राजस्थान के दौसा जिले से एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बांदीकुई शहर स्थित कट्टा अस्पताल की स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट यानी एसएनसीयू वार्ड में गुरुवार को अचानक आग भड़क उठी। प्रसव के तुरंत बाद जिस नवजात शिशु को सुरक्षित रखने के लिए वार्मर मशीन में लिटाया गया था, वह शॉर्ट सर्किट के कारण आग की चपेट में आ गया। इस अप्रत्याशित घटना से वार्ड के भीतर अफरा-तफरी मच गई और बच्चे की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे तुरंत उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर करना पड़ा।
प्रसव के कुछ ही मिनटों बाद हुआ हादसा
प्राप्त विवरण के अनुसार, खुंटला क्षेत्र की रहने वाली एक महिला को प्रसव पीड़ा के चलते कट्टा अस्पताल में भर्ती कराया गया था। गुरुवार दोपहर करीब 12:45 बजे महिला ने शिशु को जन्म दिया। जन्म के बाद नवजात की उचित देखभाल और तापमान नियंत्रण के उद्देश्य से अस्पताल कर्मियों ने उसे एसएनसीयू वार्ड में स्थापित वार्मर मशीन में रखा था। शिशु अभी कुछ ही समय वार्मर में रहा था कि अचानक उपकरण के भीतर जोरदार शॉर्ट सर्किट हुआ और लपटें उठने लगीं। आग ने पलक झपकते ही नवजात को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे वह बुरी तरह झुलस गया।
उपकरण से धुआं और लपटें निकलते ही वार्ड में मौजूद मेडिकल स्टाफ और कर्मचारियों के बीच हड़कंप मच गया। स्वास्थ्य कर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए झुलसते शिशु को किसी तरह वार्मर मशीन से बाहर निकाला। अस्पताल परिसर में ही बच्चे को फौरन प्राथमिक उपचार दिया गया, लेकिन गंभीर रूप से झुलस जाने की वजह से चिकित्सकों ने बिना समय गंवाए उसे राजधानी जयपुर के लिए रेफर कर दिया। नवजात को तुरंत जेके लोन अस्पताल ले जाया गया, जहां विशेष चिकित्सकों की देखरेख में उसका उपचार जारी है।
पुलिस ने अस्पताल पहुंचकर शुरू की पड़ताल
घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन तुरंत हरकत में आया। हादसे की सूचना मिलते ही बांदीकुई थाना और बसवा थाना पुलिस के दल कट्टा अस्पताल पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का बारीकी से मुआयना किया और एसएनसीयू वार्ड में सुरक्षा इंतजामों का जायजा लिया। पुलिस ने उस वार्मर मशीन की तकनीकी स्थिति के बारे में जानकारी एकत्र की, जिसमें यह शार्ट सर्किट हुआ था। इसके अलावा पुलिस दल ने वार्ड में ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों और अस्पताल प्रबंधन के प्रतिनिधियों से भी विस्तृत पूछताछ की है। जांच दल यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि वार्मर में विद्युत खराबी किन परिस्थितियों में हुई और क्या वार्ड में आपातकालीन सुरक्षा उपकरण सही ढंग से काम कर रहे थे।
परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लगाए गंभीर आरोप
इस हृदयविदारक हादसे के बाद पीड़ित परिवार गहरे सदमे और आक्रोश में है। नवजात के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल खड़े किए हैं और प्रबंधन पर सीधी लापरवाही का आरोप लगाया है। परिजनों का स्पष्ट कहना है कि जिस मशीन को नवजात बच्चों की जान बचाने और उन्हें सुरक्षित माहौल देने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, उसमें आग लगना किसी बड़े खिलवाड़ से कम नहीं है। परिजनों ने मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि यह साफ हो सके कि मशीन की समय-समय पर तकनीकी सर्विसिंग और मेंटेनेंस की जाती थी या नहीं।
परिजनों का तर्क है कि एसएनसीयू जैसे संवेदनशील और जीवनरक्षक वार्डों में बिजली के तारों, सॉकेट्स और आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की नियमित जांच अनिवार्य रूप से होनी चाहिए। यदि उपकरणों की समय पर निगरानी होती तो मासूम की जान इस तरह जोखिम में न पड़ती। इस घटना के सामने आने के बाद अस्पताल के अन्य वार्डों में लगे इलेक्ट्रॉनिक जीवनरक्षक उपकरणों और वार्मर मशीनों की तकनीकी ऑडिट कराने की मांग भी जोर पकड़ने लगी है।
जांच के निष्कर्षों के बाद तय होगी जवाबदेही
फिलहाल पुलिस और संबंधित प्रशासनिक अमला पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटा है। जांच के केंद्र में कई अहम बिंदु शामिल किए गए हैं, जिनमें वार्मर मशीन की खरीद तारीख, उसके रखरखाव का रिकॉर्ड, बिजली आपूर्ति की स्थिति और आग लगने के समय मौके पर मौजूद स्टाफ की तत्परता शामिल है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी विशेषज्ञों की रिपोर्ट सामने आने के बाद ही हादसे के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा। जांच पूरी होने के उपरांत ही यह तय किया जाएगा कि इस दुखद घटना के लिए अस्पताल प्रबंधन या कोई अन्य व्यक्ति विधिक रूप से जिम्मेदार है अथवा नहीं।




















