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गुमनाम इंटरनेट गिरोहों की घिनौनी करतूत: यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा की छात्रा को कैसे बनाया गया डिजिटल उत्पीड़न का शिकारपड़ताल
20 सित॰ 2026, 6:22 pm (40 दिन पहले)· 7

गुमनाम इंटरनेट गिरोहों की घिनौनी करतूत: यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा की छात्रा को कैसे बनाया गया डिजिटल उत्पीड़न का शिकार

यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा की एक छात्रा मैडी कोवाल्स्की को सोशल मीडिया पर बिना सहमति के उनके निजी वीडियो वायरल कर प्रताड़ित किया गया, जिसके बाद उन्होंने इस गुमनाम नेटवर्क के खिलाफ कानूनी जंग शुरू कर दी है।

रविवार, 2 नवंबर, 2025 की दोपहर को यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा की सेकेंड ईयर की छात्रा मैडी कोवाल्स्की गेन्सविले में एक घर पर उपहार देने के लिए रुकी थीं। वह गर्मियों की छुट्टियों में जापान गई थीं, जहां से वह अपने दोस्तों के लिए प्रसिद्ध मंगा सीरीज वन पीस का एक एक्शन फिगर लेकर आई थीं। कैंपस के पास बने इस पुराने ईंटों वाले घर को छात्र फोर्ट कहकर बुलाते थे, जो लंबे समय से फाई डेल्टा थिटा नाम के फ्रैट से जुड़ा हुआ था। इस परिसर की दीवार पर संतरी और नीले रंग से दिस इज फोर्ट लिखा हुआ था। हालांकि इस फ्रैट पर उस समय रैगिंग के गंभीर आरोप लग रहे थे और जांच चल रही थी, लेकिन मैडी कोवाल्स्की के लिए यह जगह सुरक्षित महसूस होती थी क्योंकि वहां उनके सबसे अच्छे दोस्त रहते थे।

उसी शाम को जब मैडी कोवाल्स्की एक अपार्टमेंट में बैठी थीं, तब उनके एक दोस्त ने उन्हें एक ऐसी चौंकाने वाली खबर दी जिसने उनकी पूरी जिंदगी का रुख ही बदल दिया। दोस्त ने उनसे पूछा कि क्या उन्हें पता है कि उनका एक बेहद निजी वीडियो फ्लोरिडा स्टेट यूनिवर्सिटी के छात्रों के बीच वायरल हो रहा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जो वीडियो वायरल हो रहा था, वह असल में तीन अलग-अलग क्लिप्स को जोड़कर बनाया गया था। इसमें से एक क्लिप फोर्ट में रिकॉर्ड की गई थी, जबकि दो अन्य क्लिप्स अक्टूबर के महीने में दो अजनबियों के साथ हुई एक घटना की थीं। मैडी कोवाल्स्की का कहना है कि उस रात वह अत्यधिक नशे में थीं और उन्हें केवल धुंधली यादें ही बची थीं। उन्होंने कभी भी उस घटना का वीडियो बनाने या उसे सोशल मीडिया पर साझा करने की अनुमति नहीं दी थी।

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बर्नरवर्स का आतंक और सोशल मीडिया पर डिजिटल उत्पीड़न

जो घटना पहले एक स्थानीय कैंपस गपशप लग रही थी, वह जल्द ही एक राष्ट्रीय स्तर की खबर बन गई। हालांकि X ने शुरुआत में इस वीडियो को हटा दिया था, लेकिन स्टीवकमफुल नाम के एक गुमनाम अकाउंट ने इसे दोबारा पोस्ट कर दिया। इतना ही नहीं, उस अकाउंट ने मैडी कोवाल्स्की के नाम पर बनाए गए एक क्रिप्टोकरेंसी मीम कॉइन का स्क्रीनशॉट भी शेयर किया, जिसका मार्केट कैप 11,400 डॉलर तक पहुंच चुका था। उस अकाउंट ने लिखा कि अपने बच्चों की पढ़ाई की पूरी बचत इस कॉइन में लगा दो। इस घिनौने कृत्य से कोई गुमनाम व्यक्ति मैडी कोवाल्स्की की जिंदगी के सबसे बुरे दौर का फायदा उठाकर पैसे कमा रहा था।

