हिमाचल प्रदेश में स्थानीय निवासियों और पर्यटकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) ने पंडोह डैम से लेकर मंडी शहर तक एक बेहद अहम और आधुनिक अलार्मिंग सिस्टम चालू कर दिया है। 1.4 करोड़ रुपये की भारी लागत से तैयार किया गया यह पूरा सुरक्षा नेटवर्क डैम सेफ्टी एक्ट 2021 के कड़े दिशानिर्देशों का पूरी तरह से पालन करता है। इस नई व्यवस्था का मुख्य लक्ष्य नदी के आसपास रहने वाले लोगों और वहां घूमने आने वाले पर्यटकों को डैम से पानी छोड़े जाने से पहले ही स्पष्ट रूप से अलर्ट करना है, ताकि किसी भी तरह के जानमाल के भारी नुकसान को समय रहते टाला जा सके।
पुरानी घटनाओं से ली गई सीख
सुरक्षा के इस कड़े और जरूरी कदम को उठाने के पीछे एक बहुत ही दर्दनाक अतीत जुड़ा हुआ है। कुछ समय पहले मंडी से आगे थलौट इलाके में एक बहुत बड़ा हादसा हुआ था, जहां लारजी डैम से अचानक पानी छोड़े जाने के कारण हैदराबाद से आए 30 बच्चे नदी की तेज धार में बह गए थे। इस भयावह घटना के अलावा, मानसून और बाढ़ के दौरान भी कई बार ब्यास नदी का जलस्तर नियंत्रित करने के लिए डैम के गेट खोलने पड़ते हैं। पहले लोगों तक इसकी जानकारी समय पर नहीं पहुंच पाती थी, जिससे हमेशा खतरा बना रहता था। इन्हीं दर्दनाक हादसों और पूर्व की परेशानियों से सबक लेते हुए, अब यह नया अलार्मिंग सिस्टम स्थापित किया गया है।
किस तरह काम करेगा यह नेटवर्क
इन छह अत्याधुनिक चेतावनी मशीनों को लगाने का जमीनी काम 30 अप्रैल को ही पूरी तरह से खत्म कर लिया गया था और अब यह सिस्टम पूरी तरह से काम कर रहा है। बीबीएमबी के अतिरिक्त अधीक्षण अभियंता चंद्रमणी शर्मा ने स्पष्ट किया कि इस पूरी परियोजना का एकमात्र उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जब भी डैम से भारी मात्रा में पानी छोड़ा जाए, तो नदी के किनारे गए किसी भी व्यक्ति के साथ कोई अप्रिय घटना न घटे। तय प्रक्रिया के तहत, पंडोह डैम से पानी डिस्चार्ज करने से ठीक आधा घंटा पहले इस सिस्टम को सक्रिय कर दिया जाएगा। यह 30 मिनट का बहुमूल्य समय लोगों को सुरक्षित दूरी पर जाने के लिए काफी होगा।
सायरन के साथ लाइव अनाउंसमेंट की सुविधा
यह नया चेतावनी तंत्र केवल साधारण सायरन बजाने तक ही सीमित नहीं है। चंद्रमणी शर्मा ने विस्तार से बताया कि जो छह अलार्मिंग सिस्टम लगाए गए हैं, उनमें तेज हूटर बजने के साथ-साथ सीधे अनाउंसमेंट करने की भी विशेष सुविधा दी गई है। सामान्य परिस्थितियों में केवल हूटर बजाकर ही आम जनता को सचेत करने का काम किया जाएगा। हालांकि, अगर कोई बड़ी आपात स्थिति पैदा होती है, तो इन मशीनों के जरिए स्पष्ट वॉयस मैसेज भी प्रसारित किए जा सकते हैं। जरूरत पड़ने पर यह वॉयस मैसेज पहले से रिकॉर्ड किया हुआ हो सकता है या फिर अधिकारियों द्वारा सीधे लाइव भी बोला जा सकता है, जिससे लोगों तक सही समय पर सही निर्देश पहुंच सकें।




















