शारदीय उत्सव के दौरान भक्तिमय माहौल के बीच झारखंड के कलाकारों ने अपनी रचनात्मकता से संगीत जगत में नई उपस्थिति दर्ज कराई है। पलामू स्थित मेदिनीनगर के निवासी गायक उमाशंकर मिश्रा ने दुर्गा पूजा के उपलक्ष्य में देवी की आराधना को समर्पित एक नया भजन प्रस्तुत किया है। इस पूरे संगीत वीडियो में एक मां और उसके बेटे के बीच पनपने वाले गहरे आत्मिक व भावनात्मक जुड़ाव को सुरों में ढाला गया है। इसके जरिए एक भक्त जगज्जननी के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उनकी भव्य अलौकिक छवि का गुणगान करता नजर आता है।
भजन की संरचना और काव्यात्मक बोल
इस नई रचना का शीर्षक ‘आदि शक्ति जगदम्बा’ रखा गया है, जिसकी कुल समय अवधि 5 मिनट 45 सेकंड दर्ज की गई है। रचनाकार ने माता रानी के विराट स्वरूप को शब्दों में पिरोते हुए यह संदेश दिया है कि सृष्टि का प्रारंभ और समापन सब उन्हीं के चरणों में समाहित है। गीत की पंक्तियों में सनातन सत्य और जगजननी के रूप में भवानी की महिमा का बखान अत्यंत सुंदर ढंग से किया गया है। वर्तमान समय में डिजिटल दर्शकों तक सीधी पहुंच बनाने के इरादे से इस पूरे भक्ति संगीत को उमाशंकर मिश्रा के व्यक्तिगत आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर जारी किया गया है।
निर्माण दल और पलामू की स्थानीय लोकेशन
रचनात्मक स्तर पर इस भजन को तैयार करने के लिए अंतरराज्यीय कलाकारों की टीम ने मिलकर काम किया है। इसके बोल पलामू के स्थानीय रचनाकार राजीव द्विवेदी सागर की कलम से निकले हैं, जबकि संगीत संयोजन का दायित्व पटना के संगीत निर्देशक छोटू रावत ने संभाला है। इस प्रोजेक्ट के साथ प्रयागराज यानी इलाहाबाद के विष्णु राजा का रचनात्मक सहयोग भी शामिल रहा। दृश्य पक्ष को आकर्षक बनाने के लिए नृत्य संयोजन मृत्युंजय मौर्य ने तैयार किया, जिस पर पटना की नृत्यांगना आरती कुमारी ने कैमरे के सामने अपनी कला का प्रदर्शन किया। तकनीकी टीम ने बाहरी शहरों में जाने के बजाय पलामू के पाटन ब्लॉक अंतर्गत नावाजयपुर इलाके में विशेष सेट लगाकर पूरे गाने का फिल्मांकन संपन्न किया।
पांचवीं कक्षा से आरंभ हुआ सफर और फिल्मों में अभिनय
उमाशंकर मिश्रा का सुरों से नाता कोई नया नहीं है, बल्कि उनके संगीत साधना की शुरुआत प्राथमिक विद्यालय के दिनों में ही हो गई थी। जब वे पांचवीं कक्षा में पढ़ाई कर रहे थे, उसी दौर से उन्होंने मंचों और घरेलू आयोजनों में गाना शुरू कर दिया था। औपचारिक और निरंतर रूप से वे वर्ष 1997 से संगीत के क्षेत्र में लगातार काम कर रहे हैं। वर्ष 2005 में श्रोताओं के बीच उनका पहला संगीत संग्रह ‘झारखंड की झटका’ सामने आया था। उस शुरुआती कामयाबी के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अब तक सैकड़ों म्यूजिक एलबम बाजार में उतार चुके हैं।
एनालॉग कैसेट और कॉम्पैक्ट डिस्क के दौर से संगीत यात्रा शुरू करके वे आज के आधुनिक इंटरनेट स्ट्रीमिंग युग में भी अपनी निरंतरता बनाए हुए हैं। गायन के समानांतर उन्होंने रूपहले पर्दे पर भी अपनी प्रतिभा आजमाई है और कई क्षेत्रीय फिल्मों में अभिनय की भूमिकाएं निभाई हैं।
छठ महापर्व की तैयारी और भविष्य का लक्ष्य
दुर्गा पूजा के तुरंत बाद आने वाले सूर्योपासना के महापर्व छठ को लेकर भी उनकी नई संगीतमय योजनाएं जमीन पर उतरने के लिए तैयार हैं। सूर्य देव की आराधना के लिए उन्होंने ‘उगी हे सूरज देव’ शीर्षक से एक पारंपरिक छठ गीत तैयार कर लिया है, जिसे जल्द ही श्रोताओं के समक्ष पेश किया जाएगा। गायक का कहना है कि उनकी मंजिल यहीं समाप्त नहीं होती, बल्कि वे देश के सबसे प्रतिष्ठित रिकॉर्ड लेबल टी-सीरीज के बैनर तले अपने गीतों को वैश्विक स्तर पर रिलीज कराने का सपना संजोए हुए हैं और उसी दिशा में सतत प्रयास कर रहे हैं।
