अगले 24 घंटों के भीतर मैडी कोवाल्स्की इंटरनेट पर चल रहे इस उत्पीड़न के कारण पूरी तरह से सदमे में आ गईं। अज्ञात लोगों ने उनके पुराने पारिवारिक फोटो, उनके पिता का लिंक्डइन प्रोफाइल और यहां तक कि उनके पिता के गोल्फ खेलने के रिकॉर्ड तक सार्वजनिक कर दिए। उनके माता-पिता को पूरी रात धमकियों और गंदे मैसेजेस वाले फोन आते रहे। X के लाइव ऑडियो फीचर X स्पैसेस पर बातचीत के दौरान एक गुमनाम व्यक्ति ने उनके पिता को फोन करके बेहद आपत्तिजनक बातें कहीं और उसे लाइव प्रसारित किया। इंटरनेट पर लोग इस बात की शर्तें लगा रहे थे कि क्या मैडी कोवाल्स्की आत्महत्या कर लेंगी या फिर ओनलीफैंस अकाउंट खोल लेंगी।

इस भयानक स्थिति में मैडी कोवाल्स्की ने अपनी सहेली लेक्सी ब्लेक को फोन किया, जो यूनिवर्सिटी ऑफ मिसिसिपी में पढ़ती थीं। लेक्सी ब्लेक के अनुसार, मैडी कोवाल्स्की उस समय बात करने की स्थिति में भी नहीं थीं और लगातार रोए जा रही थीं। जब मैडी कोवाल्स्की के पिता उनसे मिलने उनके अपार्टमेंट पहुंचे, तो वह शर्मिंदगी के कारण उनका सामना नहीं कर सकीं और उन्होंने अपने पांचवें फ्लोर की खिड़की से कूदकर जान देने की कोशिश की। सोमवार दोपहर तक हैशटैग मैडीकोवाल्स्की पूरे अमेरिका में X पर ट्रेंड कर रहा था, जिस पर 1,200 से अधिक पोस्ट हो चुके थे और उनके वीडियो को 85 लाख से ज्यादा बार देखा जा चुका था।

स्पोर्ट्स फैन अकाउंट्स के पीछे छिपा डार्क वेब नेटवर्क

मैडी कोवाल्स्की ने पहले भी ऐसी घटनाओं के बारे में सुना था। उनसे लगभग नौ महीने पहले यूनिवर्सिटी ऑफ मिसिसिपी की छात्रा मैरी केट कॉर्नेट के साथ भी ऐसा ही हुआ था। इस तरह के अभियानों के पीछे बर्नरवर्स नाम का एक नेटवर्क काम करता है, जिसे बीव या BV भी कहा जाता है। यह X पर काम करने वाले गुमनाम अकाउंट्स का एक बड़ा समूह है, जिसे मुख्य रूप से कॉलेज स्पोर्ट्स पर चर्चा करने के लिए बनाया गया है। लेकिन मैडी कोवाल्स्की को अब समझ आ रहा था कि खेल और फ्रैट संस्कृति की आड़ में यह नेटवर्क युवा महिलाओं की जिंदगी बर्बाद करने का जरिया बन चुका था।

अलग-अलग यूनिवर्सिटीज के बर्नरवर्स अकाउंट्स की अपनी एक खास शैली और भाषा होती है। ये अकाउंट्स ब्रांडेड कपड़ों, विशेष प्रकार के निकोटीन पाउच, फुटबॉल कोच और प्रतिबंधित नशीले पदार्थों के लिए खास कोडवर्ड्स का इस्तेमाल करते हैं। इनमें से कई गुमनाम अकाउंट्स अत्यंत नस्लवादी, यहूदी-विरोधी और समलैंगिकता-विरोधी टिप्पणियां पोस्ट करने के लिए अपनी गुमनामी का सहारा लेते हैं। इस नेटवर्क के सदस्यों की उम्र 15 साल से लेकर 40 साल से अधिक तक होती है, और इनमें कॉलेज के छात्र और पूर्व छात्र दोनों शामिल होते हैं।

