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तसर सिल्क पर हाथ की चिकनकारी से रेशमा ने खड़ा किया अपना मुकाम, बेंगलुरु से चेन्नई तक मांगझारखंड
21 सित॰ 2026, 8:56 pm (42 मिनट पहले)· 0

तसर सिल्क पर हाथ की चिकनकारी से रेशमा ने खड़ा किया अपना मुकाम, बेंगलुरु से चेन्नई तक मांग

रांची की 47 वर्षीय रेशमा ने तसर सिल्क पर हाथ की महीन चिकनकारी का अनूठा मेल कर अपना काम शुरू किया, जिसकी मांग अब दक्षिण भारत तक पहुंच गई है।

झारखंड की राजधानी रांची की रहने वाली रेशमा ने पारंपरिक परिधानों में एक नया प्रयोग कर अपनी अलग पहचान बनाई है। उन्होंने तसर सिल्क के महीन फैब्रिक पर हाथ की नक्काशीदार चिकनकारी का अनूठा मेल तैयार किया है। 47 साल की उम्र में अपनी खुद की मेहनत से आत्मनिर्भर बनने वाली रेशमा आज न सिर्फ अपने पैरों पर खड़ी हैं, बल्कि बड़े-बड़े शहरों में लगने वाली प्रदर्शनियों में जाकर अपने बनाए परिधानों की मार्केटिंग भी कर रही हैं। उनका मानना है कि पहले वे अपने पति के सहारे स्वतंत्र थीं, मगर अपनी काबिलियत के बल पर आत्मनिर्भर बनने का अनुभव बेहद खास और संतोषजनक होता है।

पूरी तरह हाथ से तैयार होता है हर परिधान

इस अनूठे कलेक्शन की सबसे बड़ी खासियत इसका पूरी तरह हस्तनिर्मित होना है। आमतौर पर बाजार में मशीनों से तैयार कपड़े मिलते हैं, मगर यहां तसर सिल्क के सलवार सूट की सिलाई से लेकर उस पर की जाने वाली चिकनकारी की हर कढ़ाई सिर्फ और सिर्फ हाथों से की जाती है। मशीन का बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं होने के कारण हर परिधान बेहद खास बन जाता है। इस जटिल और बारीक काम की वजह से एक सूट को तैयार करने में लगभग 25 दिन का वक्त लग जाता है।

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कारीगरों की मेहनत और परिधानों की कीमत

एक सिंगल सलवार सूट को मुकम्मल करने के लिए 4 से 5 हुनरमंद कारीगर मिलकर लगातार काम करते हैं। यही वजह है कि इस खास प्रीमियम सूट की कीमत 25,000 रुपये तक पहुंच जाती है। इसके अलावा उनके संग्रह में 5,000 रुपये से लेकर 20,000 रुपये तक के सामान्य चिकनकारी वाले सूट भी मौजूद हैं। रंगों की विविधता की बात करें तो ग्राहकों के लिए 25 से 30 अलग-अलग रंगों के विकल्प उपलब्ध कराए जाते हैं, ताकि हर पसंद को पूरा किया जा सके।

गुणवत्ता पर भरोसा और दक्षिण भारत तक विस्तार

रेशमा खुद ही हर कपड़े की डिजाइनिंग और कलरिंग का जिम्मा संभालती हैं। ग्राहक जिस रंग की मांग करते हैं, वे उसी के अनुसार परिधान तैयार कर देती हैं। उनका स्पष्ट नजरिया रहा है कि लोगों को हमेशा असली और प्रामाणिक चीज ही पहनाई जाए। रेशमा का कहना है कि व्यापार में भले ही दो ही पीस बिकें, लेकिन वे पूरी तरह शानदार और बेहतरीन गुणवत्ता वाले होने चाहिए। इसी सोच का नतीजा है कि तसर और चिकनकारी की यह परंपरा आज बेंगलुरु और चेन्नई जैसे बड़े शहरों के खरीदारों को भी खूब पसंद आ रही है और वहां से लगातार इसके ऑर्डर मिल रहे हैं।

सवाल-जवाब

रेशमा कौन हैं और वे किस प्रकार के परिधान तैयार करती हैं?
रेशमा रांची की रहने वाली एक उद्यमी हैं, जो तसर सिल्क पर हाथ से चिकनकारी की कढ़ाई वाले सलवार सूट तैयार करती हैं।
इस खास सलवार सूट की कीमत कितनी है?
इस प्रीमियम हाथ से बने सूट की कीमत 25,000 रुपये तक जाती है, जबकि उनके पास 5,000 से 20,000 रुपये के अन्य चिकनकारी सूट भी उपलब्ध हैं।
एक सूट को तैयार करने में कितना समय लगता है?
पूरी तरह हाथ से सिलाई और महीन चिकनकारी का काम होने की वजह से एक सूट बनने में करीब 25 दिन का वक्त लगता है।
एक परिधान को बनाने में कितने कारीगर काम करते हैं?
प्रत्येक सलवार सूट को तैयार करने के लिए 4 से 5 हुनरमंद कारीगर मिलकर काम करते हैं।
ग्राहकों के लिए कितने रंगों के विकल्प मौजूद हैं?
उनके संग्रह में कम से कम 25 से 30 रंगों के विकल्प उपलब्ध हैं और ग्राहकों की मांग के अनुसार भी रंग तैयार किए जाते हैं।
इन परिधानों की मांग किन बड़े शहरों से आ रही है?
प्रदर्शनियों में पहचान मिलने के बाद दक्षिण भारत के बड़े शहरों जैसे बेंगलुरु और चेन्नई से इसके नियमित ऑर्डर आ रहे हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·14 मिनट पहले

एक सूट को बनाने में 25 दिन लगना और 4-5 कारीगरों की मेहनत वाकई इस काम की कीमत साबित करती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·13 मिनट पहले

रोहन भाई, एकदम सही कहा आपने। पिछले साल जब मैं चेन्नई गया था, तो वहाँ एक ऐसी ही प्रदर्शनी में तसर सिल्क पर हाथ के काम की बारीकी देखकर हैरान रह गया था।

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