पारंपरिक दक्षिण भारतीय व्यंजनों और आधुनिक फास्ट फूड के मेल से तैयार होने वाले स्वाद इन दिनों खानपान के शौकीनों को खूब आकर्षित कर रहे हैं। जमशेदपुर के कदमा इलाके में ऐसा ही एक अनोखा स्वाद बीते पांच वर्षों से लोगों की पसंद बना हुआ है, जिसे स्थानीय स्तर पर बर्गर वाली इडली कहा जाता है। संतोष नाम के एक विक्रेता इस छोटे से स्टॉल के जरिए रोजमर्रा के नाश्ते में एक नया प्रयोग पेश कर रहे हैं, जहां रोजाना सुबह आठ बजे से ही ग्राहकों की हलचल शुरू हो जाती है। स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों से लेकर दफ्तर का रुख करने वाले कामकाजी लोग सुबह के समय इस खास व्यंजन का स्वाद लेने पहुंचते हैं।
सॉफ्ट इडली और मसालेदार स्टफिंग से तैयार होता है यह रूप
इस व्यंजन को बनाने का तरीका इसे सामान्य इडली से पूरी तरह अलग कर देता है। सबसे पहले भाप में पकी हुई एकदम गर्म और बेहद मुलायम इडली तैयार की जाती है। इसके बाद उस इडली को बीच से काटकर दो हिस्सों में अलग किया जाता है, ठीक वैसे ही जैसे किसी सामान्य बर्गर बन को काटा जाता है। इसके अंदर भरने के लिए खास तौर पर उबले आलू का चटपटा मसाला, बारीक कटे प्याज और कद्दूकस की हुई गाजर का संतुलित मिश्रण तैयार रखा जाता है।
इस सब्जियों और आलू के मिश्रण को इडली के दोनों टुकड़ों के बीच अच्छी तरह भरकर दबा दिया जाता है। बाहर से देखने पर यह पूरी तरह से एक छोटे आकार के बर्गर जैसा दिखाई देता है। जब कोई इसे चखता है, तो इडली का नरम स्पंजी टेक्सचर और भीतर भरी सब्जियों का तीखा मसालेदार स्वाद मिलकर एक अनोखा जायका प्रदान करते हैं। यही संतुलित स्वाद इस फ्यूजन रेसिपी को आम इडली से अलग खड़ा करता है।
पांच साल पहले शुरू हुआ था यह नया प्रयोग
संतोष बताते हैं कि उन्होंने इस तरह की खास इडली तैयार करने की शुरुआत तकरीबन पांच साल पहले की थी। उस समय उनका इरादा सिर्फ इतना था कि लोगों के सामने कुछ ऐसा परोसा जाए जो न केवल खाने में स्वादिष्ट और पौष्टिक लगे, बल्कि सामान्य और पारंपरिक इडली के मुकाबले कुछ हटकर अनुभव दे। शुरुआत में जब उन्होंने यह व्यंजन बेचना शुरू किया, तो आसपास के ग्राहकों को यह विचार बिल्कुल नया और थोड़ा अजीब लगा था।
धीरे-धीरे जब लोगों ने इसे नाश्ते के रूप में आजमाना शुरू किया, तो इसका स्वाद उनकी जुबान पर चढ़ने लगा। समय बीतने के साथ यह डिश इतनी लोकप्रिय हो गई कि आज आसपास के रहवासी संतोष को उनके असली नाम से कम और बर्गर वाली इडली वाले के रूप में ज्यादा पहचानने लगे हैं। एक छोटे से प्रयोग के रूप में शुरू हुआ यह काम आज उनकी मुख्य पहचान बन चुका है।
हर उम्र के खरीदारों की पसंदीदा सुबह की डाइट
इस स्टॉल की एक बड़ी खूबी यह है कि यहां हर उम्र वर्ग के लोग नियमित रूप से आते हैं। सुबह आठ बजे दुकान खुलते ही स्कूल की यूनिफॉर्म पहने बच्चे अपने बस्ते के साथ हल्का और चटपटा नाश्ता करने पहुंच जाते हैं। वहीं दफ्तर के लिए निकलने वाले कई कर्मचारी भी रास्ते में रुककर इस बर्गरनुमा इडली को पैक करवाते हैं या वहीं खड़े होकर खाते हैं।
इतना ही नहीं, कदमा के आसपास के मोहल्लों के अलावा शहर के दूरदराज के हिस्सों से भी लोग इस खास फ्यूजन डिश की तलाश में यहां तक आते हैं। वहां नाश्ता करने वाले ग्राहकों का कहना है कि उन्होंने जीवन में कई जगह सादा और सांभर वाली इडली खाई है, लेकिन इडली के बीच में आलू, प्याज और गाजर की मसालेदार स्टफिंग भरकर बर्गर के रूप में खाने का अनुभव उनके लिए एकदम ताजा और दिलचस्प है।
स्वाद का अनूठा मेल जो ग्राहकों को दोबारा खींच लाता है
कदमा का यह छोटा सा फूड स्टॉल अब किसी परिचय का मोहताज नहीं रह गया है। खासकर उन युवाओं और नौकरीपेशा लोगों के बीच इसकी निरंतर चर्चा रहती है जो हर सुबह एक जैसा सादा नाश्ता खाकर ऊब चुके हैं और कुछ नया स्वाद ढूंढ रहे हैं। एक तरफ जहां दक्षिण भारतीय इडली की सौम्यता और हल्कापन मिलता है, वहीं दूसरी तरफ आलू और ताजी सब्जियों का तीखापन इसे फास्ट फूड का चटपटा अहसास देता है।
दोनों का यह संतुलित तालमेल पेट भरने के साथ-साथ स्वाद की संतुष्टि भी कराता है। यही कारण है कि जो व्यक्ति एक बार संतोष के ठेले पर इस बर्गर इडली को चख लेता है, वह बार-बार नाश्ते के वक्त यहां खिंचा चला आता है। यदि आप भी दक्षिण भारतीय खाने के मुरीद हैं और पारंपरिक इडली को एक नए और आधुनिक ट्विस्ट के साथ आजमाना चाहते हैं, तो जमशेदपुर के कदमा का यह ठिकाना एक बेहतरीन फूड अनुभव साबित हो सकता है।



