दिलचस्प बात यह है कि कई बड़े विश्वविद्यालयों के खेल विभाग भी इन बर्नर अकाउंट्स से संपर्क बनाए रखते हैं और नए खिलाड़ियों की भर्ती के दौरान प्रचार के लिए उनका अनौपचारिक रूप से उपयोग करते हैं। कई फ्रैट्स में तो नए छात्रों को सदस्य बनाने के लिए बर्नर अकाउंट बनाने की शर्त तक रखी जाती है। लेक्सी ब्लेक का कहना है कि यह कोई समाज से कटे हुए या अजीब लोग नहीं हैं, बल्कि ये अमीर परिवारों के, अच्छे कॉलेजों में पढ़ने वाले आम लड़के हैं जो केवल सोशल मीडिया पर रीच और लाइक्स पाने के लिए ऐसा करते हैं। बर्नरवर्स के बीच सबसे ज्यादा चर्चा तब होती है जब वे किसी खूबसूरत छात्रा की निजी जिंदगी या वीडियो लीक करके उसे निशाना बनाते हैं।

मैरी केट कॉर्नेट की झूठी कहानी और मीडिया का गैर-जिम्मेदाराना रवैया

इस गिरोह की सबसे बड़ी शिकार मैरी केट कॉर्नेट बनी थीं, जो फरवरी 2025 में एक झूठी अफवाह के कारण चर्चा में आ गई थीं। एक बर्नर अकाउंट ने अफवाह उड़ाई कि वह अपने बॉयफ्रेंड के पिता के साथ रिश्ते में हैं। देखते ही देखते उनका पूरा नाम सोशल मीडिया पर फैल गया। इस अफवाह को पूर्व NFL खिलाड़ी एंटोनियो ब्राउन और मशहूर स्पोर्ट्स कमेंटेटर पैट मैकाफी ने अपने शो पर बढ़ावा दिया, जिससे इसे लाखों लोगों ने देख लिया।

बाद में पैट मैकाफी ने इस पर माफी मांगी और ट्वीट डिलीट कर दिया, लेकिन तब तक मैरी केट कॉर्नेट की निजी जिंदगी पूरी तरह से तबाह हो चुकी थी। उनके घर पर पुलिस की स्वाट टीम तक भेज दी गई थी। मैरी केट कॉर्नेट और उनकी मां लेस्ली ने पिछले डेढ़ साल से वकीलों की मदद से इन गुमनाम अकाउंट्स को ट्रैक करने का प्रयास किया है, लेकिन इंटरनेट पर जवाबदेही की भारी कमी के कारण अपराधियों को सजा दिलाना बेहद मुश्किल साबित हो रहा है।

पीड़िता का संघर्ष और कानूनी बाधाएं

मैडी कोवाल्स्की के मामले में भी ऐसा ही पैटर्न देखा गया। उनके वकील एडम लुडविन ने बताया कि यह डिजिटल हमला बेहद सुनियोजित तरीके से किया गया था। X स्पैसेस पर कोवाल्स्की एनालिसिस नाम से एक लाइव सेशन आयोजित किया गया था, जिसमें 220 से अधिक लोग उनकी सहमति के बिना लीक किए गए वीडियो पर चर्चा कर रहे थे। अधिकांश पीड़ित छात्राएं बदनामी के डर से इस पर चुप रहना ही पसंद करती हैं क्योंकि इन मामलों में इंटरनेट से डेटा साफ कराने और वकीलों की फीस देने में लाखों रुपये खर्च हो जाते हैं।

इस घटना के बाद मैडी कोवाल्स्की को अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ी और वह वापस अपने माता-पिता के घर लौट आईं। अवसाद के कारण उनके बाल गिरने लगे और चेहरे पर चकत्ते निकल आए। बाद में डॉक्टरों ने उन्हें PTSD से पीड़ित घोषित किया। मैडी कोवाल्स्की ने पुलिस और यूनिवर्सिटी प्रशासन से मदद मांगी, लेकिन शुरुआत में यूनिवर्सिटी ने यह कहकर जांच से हाथ खींच लिए कि वीडियो कैंपस के बाहर फिल्माया गया था।

