भरूच के बहुचर्चित दुष्कर्म और हत्याकांड में मौत की सजा पाए कैदी विजय पासवान की वडोदरा सेंट्रल जेल में दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। जेल परिसर में स्वास्थ्य बिगड़ने के तुरंत बाद उसे इलाज के लिए सयाजी अस्पताल ले जाया गया था, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। अदालत ने बच्ची के साथ हुई अमानवीय दरिंदगी को दुर्लभतम श्रेणी का अपराध मानते हुए दोषी को फांसी की सजा सुनाई थी। हालांकि इस अप्रत्याशित मौत के बाद दोषी के परिवार ने पूरी जांच और कानूनी प्रक्रिया पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
दिसंबर 2024 की दर्दनाक घटना और पुलिस जांच
यह पूरा मामला दिसंबर 2024 के दौरान सामने आया था। 16 दिसंबर को भरूच जिले के झघड़िया जीआईडीसी औद्योगिक इलाके से 10 वर्षीय एक मासूम बच्ची अचानक रहस्यमय हालात में गायब हो गई थी। बच्ची का परिवार मूल रूप से झारखंड का रहने वाला था और यहां मजदूरी करके अपना जीवन यापन कर रहा था। खोजबीन के दौरान पुलिस को पता चला कि आरोपी मासूम को बहला-फुसलाकर एक सुनसान स्थान पर ले गया था। वहां उसने बच्ची के साथ क्रूरतापूर्वक दुष्कर्म किया और बाद में अपनी पहचान छिपाने के मकसद से उसकी बेरहमी से हत्या करने की कोशिश की।
लापता होने के बाद बच्ची झाड़ियों के बीच अत्यंत गंभीर और लहूलुहान अवस्था में बरामद हुई थी। मासूम के चेहरे, पेट और नाजुक अंगों पर गहरे जख्म पाए गए थे। नाजुक हालत को देखते हुए उसे तुरंत वडोदरा के सयाजी अस्पताल में दाखिल कराया गया। डॉक्टरों की गहन निगरानी के बावजूद आठ दिनों तक जिंदगी और मौत से संघर्ष करने के बाद आखिरकार बच्ची ने दम तोड़ दिया।
फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर गिरफ्तारी और फांसी की सजा
मासूम के साथ हुई इस बर्बरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने विशेष जांच टीमों का गठन किया था। जांच दल ने इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाले, आधुनिक तकनीकी सर्विलांस का सहारा लिया और फॉरेंसिक सबूत एकत्र किए। इन ठोस वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने विजय पासवान को दबोच लिया।
मामले की कानूनी कार्यवाही बेहद तेज गति से आगे बढ़ी। फरवरी 2025 में अदालत के भीतर नियमित ट्रायल शुरू किया गया। सभी पक्षों की दलीलें और साक्ष्य देखने के बाद मई 2025 के पहले सप्ताह में अदालत ने अपना फैसला सुनाया। अदालत ने विजय पासवान को बच्ची के बलात्कार और हत्या का मुख्य दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई थी।
पत्नी ने लगाए गंभीर आरोप और निष्पक्ष जांच की मांग
अस्पताल में दिल का दौरा पड़ने से विजय पासवान की मौत होने के बाद उसकी पत्नी बबीता देवी ने जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। बबीता देवी ने अपने पति को पूरी तरह निर्दोष बताते हुए दावा किया कि असली अपराधियों को बचाने के लिए उनके पति को बलि का बकरा बनाया गया।
बबीता देवी ने कहा, "मेरे पति को इस मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है। असली आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।"
मृतक की पत्नी ने यह भी आरोप लगाया कि कानूनी प्रक्रिया के दौरान सरकारी पक्ष द्वारा उनका पक्ष अदालत के सामने सही ढंग से नहीं रखा गया। उन्होंने जेल के भीतर हुई इस मौत को संदिग्ध करार देते हुए निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच की मांग की है और न्याय मिलने तक पति का पार्थिव शरीर लेने से इनकार कर दिया है।



















