झारखंड के कोडरमा जिले में स्थित झुमरी तिलैया नगर परिषद क्षेत्र के गुमो इलाके में रहने वाले दिहाड़ी मजदूर अजीत रविदास के परिवार के लिए बारिश का मौसम हमेशा भारी दिक्कतों का सबब बनता था। खपरैल की कमजोर छत से पानी टपकने के कारण कमरों के भीतर बर्तन रखने पड़ते थे, ताकि भीगने से बचाव हो सके। दिहाड़ी मजदूरी से होने वाली मामूली कमाई में बच्चों और माता-पिता के भरण-पोषण के बाद पक्का घर खड़ा करना किसी नामुमकिन सपने जैसा दिखता था। केंद्र सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री आवास योजना की आर्थिक सहायता ने उनके जीवन की इस बड़ी मुश्किल को समाप्त कर दिया है और अब पूरा परिवार सुरक्षित पक्के मकान की छत तले सुकून की जिंदगी बिता रहा है।
दूसरों के मकानों में ईंट-बालू ढोने वाले मजदूर का अपना घर बना
अजीत रविदास पेशेवर रूप से दूसरों के घरों के निर्माण में मजदूरी करते थे। वह निर्माण स्थलों पर ईंट, बालू और सीमेंट जैसी सामग्रियां ढोने का काम करते रहे, लेकिन उनकी अपनी आर्थिक स्थिति बेहद नाजुक बनी रहती थी। दिहाड़ी काम नियमित न होने से कई बार रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाता था। रोजमर्रा के जरूरी खर्च पूरे करने के बाद बचत की कोई गुंजाइश नहीं बचती थी। ऐसे में अपने खुद के लिए एक पक्का आशियाना तैयार करने का विचार भी उनके सामर्थ्य से बाहर था।
इसी संघर्ष के दौरान लगभग चार वर्ष पूर्व उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के बारे में जानकारी प्राप्त हुई। उन्होंने बिना देर किए स्थानीय वार्ड पार्षद के माध्यम से योजना के तहत लाभ पाने के लिए औपचारिक आवेदन दाखिल किया। आवेदन की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए उन्होंने जमीन से जुड़ा खतियान, अपना आधार कार्ड और अन्य जरूरी आधिकारिक दस्तावेज संबंधित कार्यालय में जमा कराए।
सत्यापन के बाद मिली पहली किस्त, टाई बीम तक हुआ काम
आवेदन जमा होने के बाद जब योजना की आधिकारिक पात्रता सूची में अजीत रविदास का नाम शामिल हुआ, तब झुमरी तिलैया नगर परिषद की प्रधानमंत्री आवास योजना जांच टीम मौके पर पहुंची। टीम ने उनकी जमीन और पुराने खपरैल के मकान की जमीनी स्थिति का भौतिक सत्यापन किया। स्थल निरीक्षण और दस्तावेजों की गहन जांच पूरी होने के बाद प्रशासन ने उनके आवेदन को आधिकारिक स्वीकृति प्रदान कर दी।
मंजूरी मिलने के तुरंत बाद उनके बैंक खाते में पहली किस्त के रूप में 45 हजार रुपये की धनराशि भेजी गई। इस शुरुआती मदद का इस्तेमाल करते हुए अजीत ने अपने नए पक्के मकान की नींव खुदवाई और टाई बीम की ढलाई का बुनियादी ढांचा तैयार कराया। इसके बाद योजना के सुपरवाइजर ने फिर से निर्माण स्थल पर आकर काम का निरीक्षण किया और आधिकारिक रिकॉर्ड के लिए तस्वीरें खींचीं। इस जांच रिपोर्ट के आधार पर अगली किस्त का रास्ता साफ हुआ।
चार किस्तों में मिले 2.25 लाख रुपये, अनाज और कपड़े भीगने की चिंता खत्म
मकान निर्माण के अलग-अलग चरणों की प्रगति के साथ अजीत रविदास को कुल चार किस्तों के माध्यम से 2 लाख 25 हजार रुपये की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई। इस सरकारी सहायता राशि की मदद से उन्होंने दो कमरे, एक बड़ा हॉल और छत पर जाने के लिए पक्की सीढ़ियों वाला व्यवस्थित मकान तैयार कर लिया है।
पुराने खपरैल वाले घर में मानसून के समय पानी भर जाने से घर में रखा खाने-पीने का अनाज और कपड़े अक्सर भीगकर खराब हो जाते थे। तेज बारिश की रातों में बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर पूरा परिवार लगातार सहमा रहता था। अब पक्का घर तैयार होने के बाद पानी टपकने और भीगने की तमाम परेशानियां पूरी तरह खत्म हो गई हैं। अपनी इस नई छत और बदले हुए हालात के लिए अजीत दास ने केंद्र सरकार का आभार जताया है।
























