जयपुर के कालवाड़ स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल वीर तेजाजी महाराज कालवाड़ सालासर बगीची में आने वाले श्रद्धालुओं की लंबे समय से चली आ रही विश्राम स्थल की समस्या अब हमेशा के लिए खत्म हो गई है। दूर-दराज के इलाकों से दर्शन करने पहुंचने वाले भक्तों को वहां बैठने और कुछ देर सुस्ताने के लिए किसी स्थायी छत की सख्त दरकार थी। श्रद्धालुओं की इस बुनियादी तकलीफ को देखते हुए स्थानीय समाजसेवी नरेंद्र मीणा उर्फ छोटू मीणा ने व्यक्तिगत स्तर पर आगे आकर लाखों रुपये की लागत से एक भव्य धर्मशाला का निर्माण पूरा करवाया है। करीब एक वर्ष के निरंतर काम के बाद तैयार हुई यह धर्मशाला अब पूरी तरह श्रद्धालुओं और क्षेत्रवासियों के उपयोग के लिए खोल दी गई है।
श्रद्धालुओं के आग्रह पर तुरंत शुरू हुआ था काम
इस धार्मिक स्थल पर नियमित रूप से दर्शनार्थियों का तांता लगा रहता है, लेकिन परिसर में कोई स्थायी ढांचा मौजूद नहीं होने की वजह से यात्रियों को कड़ी धूप, बारिश या लंबी यात्रा के बाद भारी असुविधा का सामना करना पड़ता था। लगभग एक वर्ष पूर्व जब स्थानीय और बाहर से आए श्रद्धालुओं ने नरेंद्र मीणा से इस परेशानी का साझा समाधान निकालने की गुहार लगाई, तो उन्होंने केवल कोरे आश्वासन देने के बजाय मौके पर ही धर्मशाला बनवाने का संकल्प लिया। इसके तुरंत बाद निर्माण की रूपरेखा तैयार कर काम शुरू कराया गया। पूरे प्रोजेक्ट का सारा आर्थिक भार उन्होंने अपनी जेब से उठाया, जिससे बिना किसी सरकारी या सार्वजनिक चंदे के एक साल के भीतर काम पूरा हो गया।
विश्राम के साथ धार्मिक और सामाजिक आयोजनों का बनेगा केंद्र
नवनिर्मित धर्मशाला की उपयोगिता केवल दर्शनार्थियों के बैठने या कुछ देर आराम करने तक सीमित नहीं रहेगी। इस विशाल परिसर को इस तरह विकसित किया गया है कि स्थानीय समाज और श्रद्धालु यहां छोटे-बड़े धार्मिक अनुष्ठान, सत्संग और सामुदायिक सामाजिक कार्यक्रम भी आयोजित कर सकेंगे। इलाके के बाशिंदों का कहना है कि कालवाड़ सालासर बगीची जैसे व्यस्त स्थल पर ऐसी स्थायी सुविधा पहली बार बनी है, जिसका सीधा फायदा उन ग्रामीण और बाहरी परिवारों को मिलेगा जो पारिवारिक आयोजनों या धार्मिक उत्सवों के दौरान यहां जुटते हैं।
माता-पिता के संस्कारों को दिया श्रेय, उन्हीं को समर्पित की इमारत
धर्मशाला का निर्माण कार्य संपन्न होने के बाद नरेंद्र मीणा उर्फ छोटू मीणा ने इसे अपने पूज्य माता-पिता को समर्पित किया। अपने विचार साझा करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि जीवन में उन्हें जो भी सफलता, साधन और प्रतिष्ठा मिली है, वह सब उनके माता-पिता के दिए उच्च संस्कारों और ज्ञान की बदौलत है। उनके अनुसार उनके माता-पिता ही उनके प्रथम गुरु और पथप्रदर्शक हैं, इसलिए उनके सम्मान में इस लोकोपकारी कार्य को समर्पित करना उनके लिए सबसे बड़ा संतोष है। परिसर में पहली बार तैयार हुई इस स्थायी व्यवस्था से अब हर वर्ग के श्रद्धालु लाभान्वित हो सकेंगे।
स्थानीय नागरिकों ने समाजसेवा की मिसाल को सराहा
कालवाड़ क्षेत्र के निवासियों और नियमित दर्शनार्थियों ने नरेंद्र मीणा के इस सेवा कार्य की दिल खोलकर तारीफ की है। लोगों का कहना है कि जब आम तौर पर सार्वजनिक स्थलों पर किसी बुनियादी ढांचे के निर्माण में वर्षों लग जाते हैं या बात कागजों में अटकी रहती है, तब एक नागरिक द्वारा निजी संसाधनों से इतनी बड़ी सुविधा खड़ी करना वास्तविक समाजसेवा का परिचायक है। ग्रामीणों ने कहा कि संकट या जरूरत के समय बिना किसी हिचकिचाहट के समाजहित में खड़े होने वाले ऐसे व्यक्तित्व क्षेत्र के लिए प्रेरणास्रोत हैं।





















