चित्तौड़गढ़ जिले के रावतभाटा में स्थित परमाणु ऊर्जा स्टेशन की आवासीय परिसर अणु प्रताप कॉलोनी में इन दिनों गंभीर असुरक्षा का माहौल पनप रहा है। आमतौर पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के लिए पहचाने जाने वाले इस आवासीय क्षेत्र में जंगली सूअरों के एक बड़े झुंड ने डेरा डाल दिया है। विशेषकर कॉलोनी के टाइप-3 ब्लॉक के इर्द-गिर्द इन वन्यजीवों की निरंतर आवाजाही ने स्थानीय कर्मचारियों और उनके परिवारों की दिनचर्या को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। शाम होते ही यह झुंड सड़कों, रास्तों और हरित पार्कों में बेखौफ होकर घूमने लगता है, जिससे छोटे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों का घरों से बाहर निकलना दूभर हो गया है। बाहरी वन्यजीवों के इस बेरोकटोक प्रवेश ने संवेदनशील आवासीय सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
टाइप-3 ब्लॉक के पास बिल्ली के बच्चे पर जानलेवा हमला
इन जंगली सूअरों के आक्रामक बर्ताव का प्रत्यक्ष उदाहरण हाल ही में टाइप-3 ब्लॉक के समीप देखने को मिला। वहां घूम रहे सूअरों के झुंड ने अचानक एक असहाय बिल्ली के बच्चे को घेरकर उस पर जानलेवा हमला बोल दिया। गनीमत रही कि घटना के वक्त वहां मौजूद एक सतर्क निवासी ने सूझबूझ और अदम्य साहस का परिचय दिया। उन्होंने शोर मचाते हुए सूअरों को तुरंत खदेड़ दिया, जिससे उस छोटे जीव की जान बच सकी। इस प्रत्यक्ष हमले के बाद से रहवासियों में घबराहट और गहरा गई है। लोगों को आशंका है कि यदि इसी तरह किसी अकेले इंसान या पार्क में खेलते बच्चे का सामना इस आक्रामक झुंड से हो गया, तो कोई बड़ा और घातक हादसा घट सकता है। घटना के फौरन बाद निवासियों ने वन विभाग को पूरे मामले से अवगत कराया और इन सूअरों को फौरन पकड़कर दूर घने जंगलों में स्थानांतरित करने की मांग की।
कोलीपुरा घाटे में पैंथर की चहलकदमी और इंसानी दखल का असर
रावतभाटा के रिहायशी इलाकों की तरफ वन्यजीवों का पलायन केवल जंगली सूअरों तक ही सीमित नहीं है। समीपवर्ती कोलीपुरा घाटे में दिन के उजाले में भी पैंथर की निर्बाध आवाजाही दर्ज की जा रही है। एक तरफ सुरक्षित मानी जाने वाली आवासीय कॉलोनी में जंगली सूअरों का खौफ है, तो दूसरी तरफ प्रमुख मार्गों पर हिंसक पैंथर की मौजूदगी ने वन विभाग के वन्यजीव प्रबंधन तंत्र पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। पर्यावरण विशेषज्ञों का आकलन है कि प्राकृतिक जंगलों में वन्यजीवों के लिए भोजन और पेयजल के स्रोतों में भारी गिरावट आ रही है। इसके साथ ही वन क्षेत्रों में बेरोकटोक मानवीय गतिविधियों के विस्तार और पेड़ों की अवैध कटाई ने जानवरों के स्वाभाविक आवासों को तहस-नहस कर दिया है, जिस कारण वे भोजन की तलाश में आबादी वाले इलाकों का रुख करने को विवश हो रहे हैं।
बच्चों को घरों में रखने और एडवाइजरी का पालन करने के निर्देश
बढ़ते संकट को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और सजग नागरिकों ने कॉलोनीवासियों के लिए जरूरी सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। अभिभावकों से विशेष ताकीद की गई है कि वे किसी भी परिस्थिति में अपने बच्चों को बाहर अकेला खेलने न भेजें। इसके अलावा, टाइप-3 ब्लॉक के पीछे मौजूद सुरक्षा दीवार के समीप और अन्य वीरान या अंधेरे हिस्सों में जाने पर पूरी तरह मनाही की गई है। लोगों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे किसी भी जंगली जानवर को खुद लाठी-डंडों से भगाने या छेड़ने का जोखिम न उठाएं, क्योंकि आहत होने पर ये जानवर बेहद हिंसक हो सकते हैं। वन्यजीव दिखाई देने की दशा में तुरंत वन विभाग की आधिकारिक हेल्पलाइन पर सूचना देने को कहा गया है। आवासीय संघ ने वन विभाग के उच्चाधिकारियों से आग्रह किया है कि कॉलोनी में अविलंब प्रशिक्षित रेस्क्यू दल तैनात कर सुरक्षित निकासी अभियान शुरू किया जाए।

















