झारखंड के बोकारो में इस बार का दुर्गा पूजाोत्सव बेहद खास होने जा रहा है क्योंकि शहर के प्रमुख आयोजनों में शामिल सेक्टर-2सी का पूजा पंडाल इस बार एक अलग ही रूप में नजर आएगा। इस बार यहां के आयोजन समिति ने देश के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में शुमार महाराष्ट्र के नासिक स्थित स्वामीनारायण मंदिर की तर्ज पर एक भव्य पंडाल तैयार करने का निर्णय लिया है। इस शानदार संरचना को देखने के लिए अभी से ही स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। आयोजन स्थल पर तैयारियां बहुत तेजी से चल रही हैं और कारीगर दिन-रात इस कलाकृति को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं ताकि समय रहते सब कुछ पूरी भव्यता के साथ तैयार हो सके।
15 लाख रुपये की लागत और विशाल आकार
इस पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 15 लाख रुपये की लागत आ रही है, जिसके जरिए एक विशाल और कलात्मक मंदिर का प्रारूप तैयार किया जा रहा है। इस पंडाल की कुल ऊंचाई 100 फीट और चौड़ाई 110 फीट तय की गई है, जो दूर से ही आने जाने वाले लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करेगी। इस भव्य ढांचे के भीतर स्थापित की जाने वाली मां दुर्गा की प्रतिमा की ऊंचाई लगभग 10 फीट होगी। इसकी बनावट और भव्य सजावट इस साल बोकारो के सबसे बड़े आकर्षणों में से एक बनने जा रही है, जिसे देखने के लिए आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है।
कारीगरों की मेहनत और निर्माण कार्य
इस नायाब पंडाल को जमीन पर उतारने के लिए पश्चिम बंगाल के साथ-साथ स्थानीय पिंड्राजोडा क्षेत्र के निपुण कारीगर दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। सेक्टर-2सी दुर्गा पूजा पंडाल कमेटी के अध्यक्ष संदीप ने जानकारी देते हुए बताया कि निर्माण से जुड़ा काम पिछले महीने की 16 तारीख से ही लगातार जारी है। इस प्रोजेक्ट को तय समय पर पूरा करने के लिए करीब 35 से 40 कुशल कारीगर लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं। कमेटी का मुख्य उद्देश्य निर्माण की हर बारीकी और सजावट के हर पहलू को बेहतरीन बनाना है ताकि आने वाले भक्तों को किसी भी प्रकार की कमी महसूस न हो और वे पूरी श्रद्धा के साथ पर्व का आनंद ले सकें।
थर्माकोल और कपड़ों से हो रही सजावट
निर्माण कार्य में जुटे प्रमुख कारीगर अताबुद्दीन ने बताया कि वह पिछले कई हफ्तों से इस काम में पूरी निष्ठा से लगे हुए हैं। वर्तमान में पंडाल के ढांचे पर कपड़े की फिनिशिंग और आंतरिक सजावट का काम प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है। इसके बाद मंदिर के मूल स्वरूप और उसकी वास्तुकला को उभारने के लिए विशेष रूप से थर्माकोल की मदद से खूबसूरत डिजाइन तैयार किए जाएंगे। इन बारीकियों के जुड़ जाने से यह पंडाल बिल्कुल असली स्वामीनारायण मंदिर की तरह प्रतीत होगा, जिसकी कलाकारी देखने लायक होगी।
षष्ठी के दिन खुलेगा भक्तों के लिए पट
श्रद्धालुओं के लंबे इंतजार को खत्म करते हुए षष्ठी के पावन अवसर पर इस भव्य पंडाल का आधिकारिक उद्घाटन किया जाएगा। इसके बाद से ही आम जनता और माता के भक्त इस अद्भुत पंडाल के दर्शन कर सकेंगे और साथ ही आसपास लगने वाले मेले का आनंद उठा पाएंगे। पूजा कमेटी ने उद्घाटन के दिन से लेकर विजया दशमी तक उमड़ने वाली भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए खास योजना तैयार की है ताकि दर्शनार्थियों को किसी तरह की असुविधा का सामना न करना पड़े।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और वॉलंटियर्स की तैनाती
भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए इस बार सुरक्षा व्यवस्था को बेहद चाक-चौबंद रखा गया है। कमेटी के अध्यक्ष संदीप ने बताया कि पूरे पंडाल परिसर और आसपास के मेला क्षेत्र की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए लगभग 35 आधुनिक सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा कानून व्यवस्था बनाए रखने और भीड़ को संभालने के लिए 100 से 150 विशेष वॉलंटियर्स की तैनाती की जाएगी, जिनके लिए एक अलग ड्रेस कोड भी तय किया गया है ताकि उनकी पहचान आसानी से हो सके। आग जैसी किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए अग्निशमन के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं और इसके लिए संबंधित विभाग से औपचारिक एनओसी भी प्राप्त कर ली गई है। इसके साथ ही वाहन चालकों की सुविधा के लिए सुनियोजित पार्किंग और सुचारू यातायात प्रबंधन की व्यवस्था भी की जा रही है ताकि हर कोई शांतिपूर्ण माहौल में पर्व का जश्न मना सके।



















