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किन्नौर में आधी रात कहर बनकर टूटा काचरंग नाला, बागीचे और रास्ते बहे; हिमाचल में मॉनसून अभी और रुलाएगाहिमाचल प्रदेश
24 जून 2026, 12:44 pm (46 दिन पहले)· 2

किन्नौर में आधी रात कहर बनकर टूटा काचरंग नाला, बागीचे और रास्ते बहे; हिमाचल में मॉनसून अभी और रुलाएगा

किन्नौर के निचार खंड में रात तीन बजे काचरंग नाले में आए फ्लैश फ्लड ने पेयजल लाइनें, टैंक और पैदल पुलिया बहा दी। उधर हिमाचल में मॉनसून की एंट्री तय समय से पिछड़ गई है।

हिमाचल प्रदेश में इस बार मॉनसून का इंतजार थोड़ा लंबा खिंचने वाला है। देश के दूसरे हिस्सों में मॉनसून की चाल धीमी पड़ जाने का सीधा असर पहाड़ी राज्य पर भी पड़ा है। तय कार्यक्रम के मुताबिक 20 जून को प्रदेश के कुछ इलाकों में मॉनसून दस्तक देता और 25 जून तक पूरे राज्य में बरसात का सीजन रफ्तार पकड़ लेता, लेकिन अब यह तारीखें आगे खिसक गई हैं। हालांकि मॉनसून भले देर से आए, प्री मॉनसून की बारिश ने अभी से पहाड़ों को भिगोना शुरू कर दिया है। ऊना जिले के अंब में भी झमाझम बारिश का दौर शुरू हुआ।

बुधवार को शिमला, किन्नौर और मनाली में बादल जमकर बरसे। सबसे बड़ा झटका किन्नौर के निचार खंड को लगा, जहां बीती रात की मूसलाधार बारिश के बाद काचरंग नाला उफान पर आ गया।

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रात तीन बजे अचानक बढ़ा नाले का पानी

रात करीब 3 बजे काचरंग नाले का जलस्तर तेजी से चढ़ा और आसपास के लोग दहशत में आ गए। माना जा रहा है कि ऊपरी पहाड़ियों पर बादल फटने की वजह से नाले में अचानक इतना पानी आया। बाढ़ के तेज बहाव और साथ बहकर आए मलबे ने इलाके की पेयजल व्यवस्था को पूरी तरह तहस-नहस कर दिया।

जल शक्ति विभाग की मुख्य पेयजल लाइनें टूट गईं और एक पानी का टैंक भी आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गया। इतना ही नहीं, क्षेत्र को जोड़ने वाला रास्ता और एक पैदल पुलिया भी पानी के साथ बह गई, जिससे ग्रामीणों का बाहरी संपर्क टूट गया।

राहत: रात में आई बाढ़, जान का नुकसान नहीं

घटना की जानकारी मिलते ही सुबह जल शक्ति विभाग और स्थानीय प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंच गईं। गनीमत रही कि बाढ़ रात के वक्त आई और किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है। प्रशासन ने प्रभावित इलाके में युद्ध स्तर पर बहाली का काम शुरू कर दिया है, ताकि बंद हुए रास्ते दोबारा खोले जा सकें और पीने के पानी की सप्लाई जल्द से जल्द पटरी पर लौट सके।

अगले पांच दिन का मौसम

शिमला के मौसम विभाग के मुताबिक हिमाचल में अगले पांच दिन कहीं-कहीं बारिश हो सकती है, हालांकि इसे लेकर फिलहाल कोई अलर्ट नहीं है। बीती रात शिमला, किन्नौर और चंबा के कुछ हिस्सों में बारिश दर्ज की गई। बुधवार को करीब 11 बजे शिमला में भी बौछारें शुरू हो गईं।

कम बारिश से धान की खेती पर खतरा

इस बार जून में बेहद कम बारिश हुई है, करीब 43 फीसदी कम पानी बरसा है। इसका सबसे ज्यादा असर धान की खेती पर पड़ने वाला है। मौसम विभाग का कहना है कि मॉनसून को आगे बढ़ने के लिए बंगाल की खाड़ी में लो-प्रेशर एरिया बनना जरूरी होता है, जो शुरुआती दौर में नहीं बना। साथ ही हिंद महासागर से आने वाली 'सोमालिया जेट स्ट्रीम' हवाएं भी कमजोर दिखीं। अब सिस्टम थोड़ा सक्रिय हुआ है, इसलिए बारिश की उम्मीद जताई जा रही है। फिलहाल उत्तर भारत में मॉनसून की एंट्री नहीं हुई है।

सवाल-जवाब

हिमाचल में मॉनसून कब आने वाला था?
तय कार्यक्रम के मुताबिक 20 जून को कुछ हिस्सों में और 25 जून तक पूरे प्रदेश में मॉनसून पहुंचना था, लेकिन अब यह देरी से आएगा।
काचरंग नाले में फ्लैश फ्लड कब आया?
किन्नौर के निचार खंड में बीती रात करीब 3 बजे काचरंग नाले का जलस्तर अचानक बढ़ने से फ्लैश फ्लड आया।
बाढ़ की वजह क्या मानी जा रही है?
आशंका है कि ऊपरी पहाड़ियों पर बादल फटने के कारण नाले में अचानक इतना पानी आ गया।
इस बाढ़ से क्या नुकसान हुआ?
जल शक्ति विभाग की मुख्य पेयजल लाइनें टूट गईं, एक पानी का टैंक आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुआ, और रास्ता व एक पैदल पुलिया बह गई।
क्या इस घटना में कोई हताहत हुआ?
नहीं, बाढ़ रात के समय आई और किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है।
जून में कितनी कम बारिश हुई और इसका क्या असर होगा?
जून में करीब 43 फीसदी कम बारिश हुई है, जिसका सबसे ज्यादा असर धान की खेती पर पड़ने की आशंका है।
मॉनसून के आगे न बढ़ने की वजह क्या है?
बंगाल की खाड़ी में जरूरी लो-प्रेशर एरिया शुरुआती दौर में नहीं बना और हिंद महासागर से आने वाली सोमालिया जेट स्ट्रीम हवाएं भी कमजोर रहीं।
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