हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले से बेटियों के सम्मान और खुशी का एक प्रेरणादायक दृश्य सामने आया है, जहां एक परिवार ने नन्ही बच्ची के आगमन का स्वागत बेहद भव्य और अनोखे अंदाज में किया। वार्ड नंबर 10 बाईपास इलाके के रहने वाले रिटायर्ड कानूनगो शेर सिंह के परिवार ने अपनी नवजात नातिन के पहली बार ननिहाल पहुंचने पर पारंपरिक ढर्रे से हटकर खुशियों का इजहार किया। आमतौर पर शादियों में दूल्हे की सवारी के लिए सजाए जाने वाले शाही रथ पर बिठाकर नन्ही परी को घर लाया गया, जिसे देखकर रास्ते में मौजूद स्थानीय लोग भी दंग रह गए।
दूल्हे वाले शाही रथ पर निकली नन्ही परी की सवारी
इस खास स्वागत की तैयारी पहले से की गई थी। जब शेर सिंह की बेटी अपने पति और नवजात बच्ची के साथ पहली बार मायके पहुंची, तो उन्हें घर लाने के लिए विशेष तौर पर वह रथ मंगवाया गया जो आमतौर पर शादियों में दूल्हे की बारात के लिए इस्तेमाल होता है। इस भव्य रथ पर शेर सिंह के दामाद, उनकी बेटी और नवजात नातिन सवार हुए। उनके साथ परिवार के अन्य छोटे बच्चे भी रथ पर बैठे नजर आए। घर से कुछ दूरी पहले से ही बैंड-बाजे की मधुर धुनों के साथ यह रथयात्रा शुरू हुई और पूरे रास्ते उत्सव जैसा माहौल बन गया।
नाना-नानी ने बांटी खुशियां, परिजनों ने किया जोरदार स्वागत
सड़क पर निकली इस अनोखी शोभायात्रा में नाना शेर सिंह, नानी अनिता और परिवार के अन्य रिश्तेदार बैंड-बाजे की ताल पर साथ चलते हुए शामिल हुए। सभी परिजनों ने रास्ते भर इस सुखद पल का खुलकर आनंद लिया और अपनी प्रसन्नता साझा की। घर पहुंचने पर नाना शेर सिंह और नानी अनिता ने अपनी नन्ही नातिन श्रजीनिका का पारंपरिक व आत्मीय तरीके से गृह प्रवेश कराया। आसपास के लोगों ने भी इस अनोखे स्वागत को देखकर परिवार की सराहना की।
तीन साल पहले भी बड़ी बेटी की संतान पर किया था ऐसा ही उत्सव
नाना शेर सिंह ने अपने इस कदम के पीछे की भावना साझा करते हुए बताया कि उनके परिवार में बेटियों के आगमन को हमेशा सर्वोच्च सम्मान दिया जाता है। उन्होंने जानकारी दी कि करीब 3 साल पहले जब उनकी बड़ी बेटी के घर भी कन्या का जन्म हुआ था, तब भी उसे पहली बार ननिहाल लाते समय इसी तरह भव्य रथ पर बिठाकर लाया गया था और पूरा जश्न मनाया गया था। शेर सिंह का कहना है कि घर में बेटियों के कदम पड़ने से परिवार की खुशियां दोगुनी हो जाती हैं। आज के बदलते दौर में बेटियां हर क्षेत्र में बेटों के बराबर हैं और किसी भी मामले में कम नहीं हैं, इसलिए उनके परिवार में जब भी कोई बेटी जन्म लेती है तो इसी तरह गाजे-बाजे के साथ गौरव का उत्सव मनाया जाता है।



















