने बनाई बिना सुई के शुगर जांचने वाली एआई डिवाइस, ब्रिटेन में मिला डिजाइन पेटेंट

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी निवासी युवा वैज्ञानिक मुनीर खान और मृदुल पांडेय ने फोटोनिक सेंसर और एआई पर आधारित बिना सुई के शुगर जांचने वाली कलाई घड़ी जैसी डिवाइस बनाई है, जिसे ब्रिटेन में डिजाइन रजिस्ट्रेशन मिला है।

डायबिटीज के मरीजों को रोज-रोज उंगली में सुई चुभाने के दर्द से जल्द ही मुक्ति मिल सकती है। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के एक युवा वैज्ञानिक मुनीर खान ने एक ऐसी आधुनिक पोर्टेबल डिवाइस तैयार की है, जो बिना खून की एक भी बूंद निकाले मरीज के शरीर में ग्लूकोज का स्तर बता सकती है। यह नया आविष्कार रोशनी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक की मदद से काम करता है, जिसे पहनकर मरीज कभी भी अपना शुगर लेवल आसानी से जांच सकेंगे।

बिना सुई और बिना खून के कैसे होती है जांच?

यह नॉन-इनवेसिव डिवाइस कलाई पर घड़ी की तरह बांधी जाती है और त्वचा के सीधे संपर्क में रहती है। उपकरण में लगे खास फोटोनिक सेंसर शरीर के ऊतकों के भीतर प्रकाश किरणें भेजते हैं। जब यह प्रकाश ऊतकों से टकराकर वापस लौटता है, तो सेंसर उन संकेतों को पकड़ लेते हैं। इसके बाद डिवाइस में मौजूद AI आधारित प्रोसेसिंग सिस्टम इन प्रकाश संकेतों का विश्लेषण करता है और रक्त में ग्लूकोज के स्तर का सटीक अनुमान लगाता है। इस पूरी प्रक्रिया में न तो किसी सुई को चुभाने की जरूरत पड़ती है और न ही खून की बूंद निकालने की। आकार में छोटा और हल्का होने के कारण मरीज इसे आसानी से पहन सकते हैं या अपने साथ कहीं भी ले जा सकते हैं।

ये भी पढ़ें

ब्रिटेन के इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑफिस में रजिस्ट्रेशन

मुनीर खान और उनकी टीम की इस खोज को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी मान्यता मिली है। ब्रिटेन के इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑफिस में इस मेडिकल उपकरण के डिजाइन को आधिकारिक रूप से पंजीकृत कर लिया गया है। आधिकारिक दस्तावेजों में इस डिवाइस का नाम “Non-invasive Photonic Medical Device for Diabetes Monitoring” दर्ज किया गया है। मुनीर खान के साथ मृदुल पांडेय भी इस डिजाइन के सह-आविष्कारक यानी co-inventor हैं। ब्रिटेन में डिजाइन रजिस्ट्रेशन मिलने से इस शोध दल के बौद्धिक संपदा अधिकारों को कानूनी सुरक्षा मिल गई है।

पारंपरिक ग्लूकोमीटर के दर्द और झंझट से राहत

मधुमेह से पीड़ित मरीजों के लिए दिन में कई बार ग्लूकोज लेवल की जांच करना जीवन का अनिवार्य हिस्सा होता है। खासकर इंसुलिन का सेवन करने वाले मरीजों को दिन में कई बार अपनी शुगर का स्तर मापना पड़ता है। पारंपरिक तरीकों में मरीज को लैंसेट से अपनी उंगली चुभानी पड़ती है, जिससे खून की एक बूंद निकलती है। फिर इस बूंद को टेस्ट स्ट्रिप पर लगाया जाता है और ग्लूकोमीटर कुछ ही सेकंड में रीडिंग दिखाता है। हालांकि यह प्रक्रिया बहुत छोटी लगती है, लेकिन रोजाना बार-बार सुई चुभने के कारण उंगलियों में तेज दर्द, निशान और मानसिक तनाव होता है। मुनीर खान की तकनीक इसी लंबे दर्द को दूर करने का प्रयास करती है।

खेती-किसानी के जिले से निकलकर दुनिया में बनाई पहचान

इस आधुनिक डिवाइस को विकसित करने वाले मुनीर खान उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के एक छोटे से गांव गौरिया के रहने वाले हैं। लखीमपुर खीरी को आमतौर पर एक कृषि प्रधान जिले के तौर पर जाना जाता है, जहां अधिकतर लोग गन्ना, धान, गेहूं और सब्जियों की खेती से अपना जीवनयापन करते हैं। लेकिन अब जिले की नई पीढ़ी खेती के साथ-साथ डिजिटल तकनीक, विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में भी झंडे गाड़ रही है। मुनीर खान का यह काम यह साबित करता है कि ग्रामीण भारत के युवा वैज्ञानिक भी वैश्विक स्तर की स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान खोज रहे हैं।

बाजार में लॉन्च और मेडिकल मंजूरी की प्रक्रिया

ब्रिटेन में डिजाइन रजिस्ट्रेशन पाना मुनीर खान की टीम के लिए एक बड़ी बौद्धिक संपदा उपलब्धि है। हालांकि, इसे आम मरीजों के इस्तेमाल के लिए बाजार में उतारने से पहले कई नियामक प्रक्रियाओं से गुजरना होगा। किसी भी मेडिकल उपकरण को व्यावसायिक रूप से बिक्री या अस्पतालों में निगरानी के लिए पेश करने से पहले संबंधित स्वास्थ्य नियामक संस्थाओं से कड़े परीक्षण और सुरक्षा मंजूरियां हासिल करनी होती हैं। यह परीक्षण प्रक्रिया यह सुनिश्चित करेगी कि डिवाइस द्वारा दिए गए अनुमानित ग्लूकोज आंकड़े चिकित्सकीय रूप से सुरक्षित और सटीक हैं।

सवाल-जवाब

यह नॉन-इनवेसिव ग्लूकोज मॉनिटरिंग डिवाइस किसने बनाई है?
इसे उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी स्थित गौरिया गांव के युवा वैज्ञानिक मुनीर खान और उनके सह-आविष्कारक मृदुल पांडेय ने विकसित किया है।
यह डिवाइस बिना खून निकाले शुगर का स्तर कैसे जांचती है?
यह कलाई पर बांधी जाती है, जहां इसके फोटोनिक सेंसर त्वचा में प्रकाश भेजते हैं और लौटने वाली किरणों को एआई सिस्टम विश्लेषित करके ग्लूकोज का स्तर बताता है।
इस डिवाइस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्या मान्यता मिली है?
इसके डिजाइन को ब्रिटेन के इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑफिस में Non-invasive Photonic Medical Device for Diabetes Monitoring नाम से पंजीकृत किया गया है।
क्या यह डिवाइस बाजार में तुरंत खरीदने के लिए उपलब्ध है?
नहीं, बाजार में व्यावसायिक बिक्री और मरीजों के उपयोग से पहले इस मेडिकल डिवाइस को आवश्यक विनियामक मंजूरियों और स्वास्थ्य परीक्षणों से गुजरना होगा।
पारंपरिक ग्लूकोमीटर के मुकाबले इसका क्या फायदा है?
पारंपरिक ग्लूकोमीटर में उंगली चुभाकर खून निकालना पड़ता है जिससे दर्द होता है, जबकि यह उपकरण बिना सुई चुभाए और बिना दर्द के शुगर की निगरानी करता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp