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गणित में माहिर कांगड़ा के अनन्य ने माता-पिता की पसंद छोड़ चुनी डॉक्टरी, री-नीट में सफलता हासिल कर पाया मेडिकल सीटहिमाचल प्रदेश
8 सित॰ 2026, 1:20 pm (1 घंटे पहले)· 2

गणित में माहिर कांगड़ा के अनन्य ने माता-पिता की पसंद छोड़ चुनी डॉक्टरी, री-नीट में सफलता हासिल कर पाया मेडिकल सीट

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के अनन्य ने माता-पिता द्वारा इंजीनियरिंग की सलाह दिए जाने के बावजूद अपने डॉक्टर बनने के संकल्प को बनाए रखा और री-नीट में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर मेडिकल सीट प्राप्त कर ली।

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में इंदौरा विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गंगथ पंचायत स्थित क्यालू बाबा नगरी गांव के एक युवा ने लगन और कड़ी मेहनत के दम पर नया मुकाम हासिल किया है। गणित विषय में बेहतरीन पकड़ होने और माता-पिता की ओर से इंजीनियरिंग क्षेत्र चुनने के सुझाव के बावजूद अनन्य ने बचपन से देखे गए डॉक्टर बनने के सपने का पीछा नहीं छोड़ा। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा में सफलता प्राप्त करने के बाद अब काउंसलिंग प्रक्रिया के जरिए उसे मेडिकल में प्रवेश मिल गया है, जिससे पूरे इलाके और परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई है।

इंजीनियरिंग की सलाह के बीच डॉक्टर बनने की ज़िद

अनन्य के पिता गगन सिंह शिक्षा विभाग में प्राध्यापक हैं और उनकी माता गृहिणी हैं। चूंकि अनन्य का गणित विषय स्कूली दिनों से ही काफी मजबूत था, इसलिए उसके माता-पिता की स्वाभाविक इच्छा थी कि वह आगे चलकर बीटेक या इंजीनियरिंग जैसे तकनीकी क्षेत्रों में अपना करियर बनाए। परिजनों का मानना था कि गणितीय योग्यता के आधार पर वह इस क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकता है। हालांकि, अनन्य के मन में बचपन से ही चिकित्सा क्षेत्र में जाकर लोगों की सेवा करने का लक्ष्य स्थापित हो चुका था।

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उसने परिवार की इच्छा का सम्मान करते हुए भी अपने प्राथमिक उद्देश्य को नहीं बदला। लगातार लगन से पढ़ाई करते हुए उसने अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखा। पिता गगन सिंह स्वीकार करते हैं कि उनके बेटे की व्यक्तिगत रुचि हमेशा से ही डॉक्टरी में रही, जिसके चलते उन्होंने भी अंततः उसके निर्णय का समर्थन किया और उसकी मेहनत का पूरा फल अब सामने आया है।

शुरुआती शिक्षा से लेकर मेडिकल परीक्षा तक का सफर

शिक्षा के प्रारंभिक चरण में अनन्य ने गंगथ स्थित सिद्धिविनायक स्कूल से बुनियादी पढ़ाई की। इसके बाद कक्षा 6 से लेकर 12वीं तक की शिक्षा उसने डीएवी स्कूल बागनी से पूरी की। 11वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के उपरांत उसने चिकित्सा प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए रणनीति बनाकर पढ़ाई शुरू की। हालांकि, इस राह में चुनौतियां कम नहीं थीं। पहली परीक्षा किसी कारणवश रद्द हो जाने से कई अभ्यर्थियों का मनोबल प्रभावित हुआ, परंतु अनन्य ने धैर्य बनाए रखा।

परीक्षा रद्द होने के बाद भी उसने पढ़ाई का लय नहीं टूटने दिया और री-नीट की परीक्षा में अपनी पूरी ऊर्जा लगा दी। इस पुनरपरीक्षा में उसने उत्कृष्ट अंक हासिल किए, जिसके बाद काउंसलिंग के माध्यम से उसे प्रतिष्ठित मेडिकल सीट आवंटित की गई। यह सफलता उसकी निरंतरता और मानसिक दृढ़ता को दर्शाती है।

