घर के फर्श पर बिछी टाइल में अचानक उभरी दरार न केवल कमरे की खूबसूरती बिगाड़ती है, बल्कि समय रहते ध्यान न देने पर इसके टुकड़े अलग होकर खतरे का सबब भी बन सकते हैं। फर्श पर कोई भारी वस्तु गिर जाना, नीचे की बुनियाद या सतह में खराबी होना, लगातार नमी का असर, लगाने के दौरान हुई लापरवाही या फिर मौसम के तापमान में होने वाले तेज उतार-चढ़ाव ऐसे मुख्य कारण हैं जिनकी वजह से टाइलें टूटती हैं। गनीमत यह है कि हर मामूली नुकसान पर समूची टाइल को उखाड़ना जरूरी नहीं होता, बल्कि कई मामलों में साधारण उपायों से घर पर ही इसे ठीक किया जा सकता है।
बारीक दरारों के लिए विशेष टाइल किट
जब दरार बहुत महीन हो, तो बाजार में उपलब्ध सिरेमिक या टाइल रिपेयर किट बेहद कारगर साबित होती है। इस प्रक्रिया की शुरुआत प्रभावित हिस्से को गहराई से साफ करके करनी चाहिए ताकि वहां जमी धूल और तेल पूरी तरह हट जाए। सफाई के बाद सतह को पूरी तरह सूखने देना जरूरी है। इसके उपरांत किट में दिए गए दिशा-निर्देशों के मुताबिक फिलर अथवा एपॉक्सी का लेप लगाएं। जब यह सामग्री सूखकर सख्त हो जाए, तो सतह पर बचे अतिरिक्त हिस्से को सावधानीपूर्वक साफ कर समतल बना लें।
सतही नुकसान पर दो-भाग वाली एपॉक्सी रेज़िन
ऊपरी सतह पर नजर आने वाली हल्की दरारों के भराव के लिए दो-भाग वाली एपॉक्सी रेज़िन एक मजबूत विकल्प बनती है। इस सामग्री को दरार के अंदर अच्छी तरह भरकर आसपास की सतह के बराबर मिलाया जाता है। रासायनिक रूप से पूरी तरह सूख जाने के बाद अतिरिक्त पदार्थ को आहिस्ता से खुरचकर या पोंछकर साफ कर दिया जाता है। इस सामग्री के प्रयोग से पहले उत्पाद के उपयोग संबंधी नियमों और अपनी टाइल की प्रकृति की पड़ताल अवश्य कर लेनी चाहिए।
किनारों और जोड़ों के लिए ग्राउट का उपयोग
यदि चटकने का निशान टाइल के सिरे या ग्राउट लाइनों के बिल्कुल पास मौजूद हो, तो सही रंग व गुणवत्ता वाले टाइल फिलर या ग्राउट का इस्तेमाल मुफीद रहता है। नए पदार्थ को भरने से पूर्व वहां जमा पुरानी गंदगी, धूल और उखड़े हुए ढीले ग्राउट को अच्छी तरह खुरचकर बाहर निकालें। यह तकनीक किनारों की टूट-फूट और जोड़ों के आसपास की झिरियों को भरने के लिए विशेष तौर पर उपयोगी मानी जाती है।
गंभीर टूट-फूट में टाइल बदलना ही उपाय
यदि दरार गहरी हो चुकी हो, टुकड़े अपनी जगह से हिलने लगे हों या फिर पैर रखने पर टाइल के नीचे से खोखली आवाज आती हो, तो महज ऊपर से लेप लगाने से समस्या दूर नहीं होती। ऐसी स्थिति में क्षतिग्रस्त टाइल को हटाकर उसकी जगह नई टाइल जड़ना ही एकमात्र ठोस समाधान होता है। नई टाइल लगाते समय यह सुनिश्चित करना अनिवार्य है कि नीचे की सतह एकदम समतल, सूखी और ठोस आधार वाली हो।
अंदरूनी दिक्कतों की पड़ताल भी जरूरी
सतह पर सिर्फ दरार भर देने से स्थायी हल की गारंटी नहीं मिलती। यदि फर्श के नीचे नमी का रिसाव, ऊबड़-खाबड़ आधार या आसपास की अन्य टाइलों के ढीलेपन जैसी बुनियादी गड़बड़ी मौजूद है, तो नई लगाई गई टाइल भी दोबारा टूट सकती है। इसलिए किसी भी प्रकार की मरम्मत या बदलाव का काम शुरू करने से पहले आसपास की पूरी सतह, जोड़ों और ग्राउट की व्यापक जांच कर लेनी चाहिए।


















