झारखंड के रांची स्थित प्रतिष्ठित संस्थान बीआईटी मेसरा से एक प्रेरक कहानी सामने आई है, जहाँ प्रोडक्शन एंड इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग के छात्र सागर ने अपनी लगन से अकादमिक उत्कृष्टता हासिल की है। एक साधारण किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले सागर ने अपनी मेहनत के दम पर संस्थान का प्रतिष्ठित गोल्ड मेडल अपने नाम किया। उनके पिता का सपना था कि उनका बेटा इंजीनियरिंग के क्षेत्र में नाम कमाए, और सागर ने अपने पिता के जन्मदिन के अवसर पर गोल्ड मेडल जीतकर उनके इस सपने को पूरा कर दिया। इस बड़ी अकादमिक उपलब्धि के साथ ही सागर का चयन प्रतिष्ठित जिंदल स्टील प्लांट में कैंपस प्लेसमेंट के जरिए भी हुआ है। सफलता की इस ऊँचाई पर पहुँचने के बाद उन्होंने इंजीनियरिंग और उच्च शिक्षा हासिल कर रहे छात्रों के लिए कुछ बेहद उपयोगी सुझाव साझा किए हैं, ताकि वे भी कैंपस प्लेसमेंट में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
कॉलेज के वरिष्ठ साथियों से निरंतर संवाद और मार्गदर्शन
कैंपस जीवन और प्लेसमेंट की तैयारी में सीनियर्स की भूमिका को सबसे अहम मानते हुए सागर ने बताया कि कॉलेज में जो छात्र आपसे दो या तीन साल आगे हैं, उनसे बातचीत करना बेहद फायदेमंद साबित होता है। वे पहले ही उन रास्तों से गुजर चुके होते हैं, जहाँ जूनियर छात्र कदम रख रहे होते हैं। ऐसे में सीनियर्स को इस बात की गहरी समझ होती है कि इंटरव्यू के दौरान आपकी पर्सनालिटी कैसी दिखनी चाहिए, बात करने का सही लहजा क्या होना चाहिए और किस विषय अथवा हुनर पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। इसलिए छात्रों को चाहिए कि वे अपने वरिष्ठ साथियों के साथ एक सकारात्मक और सम्मानजनक रिश्ता बनाए रखें, जिससे समय पर सही सलाह और मार्गदर्शन प्राप्त हो सके।
किताबी ज्ञान के साथ आधुनिक हुनर सीखना भी जरूरी
अक्सर छात्र केवल अपनी किताबों और सेमेस्टर परीक्षाओं तक सीमित रह जाते हैं, लेकिन सागर का मानना है कि केवल अकादमिक अंकों पर निर्भर रहना सही रणनीति नहीं है। उनके अनुसार पढ़ाई का अपना महत्व है और वह लगातार चलती रहती है, परंतु उसके साथ-साथ उद्योग की बदलती जरूरतों के हिसाब से नए कौशल सीखना भी उतना ही अनिवार्य है। जब छात्र अपने मुख्य विषय की समझ के साथ नए तकनीकी और व्यावहारिक हुनर को भी तराशते हैं, तो उनका प्रोफाइल मजबूत बनता है। इस संतुलन की बदौलत प्लेसमेंट इंटरव्यू के दौरान उम्मीदवार के पास खुद को साबित करने के लिए काफी विविधता मौजूद रहती है, जिससे नौकरी पाने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
जिस उद्योग में जाना है उसकी जमीनी समझ होना आवश्यक
सागर ने अपने अनुभव के आधार पर यह भी स्पष्ट किया कि छात्रों को अपने लक्षित क्षेत्र की पूरी जानकारी रखनी चाहिए। चूंकि उनका खुद का लक्ष्य इंडस्ट्रियल क्षेत्र में करियर बनाने का था, इसलिए उन्होंने इस बात का गहराई से अध्ययन किया कि इस सेक्टर में किन चीजों की वास्तविक जरूरत होती है, कंपनियाँ किस तरह कार्य करती हैं और वहां किन कौशलों को प्राथमिकता दी जाती है। उनका कहना है कि जिस भी फील्ड में छात्र अपना भविष्य तलाश रहे हैं, उससे जुड़े आधुनिक रुझानों और कार्यप्रणाली की अद्यतन जानकारी इंटरव्यू टेबल पर आत्मविश्वास पैदा करती है। इंटरव्यू लेने वाले अधिकारी यह परखते हैं कि छात्र अपने चुने हुए क्षेत्र के प्रति कितना गंभीर और जागरूक है।
प्रोजेक्ट वर्क में दिखाएं नवाचार और अनूठापन
अकादमिक प्रोजेक्ट्स को केवल औपचारिकता मानने के बजाय उसे गंभीरता से लेने पर जोर देते हुए सागर ने बताया कि उन्होंने अपने प्रोजेक्ट कार्य में विशेष ध्यान दिया था। इंडस्ट्रियल क्षेत्र की वास्तविक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए उन्होंने कुछ अलग और अनूठा उत्पाद तैयार करने पर काम किया। इस कार्य में उन्होंने अपने प्रोफेसरों के मार्गदर्शन और अपने सीनियर्स की सलाह का भरपूर उपयोग किया। उनका स्पष्ट संदेश है कि जब छात्र मजबूत प्रोजेक्ट और बेहतरीन कौशल के साथ खुद को रिक्रूटर्स के सामने प्रस्तुत करते हैं, तो उन्हें मनपसंद और शानदार प्लेसमेंट मिलना लगभग तय हो जाता है।




















