मिजोरम में पेट, एसोफेगस, फेफड़े और स्तन कैंसर के मामलों का उच्च भार देखा जा रहा है। इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए राज्य सरकार लगातार अपनी डायग्नोस्टिक मशीनरी और चिकित्सा सुविधाओं को बेहतर बनाने में जुटी हुई है। इसके साथ ही स्वास्थ्य कर्मियों को भी विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि इस घातक बीमारी के लक्षणों को समय रहते पहचाना जा सके। स्वास्थ्य मंत्री लालरिनपुई ने मंगलवार को यह जानकारी साझा करते हुए बताया कि राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए कई ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
रिफरल प्रणाली और चिकित्सा कार्यक्रम
स्वास्थ्य व्यवस्था को अधिक सुचारू बनाने के लिए मरीजों की रिफरल प्रणाली को भी काफी सख्त किया गया है ताकि जरूरतमंद लोग बिना किसी देरी के सही समय पर उचित इलाज तक पहुंच सकें। इन تمام पहलों का जिक्र करते हुए उन्होंने ज़ोरम मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में सोमवार को आयोजित 'साइंटिफिक फेस्ट 2026' का हवाला दिया। स्तन कैंसर पर आधारित इस निरंतर चिकित्सा शिक्षा कार्यक्रम का आयोजन साइंटिफिक फोरम द्वारा किया गया था, जिसमें चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े कई अहम पहलुओं पर चर्चा की गई।
इलाज के तरीके और मरीजों की देखभाल
बीमारी के प्रकार और उसकी स्टेज के आधार पर मरीजों को सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी जैसी चिकित्सा प्रक्रियाओं से एक साथ गुजरना पड़ सकता है। इसके अलावा मरीजों के जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाए रखने के लिए पैलिएटिव केयर यानी उपशामक देखभाल और मनोसामाजिक समर्थन भी बेहद जरूरी है। स्वास्थ्य मंत्री ने लोगों से अपील की है कि यदि वे अपने शरीर में किसी भी तरह के असामान्य बदलाव महसूस करते हैं, तो खुद से इलाज करने के बजाय तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। समय पर बीमारी की पहचान होने से इसके बढ़ने को रोका जा सकता है और सफल इलाज की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है।
जीवनशैली में बदलाव और सामुदायिक सहयोग
बीमारी से बचाव के उपायों पर बात करते हुए उन्होंने शराब और तंबाकू के सेवन से दूर रहने, संतुलित आहार लेने और शारीरिक रूप से सक्रिय रहने की सलाह दी। इस संबंध में द प्रिंट की एक रिपोर्ट में भी विस्तार से जानकारी दी गई है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस बड़ी चुनौती से निपटने की जिम्मेदारी अकेले स्वास्थ्य विभाग की नहीं है। इसमें परिवारों, समुदायों, स्कूलों, कॉलेजों और चर्चों को भी मिलकर अपनी भूमिका निभानी होगी, विशेष तौर पर छात्रों के बीच इसके प्रति जागरूकता बढ़ाना बेहद आवश्यक है।


