आरोपियों की पहचान और कानूनी कार्रवाई

दिसंबर में मैडी कोवाल्स्की ने अपनी पहचान उजागर करते हुए इंस्टाग्राम पर एक वीडियो जारी कर पूरी सच्चाई बयां की। इस वीडियो को करोड़ों बार देखा गया और उन्हें भारी जनसमर्थन मिला। पुलिस की जांच के बाद आखिरकार तीन छात्रों की पहचान की गई, जो इन गुमनाम अकाउंट्स को संचालित कर रहे थे

  • कामरान अहमद: यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा का 19 वर्षीय छात्र और थिटा काई फ्रैट का सदस्य, जो स्टीवकमफुल अकाउंट चला रहा था। उस पर वित्तीय लाभ के लिए साइबर-उत्पीड़न करने का आरोप है।
  • ब्रेंडन पिटफील्ड: यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा का नवप्रवेशित छात्र और थिटा काई फ्रैट का सदस्य, जो आर्न Grape16 अकाउंट से जुड़ा था।
  • जैकब गोमबर्ग: कोरल स्प्रिंग्स का निवासी और पूर्व बेसबॉल खिलाड़ी, जिसने इस वीडियो को वायरल करने में भूमिका निभाई थी।

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि कामरान अहमद और ब्रेंडन पिटफील्ड ने इन बर्नर अकाउंट्स को चलाने के लिए विश्वविद्यालय के IP एड्रेस का इस्तेमाल किया था। पुलिस ने इन तीनों पर सेक्सुअल साइबर-हैरेसमेंट के आरोप तय किए हैं, जो एक गंभीर अपराध है। इसके अलावा, मैडी कोवाल्स्की ने फ्लोरिडा के कोर्ट में इन तीनों के खिलाफ दीवानी मुकदमा भी दायर किया है और हर्जाने की मांग की है। हालांकि आरोपी छात्र अब भी विश्वविद्यालय में अपनी पढ़ाई जारी रखे हुए हैं और उनके फ्रैट ने उन्हें जांच पूरी होने तक निलंबित कर दिया है। मैडी कोवाल्स्की अपनी जिंदगी को सामान्य बनाने की कोशिश कर रही हैं और टिकटॉक लाइव के जरिए अपनी आजीविका चला रही हैं।

सवाल-जवाब

मैडी कोवाल्स्की कौन हैं?
मैडी कोवाल्स्की यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा की एक छात्रा हैं, जिन्हें सोशल मीडिया पर बर्नरवर्स नामक गुमनाम गिरोह द्वारा गंभीर साइबर-उत्पीड़न का निशाना बनाया गया था।
बर्नरवर्स (Burnerverse) क्या है?
यह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कॉलेज के छात्रों और पूर्व छात्रों का एक गुमनाम नेटवर्क है, जो खेल की चर्चा की आड़ में लोगों को प्रताड़ित करने और मीम्स बनाने का काम करता है।
पुलिस ने इस मामले में किन लोगों को आरोपी बनाया है?
पुलिस ने कामरान अहमद, ब्रेंडन पिटफील्ड और जैकब गोमबर्ग नाम के तीन छात्रों को सेक्सुअल साइबर-हैरेसमेंट के आरोपों में नामजद किया है।
कामरान अहमद पर क्या विशेष आरोप हैं?
कामरान अहमद पर मैडी कोवाल्स्की के नाम से क्रिप्टोकरेंसी मीम कॉइन बनाकर वित्तीय लाभ कमाने के उद्देश्य से साइबर-उत्पीड़न करने का गंभीर आरोप है।
यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा ने इस मामले में क्या कार्रवाई की?
यूनिवर्सिटी ने गोपनीयता कानूनों (FERPA) का हवाला देते हुए सीधा कमेंट करने से इनकार कर दिया, लेकिन थिटा काई फ्रैट ने दोनों आरोपी छात्रों को निलंबित कर दिया है।
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टिप्पणियाँ 5

