झारखंड के बोकारो जिले में रहने वाले त्रिलोचन कोयरी आज गन्ने की खेती से हर साल करीब एक लाख रुपये की कमाई कर रहे हैं, और इसकी शुरुआत की वजह कोई पारंपरिक खेती-किसानी की सीख नहीं बल्कि यूट्यूब पर देखे गए वीडियो थे. उन्होंने बताया कि खेती के प्रति उनका रुझान इन्हीं वीडियो को देखकर बना, जिसके बाद उन्होंने अपने खेत में हाथ आजमाना शुरू किया.
पहले सब्जियां, अब गन्ने की खेती
त्रिलोचन ने करीब पांच साल पहले सब्जियों की खेती से अपना सफर शुरू किया था. लगातार मेहनत और अलग-अलग तरीकों को आजमाने के बाद उन्हें सब्जियों की खेती से अच्छी कमाई होने लगी. इसी अनुभव और आत्मविश्वास के बूते उन्होंने अपनी खेती में गन्ने को भी शामिल कर लिया और अब वह सब्जियों के साथ-साथ गन्ने की फसल भी उगा रहे हैं.
गन्ने की खेती के अपने फायदे
त्रिलोचन के मुताबिक गन्ना एक लंबी अवधि की फसल जरूर है, लेकिन बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है, जिससे किसानों को फसल बेचने में दिक्कत नहीं होती. उनका अनुभव यह भी बताता है कि कई दूसरी फसलों के मुकाबले गन्ने की फसल में कीट और रोगों का हमला कम देखने को मिलता है, जिससे दवाओं और देखभाल पर होने वाला अतिरिक्त खर्च भी बचता है. आमतौर पर गन्ने की फसल को पककर तैयार होने में 6 से 10 महीने तक का समय लगता है.
मार्च में बुवाई क्यों फायदेमंद
त्रिलोचन ने इस बार गन्ने की बुवाई मार्च महीने में की थी. उनका कहना है कि इस समय बुवाई करने पर फसल को शुरुआती दौर में ही अनुकूल मौसम मिल जाता है, जिससे पौधों की बढ़वार अच्छी होती है और आगे चलकर उपज भी बेहतर मिलने की संभावना बनती है.
एक एकड़ में लागत और मुनाफे का हिसाब
त्रिलोचन के मुताबिक एक एकड़ जमीन में गन्ने की खेती करने पर करीब 40 हजार रुपये की लागत आती है. इतनी लागत में एक एकड़ से करीब 350 क्विंटल गन्ने का उत्पादन हो जाता है. अगर बाजार में गन्ने का भाव 400 रुपये प्रति क्विंटल मिल जाए, तो 350 क्विंटल गन्ने को बेचकर करीब 1.40 लाख रुपये की सकल आमदनी हो सकती है. इसमें से 40 हजार रुपये की लागत घटाने के बाद किसान के हाथ में करीब 1 लाख रुपये की शुद्ध कमाई बचती है. हालांकि त्रिलोचन खुद यह भी साफ करते हैं कि असली कमाई बाजार भाव, उत्पादन की मात्रा और खेती पर आने वाले खर्च के हिसाब से घट-बढ़ सकती है.
सिंचाई और जल निकासी पर खास ध्यान
त्रिलोचन किसानों को सलाह देते हैं कि गन्ने की खेती में सिंचाई और जल निकासी, दोनों का पूरा ध्यान रखना चाहिए. उनके मुताबिक फसल को जरूरत के हिसाब से समय पर पानी देना जरूरी है, लेकिन खेत में पानी का जमाव होने से गन्ने की फसल को नुकसान पहुंच सकता है. बारिश या ज्यादा सिंचाई की स्थिति में खेत से अतिरिक्त पानी निकालने की सही व्यवस्था होनी चाहिए. उनका मानना है कि सिंचाई का सही प्रबंधन और बेहतर जल निकासी व्यवस्था अपनाकर किसान गन्ने की अच्छी पैदावार हासिल कर सकते हैं.



















