जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद्म पुरस्कार देने के सुझाव पर कड़ा ऐतराज जताते हुए भारतीय जनता पार्टी पर तीखा व्यंग्य किया है। श्रीनगर में आयोजित क्रेता-विक्रेता सम्मेलन के मौके पर संवाददाताओं से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जिस अधिकारी ने पश्चिम बंगाल में राजनीतिक लाभ पहुंचाया हो, उसके लिए केवल पद्म भूषण की बात करना नाइंसाफी जैसा है। उनके अनुसार यदि सम्मान देना ही है तो सीधा देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिलना चाहिए।
सम्मान की चर्चा पर राजनीतिक तंज
उमर अब्दुल्ला ने व्यंग्यात्मक लहजे में अपनी बात रखते हुए कहा कि केवल पद्म भूषण तक सीमित रहने की क्या जरूरत है, उन्हें भारत रत्न से नवाजा जाना चाहिए। उन्होंने आगे जोड़ते हुए कहा कि जब राष्ट्रपति पद के चुनाव में एक-दो साल का समय शेष है, तो उन्हें देश का अगला राष्ट्रपति ही बना दिया जाए। मुख्यमंत्री का आरोप था कि संबंधित अधिकारी ने पश्चिम बंगाल को एक तरह से तोहफे में सौंपने का काम किया है, इसलिए पद्म भूषण का प्रस्ताव उनके कथित योगदान के सामने बहुत छोटा लगता है।
निर्वाचन आयोग की विश्वसनीयता और कार्यप्रणाली
संस्थान की साख पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि निर्वाचन आयोग को अपनी मौजूदा कार्यशैली पर गंभीरता से आत्म-मंथन करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आज अगर समूचा विपक्ष चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठा रहा है, तो उसके पीछे कोई ठोस आधार जरूर है। विपक्ष पर पक्षपात का आरोप मढ़ने के बजाय आयोग को यह समझना होगा कि गड़बड़ियों के तथ्य किसी राजनीतिक दल द्वारा नहीं गढ़े गए, बल्कि एक समाचार पत्र की गहन जांच के जरिए जनता के सामने आए हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि विवादों पर पर्दा डालने की जगह व्यवस्था में पारदर्शी सुधार किए जाने चाहिए ताकि भविष्य में ऐसे संगीन आरोपों की पुनरावृत्ति न हो।
विधानसभा चुनाव और अंतरराष्ट्रीय संबंध
केंद्र शासित प्रदेश में वर्ष 2029 के विधानसभा चुनावों को लेकर पूछे गए सवाल को उमर अब्दुल्ला ने वक्त से पहले की चर्चा करार दिया। उनका कहना था कि 2029 आने में लंबा वक्त बाकी है, इसलिए पहले 2026, 2027 और 2028 का दौर बीतने का इंतजार करना चाहिए, उसके बाद ही भावी चुनावी समीकरणों पर विमर्श ठीक रहेगा।
इसी बातचीत के दौरान उन्होंने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के चीन संबंधी बयान पर अपनी सहमति दर्ज कराई। मुख्यमंत्री ने गलवान घाटी की घटना के बाद के तनावपूर्ण दौर को याद करते हुए कहा कि उस समय हालात इतने बिगड़ चुके थे कि लोग अपने घरों की बालकनी से चीनी टेलीविजन फेंकने लगे थे। आज कम से कम दोनों देशों के बीच संवाद की बहाली हुई है और उच्च स्तर पर सार्थक मुलाकातें हो रही हैं, जो कूटनीति के लिहाज से सही दिशा है। उन्होंने रेखांकित किया कि उनकी पार्टी हमेशा से पड़ोसी मुल्कों के साथ शांतिपूर्ण और स्थिर संबंधों की पक्षधर रही है क्योंकि यह सीधे तौर पर देश के हित में है। पड़ोस के बिगड़ते समीकरणों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बांग्लादेश की स्थिति की तरफ इशारा किया और कहा कि ऐसे कई अन्य देश भी हैं जिनके साथ रिश्तों को संभालना जरूरी है।



















