हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले के तरोपका गांव में सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग का एक अजीब मामला सामने आया है। यहां एक महिला कर्मचारी के मकान की छत की रेलिंग में जल शक्ति विभाग की पाइपों का इस्तेमाल किए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। रेलिंग पर सरकारी मोहर लगी मिलने के बाद मामला विजिलेंस के पास पहुंच गया और अब विजिलेंस थाना हमीरपुर की टीम इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस टीम ने तुरंत हरकत में आते हुए मौके का मुआयना किया और रेलिंग में लगी पाइपों के टुकड़े काटकर अपने कब्जे में ले लिए। यह पूरी कार्रवाई जल शक्ति विभाग के कर्मचारियों की मौजूदगी में अंजाम दी गई और लिए गए सैंपल आगे की जांच के लिए विभाग को सौंप दिए गए हैं। हालांकि, इन पाइपों का यह इस्तेमाल वास्तव में सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग के दायरे में आता है या नहीं, इसकी पुष्टि केवल विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी।
शिकायत के बाद मौके पर पहुंची विजिलेंस टीम
इस पूरे मामले की औपचारिक शिकायत हिमाचल प्रदेश अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य राजीव राणा द्वारा दर्ज कराई गई थी। उनका आरोप है कि वर्ष 2022 के दौरान जल शक्ति विभाग के स्टोर से पानी के कनेक्शन के लिए जो सरकारी पाइपें जारी की गई थीं, उनका गलत तरीके से उपयोग मकान की रेलिंग तैयार करने में किया गया। शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस टीम ने तरोपका गांव पहुंचकर खुद स्थिति का जायजा लिया। रेलिंग में लगी हुई इन पाइपों पर सरकारी मोहर का पाया जाना इस जांच के लिहाज से सबसे अहम और निर्णायक बिंदु माना जा रहा है। जांच प्रक्रिया के दौरान मौके की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जल शक्ति विभाग के तकनीकी कर्मचारियों को भी विशेष रूप से बुलाया गया था।
पाइप काटकर लिए गए सैंपल और दिए गए निर्देश
विजिलेंस टीम ने गहन निरीक्षण के बाद रेलिंग में फिट इन पाइपों के कुछ हिस्से नमूने के तौर पर काट लिए। इन सभी सैंपलों को सील करके आगे की तकनीकी और आधिकारिक जांच के लिए जल शक्ति विभाग के सुपुर्द कर दिया गया है। इसके साथ ही, विजिलेंस ने मकान में रहने वाले परिवार को सख्त हिदायत दी है कि जब तक इस मामले की पूरी जांच मुकम्मल नहीं हो जाती, तब तक इन पाइपों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या बदलाव नहीं किया जाना चाहिए।
मकान मालिक और पूर्व मालिक के अपने दावे
विवादों में घिरी संबंधित महिला कर्मचारी का इस मामले पर अपना पक्ष है कि उसने यह आशियाना वर्ष 2021 में खरीदा था। उसके अनुसार, जब उसने यह संपत्ति खरीदी थी, तब मकान में जल जीवन मिशन योजना के तहत एक सरकारी नल का कनेक्शन पहले से लगा हुआ था। बाद में जब पीवीसी पाइप का नया कनेक्शन डलवाया गया, तब पुरानी पाइपों को वहां से उखाड़ दिया गया था। इस मामले की कड़ियों को जोड़ने के लिए जांच के दौरान मकान के पूर्व मालिक को भी मौके पर तलब किया गया। पूर्व मालिक ने स्वीकार किया कि उस समय घर में पानी के कनेक्शन के लिए पाइपें डाली गई थीं, लेकिन उस वक्त ठीक कितनी मात्रा में पाइपों का इस्तेमाल हुआ था, इसकी सटीक संख्या उसे याद नहीं है।
कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी और विभाग का रुख
विजिलेंस टीम की इस कार्रवाई के दौरान नादौन विधानसभा क्षेत्र से जुड़े कांग्रेस पार्टी के दो स्थानीय नेता भी मौके पर पहुंच गए। चर्चा है कि इनमें से एक नेता उक्त महिला कर्मचारी का करीबी रिश्तेदार है। वर्तमान तैनाती की बात करें तो यह महिला कर्मचारी सुजानपुर में अपनी सेवाएं दे रही है, जबकि इससे पहले वह हमीरपुर मंडल के अंतर्गत कार्यरत रह चुकी है। दूसरी ओर, जल शक्ति विभाग मंडल हमीरपुर के अधिशासी अभियंता राजीव सहगल ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि विजिलेंस की ओर से सूचना मिलने के बाद विभाग ने अपने कनिष्ठ अभियंता को तुरंत मौके पर भेजा था। विजिलेंस टीम द्वारा जो सैंपल काटकर विभाग को सौंपे गए हैं, उन पर विभागीय स्तर पर विस्तृत जांच की जाएगी और उसके बाद ही वास्तविक स्थिति सबके सामने स्पष्ट हो पाएगी। शिकायतकर्ता राजीव राणा का यह भी कहना है कि उन्होंने पुख्ता सबूतों के आधार पर सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग की शिकायत दर्ज कराई थी और उनका मुख्य उद्देश्य इस मामले में उचित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करवाना है।



















