जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में सेना के उच्च ऊंचाई वाले अभियान के दौरान मार गिराए गए लश्कर-ए-तैयबा के प्रमुख ऑपरेशनल कमांडर मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने चौंकाने वाली जानकारी साझा की है। सुरक्षा बलों की सख्त घेराबंदी और लगातार चल रहे तलाशी अभियानों के चलते मूसा को किसी भी प्रकार की चिकित्सीय सहायता या दवाएं नहीं मिल पा रही थीं। ऐसे में उसने गोली लगने से बने गहरे जख्मों को ठीक करने और संक्रमण से बचने के लिए प्राकृतिक शहद का सहारा लिया था। अधिकारियों के अनुसार, मूसा पाकिस्तान सेना के विशिष्ट स्पेशल सर्विसेज ग्रुप (SSG) का पूर्व कमांडो माना जाता था और वह केंद्र शासित प्रदेश में प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा की आतंकी गतिविधियों का मुख्य संचालक था।
राजौरी में ऑपरेशन शेरुवाली के दौरान लगी थी गोली
अधिकारियों द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, मूसा को जम्मू संभाग के राजौरी जिले में चलाए गए 'ऑपरेशन शेरुवाली' के दौरान गोली लगी थी। यह मुठभेड़ डोरिमल-गंभीर मुगला के घने जंगली इलाके में हुई थी। सुरक्षा बलों ने उस इलाके में छिपे दो आतंकियों को घेरने के लिए 45 दिनों से भी अधिक समय तक लगातार अभियान चलाया था। बाद में जांच और जमीनी खुफिया इनपुट से यह बात स्पष्ट हुई कि जंगलों में घिरे वे दोनों आतंकी कोई और नहीं, बल्कि मूसा और उसका करीबी सहयोगी यासिर ही थे। सुरक्षा बलों के कड़े पहरे के बीच दोनों आतंकी पुंछ और राजौरी के दुर्गम जंगलों में लंबे समय तक छिपते रहे और अपना ठिकाना बदलते रहे।
सहयोगी यासिर के मोबाइल फोन से बरामद हुईं तस्वीरें
सितंबर के पहले सप्ताह में सुरक्षा बलों ने यूसमर्ग के ऊंचाई वाले इलाके में एक अभियान चलाकर मूसा के साथी यासिर को ढेर कर दिया था। यासिर के शव के पास से बरामद हुए मोबाइल फोन की जब तकनीकी जांच की गई, तो उसमें मूसा के जख्मों की कई तस्वीरें मिलीं। इन तस्वीरों में साफ दिख रहा था कि मूसा के शरीर पर लगे गोली के घावों पर शहद का लेप लगाया गया था। अधिकारियों ने बताया कि ये तस्वीरें सीमा पार पाकिस्तान में बैठे आतंकी आकाओं को भेजी गई थीं, ताकि वे मूसा की शारीरिक स्थिति और घावों के भरने की प्रगति पर नजर रख सकें। इतना ही नहीं, पाकिस्तान में मौजूद हैंडलर लगातार यह निर्देश भी दे रहे थे कि शहद पूरी तरह शुद्ध होना चाहिए, ताकि घाव में मवाद न बने और वह तेजी से भर सके।
घाव भरने में शहद की भूमिका पर आयुर्वेद विशेषज्ञों की राय
पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में शहद के उपयोग को लेकर ऑल इंडिया डॉक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडियन सिस्टम ऑफ मेडिसिन के अध्यक्ष डॉ. आरपी पाराशर ने महत्वपूर्ण वैज्ञानिक पहलू सामने रखे। उन्होंने बताया कि प्राचीन ग्रंथ 'सुश्रुत संहिता' के 'व्रण चिकित्सा' अध्याय में शहद को घावों के शोधन और रोपण के लिए बेहद गुणकारी माना गया है। शोधन का अर्थ घाव को साफ करना और रोपण का अर्थ नए ऊतकों के निर्माण के जरिए उसे भरना होता है। आधुनिक चिकित्सा अनुसंधानों ने भी यह साबित किया है कि शहद में प्राकृतिक रोगाणुरोधी गुण मौजूद होते हैं। इसकी उच्च ऑस्मोटिक गतिविधि, अम्लीय पीएच मान और कुछ किस्मों में हाइड्रोजन पेरॉक्साइड का बनना बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्मजीवों के पनपने पर रोक लगाता है।
हालांकि डॉ. पाराशर ने स्पष्ट चेतावनी दी कि गोली से लगने वाले घाव साधारण सतही चोटों से काफी भिन्न और जटिल होते हैं। आग्नेयास्त्र से लगी चोट में गोली के बारीक धातु कण, बारूद या कपड़े के रेशे अंदर रह सकते हैं, जिससे गंभीर आंतरिक संक्रमण और सेप्सिस का खतरा बढ़ जाता है। आधुनिक अस्पताल प्रणाली में केवल रोगाणुरहित यानी स्टेराइल मेडिकल-ग्रेड शहद का ही इस्तेमाल सीमित परिस्थितियों में किया जाता है। किसी खुले, गहरे और बिना साफ किए गए गोली के घाव पर सामान्य या अशुद्ध शहद लगाना चिकित्सकीय दृष्टि से बेहद खतरनाक हो सकता है और इसे उचित उपचार का विकल्प नहीं माना जा सकता।
