बिहार के मुजफ्फरपुर शहर में इस वर्ष शारदीय नवरात्र के अवसर पर श्रद्धालुओं को एक अनोखा धार्मिक अनुभव मिलने वाला है। शहर के व्यस्त व्यापारिक क्षेत्र मोतीझील की पांडे गली में इस बार का पूजा पंडाल महाराष्ट्र के सुप्रसिद्ध केदारेश्वर गुफा मंदिर की तर्ज पर निर्मित किया जा रहा है। मोतीझील दुर्गा पूजा समिति द्वारा तैयार किए जा रहे इस पूरे परिसर में श्रद्धालुओं को किसी वास्तविक गुफा के भीतर भ्रमण करने जैसा अहसास होगा। पंडाल के भीतर देवी दुर्गा को भगवान शिव के पावन शिवलिंग पर दुग्धाभिषेक करते हुए दर्शाया जाएगा, जो भक्तों के लिए विशेष आध्यात्मिक आकर्षण का केंद्र बनेगा।
पौराणिक कथाओं और चार युगों का सजीव चित्रण
पंडाल के भीतरी भाग में प्राचीन हिंदू मान्यताओं के अनुसार चार प्रमुख युगों यानी सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग की अवधारणा को रूपायित किया जा रहा है। महाराष्ट्र के केदारेश्वर मंदिर से जुड़ी लोकमान्यता है कि वहां के चार खंभे इन्हीं चार युगों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिनमें से तीन खंभे कालचक्र के साथ ध्वस्त हो चुके हैं और वर्तमान में समूचा ढांचा केवल एक स्तंभ पर टिका है। इसी आध्यात्मिक विचार को मुजफ्फरपुर के पंडाल में जीवंत करने का प्रयास किया गया है।
गुफा नुमा मार्ग में आगे बढ़ते हुए श्रद्धालुओं को भूत-प्रेत तथा अन्य अलौकिक शक्तियों की विभिन्न मूर्तियां नजर आएंगी। समिति के सदस्य आदित्य कुमार ने इस संदर्भ में जानकारी साझा करते हुए बताया कि समिति हर वर्ष कुछ अनूठा प्रस्तुत करने का संकल्प लेती है। पंडाल में स्थापित की जाने वाली सभी कलाकृतियां स्थिर मुद्रा में रहेंगी, किंतु पूरे वातावरण को प्रभावी बनाने के लिए विशेष ध्वनि व्यवस्था की गई है। साउंड इफेक्ट्स और ऑडियो नैरेशन के माध्यम से दर्शनार्थियों को चारों युगों का दार्शनिक महत्व और उनसे जुड़ी कथाएं विस्तार से समझाई जाएंगी।
काजू-बादाम से सजेगा देवी का मुकुट और शृंगार
इस पूरे आयोजन का मुख्य आकर्षण देवी प्रतिमा का अलौकिक शृंगार और उनका दिव्य मुकुट होगा। समिति के अनुसार, मां दुर्गा के मुकुट सहित उनके संपूर्ण सोलह शृंगार को तैयार करने के लिए लगभग 21 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाले ड्राई फ्रूट्स का उपयोग किया जा रहा है। सूखे मेवों से सुसज्जित इस आभूषण और परिधान कला पर करीब 51 हजार रुपये की लागत आने का अनुमान है। आयोजकों का दावा है कि सूखे मेवों से इस प्रकार का भव्य मुकुट तैयार करने का प्रयोग बिहार में पहली बार देखने को मिल रहा है।
स्थानीय शिल्पकारों का अथक परिश्रम और बजट
इस भव्य पंडाल और कलात्मक मुकुट को आकार देने का दायित्व मुजफ्फरपुर के स्थानीय कलाकारों ने संभाल रखा है। वरिष्ठ शिल्पकार सोनेलाल जी के नेतृत्व में गोलू कुमार, आकाश कुमार और समिति के कई समर्पित कार्यकर्ता लगातार मेहनत कर रहे हैं। पंडाल की संपूर्ण संरचना को खड़ा करने में पिछले 25 दिनों से दिन-रात काम चल रहा है, जबकि केवल ड्राई फ्रूट वाले मुकुट को बारीकी से तराशने में कारीगर 12 दिनों से जुटे हुए हैं।
समिति के सदस्य आदित्य कुमार के अनुसार, इस पूरे आयोजन, प्रकाश व्यवस्था और पंडाल निर्माण पर लगभग 7 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है। समिति ने आसपास के सभी नागरिकों और श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि वे नवरात्र के पावन दिनों में मोतीझील की पांडे गली पहुंचकर इस गुफानुमा पंडाल और माता के इस अनूठे स्वरूप के दर्शन का लाभ उठाएं।


















