व्यापारिक प्रतिष्ठानों, शिक्षण संस्थानों और निजी कार्यक्रमों के प्रचार-प्रसार के लिए बैनर और विज्ञापनों की जरूरत हर शहर में लगातार बनी रहती है। स्कूल, कोचिंग सेंटर, अस्पताल, स्थानीय दुकानें और राजनीतिक या पारिवारिक आयोजनों के लिए फ्लेक्स और पोस्टर हमेशा तैयार करवाए जाते हैं। इसी निरंतर मांग के चलते प्रिंटिंग का क्षेत्र एक टिकाऊ और लाभदायक स्वरोजगार के रूप में उभर रहा है, जिसे बहुत छोटे स्तर से लेकर बड़े व्यावसायिक स्तर तक विकसित किया जा सकता है।
कम पूंजी में आउटसोर्सिंग मॉडल से करें शुरुआत
बोकारो के पेटरवार में ब्रदर फ्लेक्स प्रिंटिंग का संचालन करने वाले लकी, जो पिछले करीब 5 वर्षों से इस क्षेत्र में सक्रिय हैं, के अनुसार शुरुआत करने के लिए तुरंत महंगी मशीनें खरीदना अनिवार्य नहीं है। नए उद्यमी केवल 30 हजार रुपये की बेहद सीमित पूंजी के साथ भी बाजार में कदम रख सकते हैं। इस तरीके में व्यक्ति को खुद प्रिंटिंग मशीन लगाने के बजाय बाजार से ऑर्डर लेने होते हैं और प्रिंटिंग का काम पहले से स्थापित बड़ी प्रिंटिंग इकाइयों से आउटसोर्स करवाना होता है।
इस बुनियादी आउटसोर्सिंग मॉडल को संचालित करने के लिए एक छोटे कमरे या दुकान, एक बुनियादी कंप्यूटर सेटअप और ग्राफिक डिजाइनिंग की प्राथमिक समझ की आवश्यकता होती है। जब ग्राहक आपके पास बैनर या पोस्टर डिजाइन करवाने आते हैं, तो आप कंप्यूटर पर डिजाइन तैयार करके बड़े प्रिंटर संचालकों से उसे प्रिंट करवा लेते हैं और ग्राहक तक पहुंचा देते हैं।
खुद की मशीन लगाने और पेशेवर सेटअप में निवेश का गणित
जब काम का दायरा बढ़ता है और ग्राहक आधार मजबूत हो जाता है, तो उद्यमी अपना खुद का प्रिंटिंग सेटअप लगाने की दिशा में कदम बढ़ा सकते हैं। लकी के अनुसार, यदि कोई कारोबारी छोटे स्तर पर खुद की मशीन लगाना चाहता है, तो इसके लिए लगभग 5 से 6 लाख रुपये की पूंजी की आवश्यकता पड़ती है। इस बजट में बुनियादी प्रिंटिंग मशीन और जरूरी उपकरण आ जाते हैं।
वहीं, यदि पूरी तरह से पेशेवर और बड़े पैमाने पर प्रिंटिंग इकाई स्थापित करनी हो, तो यह निवेश करीब 20 लाख रुपये तक पहुंच सकता है। इस उच्च स्तरीय सेटअप में आधुनिक प्रिंटिंग मशीनों के अलावा कंप्यूटर हार्डवेयर, इन्वर्टर बैकअप सिस्टम, वातानुकूलित वातावरण यानी एसी और तकनीकी स्टाफ का खर्च शामिल होता है। बड़े निवेश के साथ काम शुरू करने पर उत्पादन क्षमता और कार्य की गुणवत्ता दोनों कई गुना बढ़ जाती हैं।
विविध ग्राहक वर्ग और संभावित आमदनी
फ्लेक्स और पोस्टर प्रिंटिंग के काम में ग्राहकों की कमी नहीं होती। रोजमर्रा के स्तर पर कोचिंग संस्थान, शैक्षणिक संस्थान, सरकारी दफ्तर, अस्पताल, स्थानीय व्यापारी, सामाजिक संगठन और उत्सव आयोजक नियमित रूप से प्रचार सामग्री तैयार करवाते हैं। इसके अतिरिक्त जन्मदिन, शादी की सालगिरह और अन्य पारिवारिक आयोजनों के लिए भी लोग विशेष बैनर प्रिंट कराते हैं।
इस व्यवसाय में वित्तीय मार्जिन आमतौर पर 25 से 30 फीसदी के आसपास रहता है। हालांकि, वास्तविक लाभ ऑर्डर की कुल संख्या, प्रिंट किए गए पोस्टर के आकार और स्थानीय बाजार में प्रचलित दरों पर निर्भर करता है। यदि कोई उद्यमी केवल आउटसोर्सिंग मॉडल पर काम कर रहा है और मशीन का भारी खर्च नहीं उठाता, तब भी रोजाना 20 ऑर्डर मिलने पर वह महीने में 15 से 20000 रुपये आसानी से कमा सकता है। दूसरी तरफ, जो लोग 20 लाख रुपये का निवेश करके पूर्ण प्रिंटिंग इकाई चलाते हैं, वे बेहतर प्रबंधन और नियमित ऑर्डर के बल पर प्रतिमाह करीब डेढ़ से 2 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा बना सकते हैं।
मशीन संचालन, डिजाइनिंग कौशल और बाजार चयन
इस कारोबार में सफलता पाने के लिए केवल मशीन खरीद लेना पर्याप्त नहीं होता। ग्राहकों की पसंद के मुताबिक आकर्षक डिजाइन तैयार करने की कला, प्रिंटर को सही ढंग से संचालित करने का तकनीकी ज्ञान और उपकरणों के रखरखाव की जानकारी बेहद जरूरी है। इसके साथ ही ग्राहकों से विनम्र संवाद और समय पर ऑर्डर सौंपने की प्रतिबद्धता व्यापार को तेजी से आगे बढ़ाती है।
प्रिंटिंग मशीन की खरीद के लिए दिल्ली, गुजरात और महाराष्ट्र को सबसे प्रमुख व्यापारिक केंद्र माना जाता है। मशीन खरीदने का फैसला करने से पहले उद्यमियों को उसकी उत्पादन क्षमता, वारंटी की शर्तें, स्पेयर पार्ट्स की स्थानीय उपलब्धता, सर्विस नेटवर्क और नियमित मेंटेनेंस पर होने वाले खर्च का विस्तृत अध्ययन अवश्य कर लेना चाहिए।





