तैयारी की रणनीति: बुनियादी समझ और समय प्रबंधन

अपनी इस उपलब्धि पर विचार साझा करते हुए अनन्य ने बताया कि क्यालू बाबा नगरी गंगथ जैसे ग्रामीण परिवेश से निकलकर यह स्थान प्राप्त करना उसके लिए अत्यंत गर्व की बात है। उसने अपनी कामयाबी का श्रेय माता-पिता के संबल और अध्यापकों के सही मार्गदर्शन को दिया। उसके अनुसार, प्रतियोगी परीक्षाओं को उत्तीर्ण करने के लिए विषयों की बुनियादी अवधारणाएं स्पष्ट होना सबसे महत्वपूर्ण कारक होता है।

डीएवी बागनी स्कूल में अध्ययन के दौरान शिक्षकों ने हर विषय के मूल सिद्धांतों को गहराई से समझाया, जिससे उसे कठिन प्रश्नों को हल करने में आसानी हुई। उसने प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे अन्य युवाओं को सलाह दी कि कठिन परिश्रम के साथ-साथ समय के सटीक उपयोग पर विशेष ध्यान देना अनिवार्य है। यदि स्पष्ट लक्ष्य के साथ अनुशासित होकर प्रयास किया जाए, तो सफलता अवश्य प्राप्त होती है। पढ़ाई के अतिरिक्त अनन्य संगीत कला में भी रुचि रखते हैं और काफी सुरीला हारमोनियम बजाते हैं।

खेतों के काम से लेकर देर रात तक पढ़ाई का शेड्यूल

पिता गगन सिंह ने अपने बेटे की इस सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उसके समर्पण की सराहना की। उन्होंने बताया कि अनन्य ने पहले ही प्रयास में यह कठिन मुकाम हासिल किया है। पढ़ाई के अत्यधिक दबाव के बावजूद वह पारिवारिक जिम्मेदारियों से कभी पीछे नहीं हटा। वह घर के कृषि कार्यों में भी अपने माता-पिता का नियमित रूप से हाथ बंटाया करता था और जो भी कार्य सौंपा जाता, उसे पूरी निष्ठा के साथ निभाता था।

उनकी माता ने बताया कि अनन्य का स्वभाव शुरू से ही बेहद जुझारू रहा है। वह तब तक विश्राम नहीं करता था जब तक कि उसका दैनिक पढ़ाई का कोटा समाप्त न हो जाए। स्कूल में पढ़ाए गए पाठों का घर आकर प्रतिदिन पुनरीक्षण करना उसकी दिनचर्या का प्रमुख हिस्सा था। रात में देर तक पढ़ाई करने के दौरान जब परिवार वाले उसे सोने के लिए कहते, तब भी वह अपने अध्ययन लक्ष्य को पूरा करने के बाद ही बिस्तर पर जाता था। पहली परीक्षा रद्द होने जैसी अप्रत्याशित परिस्थिति के बाद भी उसने बिना विचलित हुए दोगुनी मेहनत से दोबारा तैयारी की और अंततः अपना सपना सच कर दिखाया।

सवाल-जवाब

अनन्य किस जिले और गांव के रहने वाले हैं?
अनन्य हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में इंदौरा विधानसभा क्षेत्र की गंगथ पंचायत के क्यालू बाबा नगरी गांव के निवासी हैं।
अनन्य के माता-पिता उनके लिए क्या करियर चाहते थे?
गणित में अच्छा होने के कारण उनके पिता गगन सिंह और माता चाहते थे कि वह इंजीनियरिंग या बीटेक क्षेत्र में करियर बनाएं।
अनन्य ने स्कूली शिक्षा कहां से प्राप्त की?
उन्होंने प्रारंभिक पढ़ाई सिद्धिविनायक स्कूल गंगथ से की और छठी से बारहवीं तक की पढ़ाई डीएवी स्कूल बागनी से पूरी की।
नीट परीक्षा रद्द होने पर अनन्य ने क्या किया?
पहला पेपर रद्द होने पर भी अनन्य ने हिम्मत नहीं हारी और री-नीट परीक्षा की दोबारा कड़ी मेहनत से तैयारी कर मेडिकल सीट हासिल की।
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