Rajesh Kumar@rajesh-kumar·39 दिन पहले

यह घटना डिजिटल स्पेस में गुमनामी की आड़ में पनप रहे संगठित अपराध और सोशल मीडिया की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जिस तरह से मीम कॉइन के जरिए इस उत्पीड़न का मुद्रीकरण किया गया, वह वर्चुअल अराजकता का एक खतरनाक नया स्तर है। आने वाले समय में ऐसे मामलों पर लगाम कसने के लिए कड़े कानूनी ढांचे और त्वरित न्यायिक हस्तक्षेप की सख्त जरूरत होगी, अन्यथा ऑनलाइन मोब लिंचिंग और ब्लैकमेलिंग का यह ट्रेंड राष्ट्रीय स्तर पर एक विकराल सामाजिक संकट बन सकता है।

Rohan Gupta@rohan-gupta·39 दिन पहले

यह घटना दिखाती है कि कैसे एआई-युग में गुमनाम सोशल मीडिया नेटवर्क और क्रिप्टोकरेंसी मीम कॉइन मिलकर डिजिटल उत्पीड़न को एक संगठित और मुनाफे वाला अपराध बना रहे हैं। एक्सी और अन्य प्लेटफॉर्मों पर एनॉनिमस अकाउंट्स और लाइव ऑडियो टूल्स का यह दुरुपयोग साइबर सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी के मोर्चे पर एक गंभीर चुनौती है। आने वाले समय में ऐसे मामलों को रोकने के लिए ब्लॉकचेन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर एल्गोरिदम की जवाबदेही तय करना अनिवार्य होगा, अन्यथा व्यक्तिगत जीवन की सुरक्षा पूरी तरह खतरे में पड़ जाएगी।

Yuki Tanaka@yuki-tanaka·39 दिन पहले

रोहन गुप्ता की यह रिपोर्ट डिजिटल युग के एक खतरनाक भू-राजनीतिक और तकनीकी पहलू को उजागर करती है। एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भी, दक्षिण कोरिया के 'एन रूम' जैसे मामलों से यह स्पष्ट हो चुका है कि एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म और डिजिटल मुद्राएँ किस तरह संगठित अपराध का नया माध्यम बन रही हैं। जब तक सीमा पार के टेक प्लेटफॉर्म्स पर कड़े एआई-आधारित मॉडरेशन और केवाईसी नियम लागू नहीं होते, तब तक व्यक्तिगत डेटा की यह वैश्विक लूट रुकने वाली नहीं है।

Arshdeep Ahluwalia@arshdeep-ahluwalia·39 दिन पहले

यह घटना दिखाती है कि कैसे गुमनाम इंटरनेट गिरोह और मीम कॉइन जैसी डिजिटल तकनीकें किसी के भी निजी जीवन को चंद घंटों में मुनाफे का धंधा और टॉर्चर का हथियार बना सकती हैं। उत्तर भारत के क्षेत्रीय परिसरों में भी इस तरह के साइबर उत्पीड़न और ब्लैकमेलिंग के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, जहाँ कानूनी शिकंजा कसना अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

Neha Verma@neha-verma·39 दिन पहले

यह मामला सिर्फ एक साइबर क्राइम नहीं है, बल्कि डिजिटल युग में प्राइवेसी के पतन का सबसे डरावना चेहरा है। जब किसी के अंतरंग पलों और पारिवारिक पहचान को हथियार बनाकर स्टॉक मार्केट की तरह मीम कॉइन्स में भुनाया जाने लगे, तब यह स्पष्ट हो जाता है कि ऑनलाइन सुरक्षा और मॉडरेशन के वर्तमान मापदंड पूरी तरह विफल हो चुके हैं। यदि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और कानून इस 'बर्नरवर्स' संस्कृति पर नकेल कसने में असफल रहे, तो यह डिजिटल अराजकता न केवल पीड़ितों के मानसिक स्वास्थ्य को तबाह कर देगी, बल्कि इंटरनेट को अपराध का सुरक्षित अड्डा बना देगी।

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