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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, पहली पत्नी के निधन के बाद भी दूसरी पत्नी को नहीं मिलेगा पारिवारिक पेंशन का अधिकारहिमाचल प्रदेश
21 अग॰ 2026, 11:11 am (3 घंटे पहले)· 2

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, पहली पत्नी के निधन के बाद भी दूसरी पत्नी को नहीं मिलेगा पारिवारिक पेंशन का अधिकार

दूसरी शादी को कानूनन अमान्य मानते हुए हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पहली पत्नी की मृत्यु के बाद दूसरी पत्नी को मृतक सरकारी कर्मचारी की पारिवारिक पेंशन का हक नहीं मिल सकता।

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों की पारिवारिक पेंशन से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्थिति साफ कर दी है। अदालत ने निर्णय दिया कि यदि किसी कर्मचारी ने अपनी पहली शादी के रहते हुए दूसरी शादी की थी, तो पहली पत्नी की मृत्यु हो जाने के बाद भी दूसरी पत्नी को पारिवारिक पेंशन पाने का कोई कानूनी या वैधानिक अधिकार नहीं मिलता। एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि पहली शादी के अस्तित्व में रहते रचाया गया दूसरा विवाह कानून की नजर में अमान्य होता है, इसलिए पहली पत्नी के गुजर जाने से दूसरी शादी वैध नहीं बन जाती।

पेंशन दावे का मामला और पारिवारिक पृष्ठभूमि

यह पूरा मामला शिमला में शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त हुए जूनियर बेसिक टीचर खूब राम के परिवार से जुड़ा हुआ है। खूब राम 1 जून 1996 को अपनी सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हुए थे। उनकी पहली शादी खिमी देवी के साथ हुई थी। काफी समय बीत जाने के बाद भी जब पहली पत्नी से कोई संतान नहीं हुई, तब खूब राम ने दूसरा विवाह करने का निर्णय लिया। उन्होंने 5 दिसंबर 1970 को दमयंती देवी से दूसरी शादी रचा ली। हालांकि, इस दूसरी शादी के समय खूब राम ने अपनी पहली पत्नी खिमी देवी से कोई कानूनी तलाक नहीं लिया था और उनका पहला विवाह पूरी तरह से कायम था।

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पहली पत्नी के निधन के बाद खड़ा हुआ विवाद

सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त होने के कई वर्षों बाद 13 अक्तूबर 2014 को खूब राम का निधन हो गया। पति की मृत्यु के पश्चात नियमानुसार उनकी पहली कानूनी पत्नी खिमी देवी को पारिवारिक पेंशन मिलना शुरू हो गई। खिमी देवी को 2 जुलाई 2023 को अपने निधन तक यह पेंशन लगातार मिलती रही। पहली पत्नी की मृत्यु होने के बाद दमयंती देवी ने खुद को जीवित विधवा बताते हुए संबंधित विभाग के समक्ष पारिवारिक पेंशन पर अपना दावा पेश किया। उन्होंने अपने नाम पर पेंशन जारी करने के साथ ही पिछले बकाया भुगतान की भी मांग की, जिसे प्रशासनिक अधिकारियों ने सिरे से खारिज कर दिया।

हाईकोर्ट का रुख और याचिका खारिज

प्रशासनिक स्तर पर दावा खारिज होने के बाद दमयंती देवी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की एकल पीठ ने विवाह की कानूनी वैधता और पेंशन अधिकारों का विस्तार से विश्लेषण किया। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि जब तक पहली शादी कानूनी रूप से खत्म न हुई हो, तब तक किया गया दूसरा विवाह कानून में शून्य माना जाता है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने दमयंती देवी की याचिका को खारिज करते हुए यह व्यवस्था दी कि केवल पहली पत्नी की मौत हो जाने भर से दूसरी पत्नी को सरकारी कर्मचारी की पेंशन पर कोई अधिकार नहीं दिया जा सकता।

सवाल-जवाब

क्या पहली पत्नी की मौत के बाद दूसरी पत्नी पारिवारिक पेंशन का दावा कर सकती है?
नहीं, यदि दूसरा विवाह पहली पत्नी के जीवित रहते और बिना तलाक के किया गया था, तो पहली पत्नी के निधन के बाद भी दूसरी पत्नी पेंशन का दावा नहीं कर सकती।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने यह याचिका क्यों खारिज की?
हाईकोर्ट की एकल पीठ ने स्पष्ट किया कि पहली शादी के कायम रहते किया गया दूसरा विवाह कानून की नजर में अमान्य है, इसलिए दूसरी पत्नी को पेंशन का वैधानिक अधिकार नहीं मिलता।
इस मामले में कर्मचारी खूब राम कौन से पद से सेवानिवृत्त हुए थे?
खूब राम हिमाचल प्रदेश के शिक्षा विभाग में जूनियर बेसिक टीचर के पद पर तैनात थे और 1 जून 1996 को सेवानिवृत्त हुए थे।
खूब राम के निधन के बाद पेंशन किसे दी जा रही थी?
13 अक्तूबर 2014 को खूब राम की मृत्यु के बाद नियमों के तहत उनकी पहली कानूनी पत्नी खिमी देवी को पारिवारिक पेंशन दी जा रही थी।
याचिकाकर्ता दमयंती देवी ने हाईकोर्ट में क्या मांग की थी?
दमयंती देवी ने खुद को जीवित विधवा बताते हुए 2 जुलाई 2023 को खिमी देवी के निधन के बाद पेंशन जारी करने और पिछले बकाए के भुगतान की मांग की थी।
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