शुक्र का राहु नक्षत्र में 43 दिन का गोचर, इन राशियों की चमकेगी किस्मत, बरसेगा धनझुमरी तिलैया से जुड़ा था झारखंड के मंत्री सुदिव्य कुमार का बचपन, विधायक बनने के बाद रसोइया चाचा को लगाया था गलेसोते समय ईयरबड्स लगाने की आदत डाल सकती है भारी, डॉक्टर ने दी चेतावनीपाचन और दिल की सेहत सुधारने में मदद कर सकते हैं अलसी के छोटे बीज, डॉक्टर ने बताया सही तरीकासरकारी बैंक कर्मचारियों की मांग पर PLI स्कीम पर फिलहाल ब्रेक, वित्त मंत्री ने की डेलिगेशन से मुलाकातकोटा के इन 5 मंदिरों की कहानियां हैरान कर देंगी, कहीं धंसती है प्रतिमा तो कहीं भक्त लिखते हैं इच्छाएंदिल्ली में आज थमेगी बारिश, लेकिन ब्रिक्स समिट के चलते इन इलाकों में झेलनी पड़ सकती है ट्रैफिक की मारठाणे में सनसनीखेज वारदात: सार्वजनिक शौचालय में मजदूर की बेरहमी से हत्या कर नाले में फेंका शव, छात्र ने भी की खुदकुशीव्यस्त लाइफस्टाइल में भी हरियाली चाहिए तो घर में लगाएं ये 7 आसान इनडोर पौधे'हनुमान अंश' की कमाई में भी उछाल बरकरार, चार दिन में 'मिर्जापुर द मूवी' ने भी छुआ 100 करोड़ का आंकड़ा
रिटायरमेंट में पैसों की चिंता मिटाने के लिए रांची निवासी प्रभात ने सुझाए ये 5 जरूरी उपाय, समय रहते शुरुआत जरूरीझारखंड
8 सित॰ 2026, 7:05 am (1 घंटे पहले)· 2

रिटायरमेंट में पैसों की चिंता मिटाने के लिए रांची निवासी प्रभात ने सुझाए ये 5 जरूरी उपाय, समय रहते शुरुआत जरूरी

झारखंड की राजधानी रांची के प्रभात ने रिटायरमेंट को सुकून भरा बनाने के लिए 5 आसान लेकिन जरूरी आदतें बताई हैं, जिन्हें रिटायरमेंट से कम से कम 10 साल पहले अपनाना जरूरी है.

रिटायरमेंट की उम्र नजदीक आते ही ज्यादातर लोगों के मन में एक ही सवाल घूमने लगता है, बुढ़ापा आराम से कटेगा या नहीं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाले प्रभात का कहना है कि इस सवाल का जवाब आज से नहीं, बल्कि रिटायरमेंट से कम से कम 10 साल पहले ही तैयार कर लेना चाहिए. उनके मुताबिक अगर वक्त रहते पांच जरूरी बातों पर ध्यान दे दिया जाए, तो न पैसों की टेंशन रहती है और न सेहत बिगड़ने का डर.

पैसा जोड़ने की आदत जल्दी डालें

प्रभात का पहला सुझाव पैसों से जुड़ा है. उनका कहना है कि रिटायरमेंट से 10 साल पहले ही एसआईपी यानी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान शुरू कर देना चाहिए, चाहे रकम सिर्फ 100 रुपये महीने की ही क्यों न हो. उनके अनुसार आज यह रकम मामूली लग सकती है, लेकिन 10 साल तक लगातार निवेश करने पर यह एक ठीकठाक फंड में बदल जाती है. इससे न सिर्फ रिटायरमेंट के बाद हाथ में पैसा रहता है, बल्कि आत्मविश्वास भी बना रहता है कि जरूरत पड़ने पर खुद के दम पर खर्च संभाला जा सकता है.

ये भी पढ़ें

हड्डियां मजबूत रखने वाला योग जरूरी

पैसों के अलावा शरीर को भी उतनी ही तैयारी की जरूरत होती है. प्रभात के मुताबिक रोजाना योगाभ्यास करना चाहिए, खासकर वे आसन जो हड्डियों को मजबूत बनाते हैं. उनका कहना है कि उम्र बढ़ने के साथ गिरने और चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है, और मजबूत हड्डियां इस खतरे को काफी हद तक कम कर देती हैं. यही वजह है कि योग को उन्होंने रिटायरमेंट की तैयारी का उतना ही अहम हिस्सा बताया, जितना पैसा जोड़ना.

40 के बाद खानपान पर लगाम जरूरी

प्रभात ने उम्र के चालीसवें साल को एक टर्निंग पॉइंट बताया. उनकी सलाह है कि इस उम्र के बाद मैदा और चीनी जैसी चीजों से जितना हो सके दूरी बना लेनी चाहिए. साथ ही रात का खाना शाम 6 बजे तक निपटा लेना चाहिए. उनके मुताबिक ऐसा करने से शुगर और ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां दूर रहती हैं, और जब बीमारियां नहीं आतीं तो अस्पताल के खर्च भी अपने आप घट जाते हैं. यानी सही खानपान सीधे-सीधे जेब पर पड़ने वाले बोझ को भी हल्का कर देता है.

