त्योहारी सीजन और धनतेरस के मौके पर सोना तथा चांदी खरीदना भारतीय परंपरा में अत्यंत शुभ माना जाता है। इस बार सर्राफा बाजार में कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, जहां जनवरी के उच्चतम स्तर से कीमती धातुओं के भाव में 53 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई। एक महीने में चांदी 37,000 रुपये प्रति किलोग्राम तक टूटी, जिसमें अकेले एक दिन में 6,678 रुपये प्रति किलोग्राम की नरमी आई, जबकि 10 ग्राम सोने का भाव गिरकर 1.41 लाख रुपये तक पहुंचा। इस भारी मूल्य परिवर्तन और त्योहारी मांग के बीच खरीदारों के लिए शुद्धता, सही दर और बिलिंग नियमों को समझना बेहद अहम हो गया है ताकि वे किसी भी प्रकार के नुकसान से बच सकें।
त्योहारी खरीदारी में शुद्धता और हॉलमार्किंग की जांच
सोने के आभूषण लेते समय सबसे पहले हॉलमार्किंग का निशान देखना आवश्यक है। भारतीय मानक ब्यूरो के 6 अंकों वाले अल्फ़ान्यूमेरिक एचयूआईडी कोड की मौजूदगी सुनिश्चित करें। यदि आप 22 कैरेट, 18 कैरेट या 14 कैरेट का सोना चुन रहे हैं, तो गहने पर संबंधित शुद्धता अंक साफ अंकित होना चाहिए। केवल दुकानदार के मौखिक भरोसे पर निर्भर रहने के बजाय आभूषण पर उकेरे गए आधिकारिक चिह्नों की जांच स्वयं करें।
दैनिक बाजार भाव और मेकिंग चार्ज का गणित
बाजार में प्रवेश करने से पहले अपने शहर का उस दिन का आधिकारिक 24 कैरेट और 22 कैरेट सोने का भाव जांच लें। कई बार खुदरा दुकानों पर दरों में मामूली अंतर होता है। इसके साथ ही गहनों के मेकिंग चार्ज यानी निर्माण शुल्क के बारे में पहले ही स्पष्ट बातचीत करें। विभिन्न ज्वेलर्स मेकिंग चार्ज के तौर पर अलग-अलग प्रतिशत या प्रति ग्राम तय रकम वसूलते हैं, जिसकी तुलना करके अनावश्यक खर्च बचाया जा सकता है।
वजन और जड़े हुए पत्थरों की कटौती
नगीने, मोती या कृत्रिम पत्थर जड़े आभूषण लेते समय सुनिश्चित करें कि बिल में धातु का शुद्ध वजन अलग से दर्ज किया गया हो। कई मामलों में खरीदार पत्थरों के वजन पर भी सोने का भाव चुका देते हैं, जो पुनर्विक्रय के समय भारी कटौती का कारण बनता है। तराजू पर शुद्ध धातु का वजन और स्टोन का वजन अलग-अलग सत्यापित करवाएं।
पक्का बिल और पुनर्विक्रय की शर्तें
खरीदारी का हमेशा विस्तृत जीएसटी बिल लें जिसमें एचयूआईडी नंबर, धातु का सटीक वजन, कैरेट शुद्धता, मेकिंग चार्ज और कर का ब्योरा अलग-अलग लिखा हो। इसके अलावा भविष्य में आभूषण बदलने या वापस बेचने की ज्वेलर की पॉलिसी को लिखित में समझें। किसी भी प्रामाणिक दुकान से खरीद पर बायबैक नियमों की स्पष्ट जानकारी होना आवश्यक है।
विशेषज्ञों ने दिए समझदारी भरे टिप्स
श्री सराफा एसोसिएशन भोपाल के अध्यक्ष नरेश अग्रवाल और तनिष्क भोपाल के स्टोर मैनेजर विवेक झा ने खरीदारों को सलाह दी है कि वे भाव में नरमी का लाभ उठाते समय प्रामाणिकता से कभी समझौता न करें। निवेश विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि त्योहारी सीजन में पहले निवेश की योजना बनाएं और बची हुई पूंजी से ही अन्य खरीदारी करें। भारतीय म्यूचुअल फंडों द्वारा त्योहारी सीजन से पहले गोल्ड ईटीएफ में एकमुश्त सब्सक्रिप्शन रोकने और भू-राजनीतिक जोखिमों के बावजूद धातुओं पर दबाव रहने के दौर में भौतिक खरीद पूरी सावधानी से की जानी चाहिए।



















