हरियाणा में दो दिन की राहत के बाद मौसम ने एक बार फिर तेवर दिखाए। गुरुग्राम समेत प्रदेश के कई हिस्सों में 15 जून की दोपहर अचानक आसमान बदला और आंधी-तूफान के साथ बारिश शुरू हो गई। सबसे चौंकाने वाला नजारा भिवानी के सिवानी क्षेत्र में देखने को मिला, जहां धूल का करीब 100 मीटर ऊंचा बवंडर उठता दिखाई दिया। हांसी में बारिश के साथ हल्के ओले भी गिरे।
किन जिलों में मचा बवाल
तेज आंधी-तूफान का असर हिसार, सिरसा, भिवानी, रोहतक, नारनौल, रेवाड़ी, सोनीपत, फतेहाबाद और पानीपत तक फैला रहा। गुरुग्राम में बारिश इतनी हुई कि कई सड़कों पर पानी भर गया और जलभराव की स्थिति बन गई। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने प्रदेश के 15 जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश का अलर्ट जारी किया। विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में भी मौसम में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा और अगले पांच दिनों में अधिकतम तापमान में करीब 5 डिग्री तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
16 जून को फिर लौट सकता है तूफान
मौसम विभाग के मुताबिक हरियाणा में आज, 16 जून को एक बार फिर भारी बारिश और तेज तूफान की आशंका है। कुछ इलाकों में हवाओं की रफ्तार 80-90 किमी/घंटा तक पहुंच सकती है। इतनी तेज हवाओं में बड़े पेड़ उखड़ने और खड़ी फसल को नुकसान पहुंचने का खतरा बना रहता है, इसलिए विभाग ने आम लोगों और खासकर किसानों को बेहद सतर्क रहने को कहा है। दिन में कई जगहों पर आंशिक बादल छाए रहेंगे, जबकि दोपहर या शाम के समय हल्की से बहुत हल्की बारिश के साथ आंधी, बिजली कड़कने, धूल भरी आंधी और 40-50 किमी/घंटा की हवाएं चल सकती हैं, जिनके झोंके 60 किमी/घंटा तक जा सकते हैं।
तूफान में खुद को कैसे बचाएं
- तूफान के दौरान पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें।
- बिजली कड़कने पर घर के अंदर ही रहें।
- बिजली गिरने के समय कंक्रीट के फर्श पर न लेटें।
- बिजली और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का प्लग निकाल दें।
- मौसम विभाग की जानकारी और चेतावनियों पर लगातार नजर रखें।
- किसान जहां तक संभव हो, अपनी फसलों और पशुओं की सुरक्षा का इंतजाम करें।
हिमाचल में पांच दिन कैसा रहेगा मौसम
पड़ोसी हिमाचल प्रदेश में भी मौसम करवट ले रहा है। कांगड़ा, मंडी, चंबा, कुल्लू और किन्नौर में 16 से 18 जून के बीच बारिश और तूफान का अलर्ट है। IMD के अनुसार इन इलाकों में 60-65 किमी/घंटा की तेज हवाएं चलने की संभावना है। राज्य के मध्य और ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में अगले पांच दिनों तक लगातार बादल छाए रहने के आसार हैं और कुछ जगहों पर रुक-रुक कर हल्की बारिश हो सकती है। मौसम विभाग ने 18 और 19 जून के लिए कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला जिलों में येलो अलर्ट जारी किया है। इस दौरान इन जिलों में गरज-चमक के साथ अंधड़ चलने और बिजली गिरने की आशंका है, जबकि हवाओं की रफ्तार 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटा तक रह सकती है। बाकी दिनों में राज्य में कोई बड़ा मौसमी संकट नहीं रहेगा।
इस बार धीमा क्यों रहेगा मानसून
हिमाचल में इस साल मानसून का मिजाज कुछ सुस्त रह सकता है और सामान्य से कम बारिश का अनुमान है। मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक प्रतिवर्ष की तुलना में इस बार मानसून हल्का रहेगा। इसकी एक बड़ी वजह अल नीनो है, जिसके चलते बारिश घट जाती है। इसके साथ ही हिंद महासागर में दबाव की स्थिति इस समय न्यूट्रल यानी सामान्य बनी हुई है। जब यह स्थिति पॉजिटिव होती है तो अच्छी बारिश होती है, लेकिन न्यूट्रल रहने के कारण इस बार मानसून को कोई अतिरिक्त बल नहीं मिल पा रहा।
हिमाचल कब पहुंचेगा मानसून
हिमाचल में मानसून के पहुंचने की सामान्य तारीख 20 से 25 जून के बीच मानी जाती है। इस साल मानसून अपनी सामान्य रफ्तार से आगे बढ़ रहा है और अब तक देश के दक्षिणी प्रायद्वीप, पूर्वोत्तर राज्यों तथा पूर्वी भारत के हिस्सों को कवर कर चुका है। जैसे ही यह उत्तर-पश्चिम भारत में दाखिल होगा, उसके बाद ही हिमाचल में इसके पहुंचने की तस्वीर साफ हो पाएगी।
क्लाउड बर्स्ट का खतरा कम क्यों
कमजोर मानसून का एक फायदा यह है कि क्लाउड बर्स्ट और अत्यधिक भारी बारिश जैसी चरम मौसमी घटनाएं इस बार तुलनात्मक रूप से काफी सीमित रहेंगी। इससे पहाड़ी इलाकों में बड़ी आपदाओं का जोखिम भी घट जाएगा।













