हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में पंजाब नेशनल बैंक के एक एटीएम को निशाना बनाने की नाकाम कोशिश के मामले में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। धर्मपुर थाना क्षेत्र के तहत आने वाली चेवा पंचायत में स्थित इस एटीएम के कैश डिस्पेंसर वॉल्ट को नुकसान पहुंचाकर पैसे निकालने का प्रयास किया गया था। इस वारदात की छानबीन में जुटी पुलिस की टीम ने अंतरराज्यीय स्तर पर कार्रवाई करते हुए राजस्थान से मुख्य आरोपी को धर दबोचा है, जबकि इस साजिश में शामिल उसका दूसरा साथी फिलहाल पुलिस की पकड़ से बाहर है।
चेवा पंचायत में आधी रात को हुई थी वारदात
पुलिस अधीक्षक सोलन साईं दत्तत्रेया वर्मा के अनुसार, यह घटना 9 और 10 अक्टूबर 2026 की दरमियानी रात को अंजाम दी गई थी। देर रात दो संदिग्ध चेवा पंचायत में मौजूद पंजाब नेशनल बैंक के एटीएम बूथ के भीतर दाखिल हुए। बूथ के अंदर पहुंचते ही उन्होंने मशीन के कैश डिस्पेंसर वॉल्ट को जबरन तोड़ने की कोशिश शुरू कर दी ताकि अंदर रखी नकदी पर हाथ साफ किया जा सके। दोनों आरोपियों ने अपनी करतूत छिपाने के लिए बाकायदा योजना बनाई थी, जिसके तहत एटीएम के अंदर लगे सीसीटीवी कैमरे, कार्ड रीडर स्लॉट और रसीद प्रिंटर के शीशों पर काला रंग पोत दिया गया ताकि कैमरों में उनकी तस्वीरें और हरकतें दर्ज न हो सकें।
अलार्म बजने से भागे आरोपी, मशीन को पहुंचाया भारी नुकसान
सीसीटीवी पर कालिख पोतने और वॉल्ट पर हमला करने के बावजूद आरोपियों की यह साजिश पूरी तरह धरी की धरी रह गई। जैसे ही उन्होंने कैश डिस्पेंसर को तोड़ने के लिए जोर-जबरदस्ती की, एटीएम का सुरक्षा अलार्म अचानक जोर से बज उठा। सायरन की आवाज गूंजते ही दोनों आरोपी बुरी तरह घबरा गए और पकड़े जाने के डर से बिना पैसे लिए फौरन वहां से भाग खड़े हुए। हालांकि वारदात में नकदी तो नहीं बची, लेकिन आरोपियों ने भागने से पहले एटीएम मशीन, उसके संवेदनशील उपकरणों और पूरे केबिन परिसर को तोड़फोड़ कर काफी नुकसान पहुंचाया।
साइबर सेल की मदद से राजस्थान के डीग से गिरफ्तारी
वारदात सामने आने के बाद धर्मपुर पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न सुसंगत धाराओं के तहत एफआईआर संख्या 177/2026 दर्ज की गई थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए धर्मपुर थाना पुलिस और सोलन जिला साइबर सेल की एक संयुक्त विशेष जांच टीम तैयार की गई। जांच दल ने घटनास्थल के आसपास मिले सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल सुरागों और तकनीकी साक्ष्यों की गहन पड़ताल की, जिससे आरोपियों के बारे में अहम जानकारियां हाथ लगीं।
तकनीकी साक्ष्यों का पीछा करते हुए पुलिस टीम राजस्थान पहुंची और 29 अक्टूबर को वीरेंद्र सिंह पूनिया को गिरफ्तार कर लिया। 43 वर्षीय आरोपी वीरेंद्र सिंह पूनिया पुत्र बनी सिंह राजस्थान के डीग जिले के गांव एवं तहसील डीग का निवासी है। पुलिस फिलहाल हिरासत में लिए गए आरोपी से कड़ी पूछताछ कर रही है और उसके पुराने आपराधिक इतिहास की पड़ताल कर रही है। वहीं घटना में शामिल दूसरे फरार आरोपी की पहचान भी सुनिश्चित कर ली गई है और उसे जल्द पकड़ने के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।



















