हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मंडी जिले में एक नवनिर्मित स्कूल भवन के लगातार खाली पड़े रहने के गंभीर मामले में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। यह पूरा विवाद मंडी जिले के द्रंग विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पधर इलाके में स्थित सीनियर सेकेंडरी स्कूल देवरी से जुड़ा हुआ है। स्कूल का नया और आधुनिक भवन पूरी तरह से बनकर तैयार हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन ने अभी तक स्थानीय विद्यार्थियों को इस नई इमारत में शिफ्ट करने की अनुमति नहीं दी है। इस अनावश्यक देरी को लेकर अदालत ने सरकार से जवाब-तलब किया था, लेकिन जब सुक्खू सरकार ने तय समय सीमा के भीतर अपना आधिकारिक जवाब दाखिल नहीं किया, तो अदालत ने इस घोर लापरवाही पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
बाढ़ में ढह गया था पुराना स्कूल, प्रियंका गांधी ने किया था वादा
इस स्कूल के निर्माण का इतिहास एक भयानक प्राकृतिक आपदा और उसके बाद किए गए वादों से गहराई से जुड़ा हुआ है। दरअसल, कुछ समय पहले इस इलाके में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड (अचानक आई बाढ़) की चपेट में आकर पुराने सीनियर सेकेंडरी स्कूल की पूरी इमारत ताश के पत्तों की तरह ढह कर बह गई थी। इस भारी तबाही के कारण सैकड़ों बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह से ठप पड़ गई थी। उस संकट की घड़ी में प्रमुख कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने स्वयं आपदा प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया था और वहां हुए भारी नुकसान का मौके पर जाकर जायजा लिया था। बच्चों की शिक्षा के नुकसान को देखते हुए उन्होंने उसी वक्त एक नए और सुरक्षित स्कूल भवन के निर्माण का बड़ा ऐलान किया था। उसी अहम घोषणा के परिणामस्वरूप, करीब पौने पांच करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से यह शानदार नया भवन तैयार किया गया है, जो अब बच्चों को एक सुरक्षित शैक्षणिक माहौल देने के लिए पूरी तरह से सक्षम है।
उद्घाटन की राजनीति में फंसा बच्चों का भविष्य
करोड़ों रुपये खर्च होने और भवन के पूरी तरह से तैयार होने के बावजूद, बच्चे इसका लाभ इसलिए नहीं उठा पा रहे हैं क्योंकि यह पूरी परियोजना एक बड़ी राजनीतिक खींचतान और श्रेय लेने की होड़ का शिकार हो गई है। यह मामला तब और ज्यादा तूल पकड़ गया जब हाल ही में हिमाचल प्रदेश के शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर इस नई इमारत का विधिवत उद्घाटन करने के लिए देवरी पहुंचे थे। लेकिन एक बेहद चौंकाने वाले घटनाक्रम में, उनके उद्घाटन कार्यक्रम को बीच में ही रोक दिया गया। इस घटना ने एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया। बताया जा रहा है कि इस पूरे गतिरोध और देरी के पीछे मुख्य कारण यह है कि सुक्खू सरकार की प्रबल इच्छा है कि इस स्कूल का औपचारिक उद्घाटन खुद प्रियंका गांधी के हाथों से ही संपन्न हो, क्योंकि आपदा के समय इस स्कूल को बनाने का संकल्प उन्हीं के द्वारा लिया गया था।
तय समय पर जवाब न देने पर हाईकोर्ट हुआ सख्त
एक तरफ शानदार स्कूल बनकर तैयार था और दूसरी तरफ उद्घाटन की राजनीति के चलते बच्चे परेशान हो रहे थे। इसी से तंग आकर स्थानीय लोगों ने न्यायपालिका का दरवाजा खटखटाया। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को तुरंत समझा और इसे केवल एक इमारत का विवाद मानने से इनकार कर दिया। अदालत ने सबसे पहले सरकार से 22 जुलाई तक जवाब मांगा था कि आखिर किस वजह से बच्चों को सुरक्षित नई इमारत में नहीं भेजा जा रहा है। लेकिन जब सरकार ने तय समय पर अपना जवाब पेश करने में कोताही बरती, तो दोबारा हुई सुनवाई में हाईकोर्ट के जजों ने सख्त नाराजगी जाहिर की। अदालत ने सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए स्पष्ट किया कि यह मामला सिर्फ ईंट-पत्थर के एक ढांचे का नहीं है, बल्कि यह सीधे तौर पर क्षेत्र के सैकड़ों विद्यार्थियों की बुनियादी शिक्षा, उनकी रोजमर्रा की सुरक्षा और उनके सुनहरे भविष्य से जुड़ा हुआ एक अत्यंत संवेदनशील मुद्दा है।
5 अगस्त को होगी अगली सुनवाई, अभिभावकों को न्याय की आस
सरकार के ढीले रवैये को देखते हुए अब हाईकोर्ट ने और अधिक सख्ती बरती है। अदालत ने सुक्खू सरकार को 5 अगस्त तक का अंतिम और स्पष्ट समय दिया है। अदालत ने सख्त निर्देश जारी किए हैं कि सरकार इस निर्धारित तारीख तक अपना विस्तृत जवाब हर हाल में पेश करे और यह साफ करे कि बच्चों को नए भवन में जाने से रोकने के क्या कारण हैं। इस बीच, क्षेत्र के अभिभावकों और स्थानीय जनता में सरकार की इस लेटलतीफी के प्रति भारी रोष है। वे लंबे समय से यह मांग कर रहे हैं कि बिना किसी राजनीतिक और अनावश्यक देरी के बच्चों को तुरंत यह स्कूल सौंप दिया जाए। इस पूरी कानूनी लड़ाई में स्थानीय निवासी और वरिष्ठ अधिवक्ता उदयनंद शर्मा अपने साथी वकीलों की पूरी टीम के साथ अदालत में विद्यार्थियों के हक की जोरदार पैरवी कर रहे हैं। अब पूरे क्षेत्र के लोगों की निगाहें 5 अगस्त की सुनवाई पर टिकी हैं और उन्हें पूरी उम्मीद है कि सरकार अदालत के निर्देशों का सम्मान करते हुए जल्द ही बच्चों को नए स्कूल भवन में शिफ्ट करने की प्रक्रिया शुरू करेगी।




