पशु चिकित्सा विशेषज्ञ का विश्लेषण
पशु चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. जहांजेब सिरवाल ने भी इस जैविक प्रक्रिया की पुष्टि करते हुए बताया कि शहद एक प्रभावी ऑस्मोटिक एजेंट के रूप में काम करता है। यह घाव के आसपास जमा अतिरिक्त द्रव को बाहर खींच लेता है, जिससे सूजन घटती है और मृत ऊतकों को प्राकृतिक रूप से अलग करने में मदद मिलती है। उन्होंने उल्लेख किया कि जंगलों और ग्रामीण अंचलों में जहां आधुनिक दवाएं तुरंत उपलब्ध नहीं होतीं, वहां लोग पारंपरिक रूप से जलने या कटने पर शहद का उपयोग करते रहे हैं। इसके अलावा पशुओं की गहरी चोटों के उपचार में भी ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक रूप से शहद का लेप लगाया जाता रहा है।
पांच साल से सुरक्षा बलों के रडार पर था मूसा
मध्य कश्मीर के बडगाम जिले के यूसमर्ग में मूसा का मारा जाना सुरक्षा बलों के लिए एक बहुत बड़ी रणनीतिक कामयाबी है। इसके साथ ही करीब पांच साल से चल रही उसकी तलाश का अंत हो गया है। अधिकारियों के मुताबिक, मूसा जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा बलों के काफिलों और निर्दोष नागरिकों पर हुए एक दर्जन से ज्यादा बड़े हमलों की साजिश रचने और उन्हें अंजाम देने में सीधे तौर पर शामिल रहा था। उसके आपराधिक रिकॉर्ड में कई भीषण आतंकी घटनाएं दर्ज हैं
- भाटा धुरियां घात लगाकर हमला: अप्रैल 2023 में पुंछ के भाटा धुरियां क्षेत्र में सेना के एक वाहन पर घात लगाकर हमला किया गया था, जिसमें पांच जवान शहीद हो गए थे।
- कांडी जंगल विस्फोट: मई 2023 में राजौरी के कांडी जंगल में आतंकियों की घेराबंदी के दौरान हुए आईईडी विस्फोट में सेना के पांच विशेष कमांडो वीरगति को प्राप्त हुए थे।
- डेरा की गली हमला: दिसंबर 2023 में पुंछ जिले के डेरा की गली इलाके में सैन्य वाहनों पर किए गए हमले में चार सैन्यकर्मियों की जान गई थी।
- वायुसेना के काफिले पर हमला: मई 2024 में शसितार के निकट भारतीय वायुसेना के काफिले को निशाना बनाकर गोलीबारी की गई थी, जिसमें एक वायुसैनिक शहीद हुए थे।
बुनियादी ढांचे और गैर-सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना
साल 2024 के उत्तरार्ध में मूसा के आतंकी नेटवर्क ने अपनी रणनीति बदलते हुए असैन्य नागरिकों, विकास परियोजनाओं और बुनियादी ढांचे से जुड़े श्रमिकों को निशाना बनाना शुरू कर दिया था। 20 अक्टूबर 2024 को गांदरबल जिले के गगनगीर में एक प्रमुख सुरंग निर्माण परियोजना के कैंप पर आतंकियों ने अचानक हमला बोल दिया था। इस कायरतापूर्ण हमले में एक स्थानीय चिकित्सक समेत सात निर्दोष लोगों की जान चली गई थी। इस घटना के महज चार दिन बाद आतंकियों ने बुटापथरी में सेना के एक वाहन पर गोलीबारी की थी, जिसमें दो सैन्य जवान और सेना के साथ काम करने वाले दो स्थानीय नागरिक रक्षा पोर्टर मारे गए थे।
पहलगाम के बड़े आतंकी हमले का मुख्य षड्यंत्रकारी
अधिकारियों ने यह भी उजागर किया कि मूसा वर्ष 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले के मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल था। दक्षिण कश्मीर के पहलगाम स्थित बैसरन के प्रसिद्ध घास के मैदान में हुए इस जघन्य हमले में आतंकियों ने पर्यटकों को निशाना बनाया था। इस भीषण आतंकी वारदात में मुख्य रूप से पर्यटकों समेत 26 लोगों की मौत हुई थी। इस हमले के बाद से ही सुरक्षा बल घाटी के चप्पे-चप्पे पर मूसा की तलाश में जुटे हुए थे, जिसका अंत आखिरकार बडगाम के यूसमर्ग के ऊंचाई वाले पहाड़ों में हुई निर्णायक मुठभेड़ के साथ हुआ।



















