जमशेदपुर में हालिया मूसलाधार बारिश के चलते स्वर्णरेखा नदी के बहाव और जलस्तर में बड़ा इजाफा दर्ज किया गया है। नदी में पानी का फैलाव बढ़ते ही जलीय हलचल काफी तेज हो गई है, जिसका सीधा लाभ किनारे पर जाल और कांटा डालने वाले स्थानीय मछुआरों को मिल रहा है। पानी के तेज दबाव और गहरे स्तर के कारण मछलियों की मौजूदगी किनारों के पास काफी बढ़ गई है, जिससे मछुआरे बहुत कम समय में भारी मात्रा में मछलियां पकड़ने में सफल हो रहे हैं। इस बदलाव ने इलाके में ताजी मछली के शौकीनों का ध्यान भी अपनी ओर खींचा है, जो अब मंडियों की बजाय सीधे नदी के तट पर पहुंच रहे हैं।
हर पांच मिनट में कांटा खींचने को मजबूर मछुआरे
स्वर्णरेखा नदी के मुहाने पर अपने साथियों के साथ दिनभर जाल संभालने वाले स्थानीय मछुआरे नीरज के मुताबिक, पानी के उफान ने उनके काम की रफ्तार पूरी तरह बदल दी है। सामान्य दिनों में घंटों इंतजार के बाद भी मामूली शिकार हाथ लगता था, लेकिन अभी जलस्तर ऊंचा होने की वजह से मछलियां बहुत आसानी से कांटे में फंस रही हैं। नीरज का कहना है कि स्थिति यह है कि लगभग हर पांच मिनट के भीतर एक नई मछली कांटे में उलझ जाती है। पकड़ी जा रही मछलियों में मुख्य रूप से रोहू, कतला और बाटा जैसी बेहद लोकप्रिय प्रजातियां शामिल हैं, जिनकी मांग हर मौसम में स्थानीय बाजारों में बनी रहती है।
दो घंटे की मेहनत में मिल रहा भरपूर शिकार
नदी किनारे काम कर रहे मछुआरों का आकलन है कि आम दिनों की अपेक्षा इस समय मछली पकड़ना कहीं ज्यादा लाभ का सौदा साबित हो रहा है। पहले जहां दिनभर तेज धूप या प्रतिकूल मौसम में नदी पर डटे रहने के बावजूद बेहद सीमित तादाद में मछलियां मिलती थीं, वहीं वर्तमान में महज दो घंटे के भीतर ही अच्छी-खासी मात्रा में मछलियां जमा हो जाती हैं। इन मछलियों की बाजार दर फिलहाल करीब 200 से 250 रुपये प्रति किलोग्राम तक चल रही है। कम समय में इतना शिकार मिलने से मछुआरों की दैनिक आय में उल्लेखनीय उछाल देखने को मिल रहा है।
बाजार जाने की बजाय सीधे किनारे पहुंच रहे खरीदार
इस पूरे घटनाक्रम का एक बड़ा पहलू यह है कि मछली के शौकीन लोगों को खरीदारी के लिए शहर के पारंपरिक मछली बाजारों का रुख नहीं करना पड़ रहा है। कई स्थानीय लोग सीधे स्वर्णरेखा नदी के किनारे पहुंच जाते हैं और मछुआरों द्वारा पानी से निकाली जा रही बिल्कुल ताजा और जिंदा मछली मौके पर ही तौलवाकर ले जाते हैं। नदी किनारे बाटा मछली की आवक विशेष रूप से काफी अधिक देखी जा रही है, जिसे ग्राहक अपनी पसंद के मुताबिक सीधे खरीद रहे हैं।
बिचौलियों के बिना सीधी बिक्री से दोहरा मुनाफा
भारी बारिश के बाद बने इन हालातों ने मछुआरों के लिए दोहरी राहत तैयार की है। एक तरफ जलस्तर में बढ़ोतरी से शिकार की प्रचुरता बढ़ी है, तो दूसरी तरफ मौके पर ही ग्राहकों के आ जाने से पूरी उपज हाथों-हाथ बिक जाती है। इससे मछुआरों को थोक व्यापारियों या बिचौलियों के पास जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती, जिससे उन्हें अपनी मेहनत का पूरा और उचित मूल्य सीधे नकद के रूप में मिल रहा है। जो लोग ताजी मछली खाने के शौकीन हैं, वे भी सीधे नदी तट से अपनी जरूरत की मछली खरीद रहे हैं।

