ध्यान और आध्यात्म से मिलती है समझ

प्रभात इसके बाद मानसिक और आध्यात्मिक तैयारी पर आते हैं. उनका सुझाव है कि मेडिटेशन को रोज की आदत बनाया जाए और संतों की आत्मकथाएं पढ़ी जाएं. उनके अनुसार इससे चेतना का स्तर बढ़ता है और एक अलग तरह का ज्ञान मिलता है, जो बुढ़ापे में आने वाली छोटी-छोटी उलझनों को सुलझाने में काम आता है. यानी सिर्फ शरीर और पैसा नहीं, मन को भी उतनी ही तैयारी की जरूरत होती है.

बचपन के शौक पूरे करने का वक्त

प्रभात के मुताबिक रिटायरमेंट अपने आप में कोई बुरी चीज नहीं है, बल्कि यह वह मौका है जब इंसान अपने बचपन के उन शौक को पूरा कर सकता है, जिन्हें सामाजिक जिम्मेदारियों की वजह से पूरा नहीं कर पाया. उन्होंने खुद गार्डनिंग और ट्रैवलिंग को अपने शौक के तौर पर गिनाया और कहा कि अपने पैशन को फॉलो करने से जिंदगी में एक नई ताजगी आती है और जीने का मकसद भी मिल जाता है.

पैसे से भी ऊपर है ज्ञान

सबसे आखिर में प्रभात ने जो बात कही, वह सबसे अहम मानी जा सकती है. उनके मुताबिक पैसे से भी ज्यादा जरूरी ज्ञान का होना है, और इसके लिए मेडिटेशन के साथ-साथ एक गुरु का साथ होना भी जरूरी है. उनका मानना है कि बुढ़ापे में इंसान छोटी-छोटी बातों पर आसानी से चिढ़ जाता है, खासकर तब जब उसकी बात नहीं सुनी जाती या घर-परिवार में पहले जैसी अथॉरिटी नहीं रह जाती. ऐसे मौकों पर ज्ञान ही इंसान को संभालने और शांत रहने में मदद करता है.

सवाल-जवाब

प्रभात कौन हैं और रिटायरमेंट को लेकर क्या सलाह दी है?
प्रभात रांची, झारखंड में रहते हैं और उन्होंने रिटायरमेंट को सुकून भरा बनाने के लिए 5 अहम सुझाव साझा किए हैं.
रिटायरमेंट की तैयारी कब से शुरू करनी चाहिए?
प्रभात के मुताबिक रिटायरमेंट से कम से कम 10 साल पहले ही तैयारी शुरू कर देनी चाहिए.
एसआईपी कितनी रकम से शुरू की जा सकती है?
भले ही सिर्फ 100 रुपये महीने की एसआईपी हो, 10 साल में यह एक अच्छी खासी रकम बन जाती है.
40 की उम्र के बाद खानपान में क्या बदलाव जरूरी बताया गया है?
मैदा और चीनी से परहेज करने और रात का खाना शाम 6 बजे तक कर लेने की सलाह दी गई है.
योग करने से बुढ़ापे में क्या फायदा होता है?
हड्डियां मजबूत करने वाला योग करने से गिरने और चोट लगने का खतरा कम हो जाता है.
प्रभात के मुताबिक सबसे जरूरी चीज क्या है?
उनका मानना है कि पैसे से भी ज्यादा जरूरी ज्ञान है, जिसके लिए मेडिटेशन और गुरु का होना जरूरी बताया गया है.
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·47 मिनट पहले

यह खबर व्यक्तिगत वित्तीय प्रबंधन और स्वास्थ्य के बीच के गहरे जुड़ाव को व्यावहारिक रूप से सामने लाती है। उत्तर प्रदेश और झारखंड जैसे हिंदी भाषी राज्यों में बढ़ती उम्र के साथ चिकित्सा खर्च एक बड़ी सामाजिक चुनौती बनते जा रहे हैं। यदि लोग چالیس वर्ष की उम्र से ही खानपान में अनुशासन और एसआईपी जैसे माध्यमों से निवेश शुरू कर दें, तो मध्यम वर्ग के परिवारों पर वृद्धावस्था में आर्थिक दबाव काफी हद तक कम हो सकता है। यह दृष्टिकोण केवल व्यक्तिगत बचत तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य में परिवारों की सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य तंत्र पर पड़ने वाले भारी दबाव को भी कम करने का एक प्रभावी माध्यम बन सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·46 मिनट पहले

यह रिपोर्ट दर्शाती है कि वृद्धावस्था की सुरक्षा केवल सरकारी योजनाओं या बड़े बीमा पॉलिसियों पर निर्भर नहीं है, बल्कि चालीस की उम्र के बाद की जीवनशैली और वित्तीय अनुशासन से तय होती है। अपराध और न्याय व्यवस्था की बीट पर काम करते हुए हमने अक्सर देखा है कि उम्र के अंतिम पड़ाव पर वित्तीय असुरक्षा और पारिवारिक कलह किस तरह कानूनी विवादों और आपराधिक मामलों में बदल जाती है। ऐसे में समय रहते एसआईपी जैसी छोटीचोटी बचतों के जरिए आत्मनिर्भर बनना और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना न केवल व्यक्तिगत शांति के लिए जरूरी है, बल्कि यह बुढ़ापे में अदालतों और पुलिस थानों के चक्कर काटने की नौबत आने से रोकने का एक ठोस सामाजिक उपाय भी है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR