सितंबर की झमाझम बारिश के बाद झारखंड के जंगल और पहाड़ नए रंग में नजर आने लगे हैं और इसी मौसम में पलामू जिले का मिरचैया झरना सैलानियों के बीच खासी चर्चा में है. नेतरहाट की ओर जाने वाले घने जंगलों वाले रास्ते पर बसा यह झरना बारिश के बाद अपने पूरे उफान पर पहुंच जाता है और यहां पहुंचते ही सफर की थकान और रोजमर्रा का तनाव कुछ पलों के लिए भूल जाने का मौका मिलता है.
घने जंगलों के बीच रास्ते में मिलता है पहला नजारा
नेतरहाट जाने वाले सड़क मार्ग पर घने और घनघोर जंगलों के बीच सफर करते हुए अचानक मिरचैया जलप्रपात का नजारा सामने आता है, जो राहगीरों और पर्यटकों दोनों का ध्यान अपनी ओर खींच लेता है. यह झरना पर्यटन के लिहाज से इलाके में खास पहचान रखता है और सितंबर में अच्छी बारिश के बाद यह पूरे शबाब पर नजर आता है. ऊंचाई से नीचे गिरता पानी, चारों तरफ फैली हरियाली और आसपास के जंगलों की प्राकृतिक बनावट पर्यटकों को देर तक बांधे रखती है.
बारिश ने और निखार दी है झरने की खूबसूरती
मानसून के महीनों में झारखंड के प्राकृतिक स्थलों की रौनक वैसे भी बढ़ जाती है, लेकिन सितंबर का महीना घूमने-फिरने के हिसाब से सबसे मुफीद माना जाता है. इसी दौर में यहां की पहाड़ियां हरी चादर ओढ़ लेती हैं और झरने पूरी ताकत के साथ बहने लगते हैं. नेतरहाट, बेतला और लोध फॉल्स जैसे कई मशहूर पर्यटन स्थल इस मौसम में सैलानियों को बुलावा भेजते हैं, मगर मिरचैया जलप्रपात की चमक इस मौसम में कुछ अलग ही होती है, क्योंकि यहां सुहावना मौसम और नजारे मिलकर सफर को यादगार बना देते हैं.
परिवार और दोस्तों के साथ पिकनिक का बेहतरीन ठिकाना
अगर सितंबर में परिवार या दोस्तों के साथ किसी खूबसूरत पिकनिक स्पॉट की तलाश है, तो मिरचैया जलप्रपात एक अच्छा विकल्प बनकर उभरता है. बारिश थमने के बाद यहां की प्राकृतिक सुंदरता में और निखार आ जाता है. चारों ओर फैली हरियाली, घने जंगल और शांत माहौल पर्यटकों को सुकून का अहसास कराते हैं, जबकि चट्टानों के बीच से बहती झरने की दूधिया धारा देखने वालों का मन मोह लेती है. प्रकृति की गोद में कुछ यादगार पल बिताने के लिए यह जगह किसी रोमांच से कम नहीं लगती.
सुविधाएं मौजूद, लेकिन सावधानी भी जरूरी
पर्यटकों की सहूलियत के लिए झरने के परिसर में शौचालय की व्यवस्था की गई है, जिससे परिवार के साथ आने वाले लोगों को खासी राहत मिलती है. हालांकि झरने में नहाते वक्त पानी की तेज धार और चट्टानों की फिसलन को देखते हुए सावधानी बरतना जरूरी है, क्योंकि जरा सी लापरवाही हादसे की वजह बन सकती है. परिसर के आसपास कुछ छोटी-छोटी दुकानें जरूर हैं, जहां हल्की-फुल्की जरूरत की चीजें मिल जाती हैं, लेकिन विशेष भोजन की व्यवस्था सीमित होने से बेहतर यही रहेगा कि पर्यटक खाने-पीने का जरूरी सामान पहले से साथ लेकर आएं.
सितंबर में क्यों बढ़ जाती है यहां भीड़
सितंबर के महीने में मिरचैया जलप्रपात अपने पूरे उफान पर होता है, इसी वजह से इस दौरान यहां पहुंचने वाले पर्यटकों की तादाद भी सामान्य दिनों के मुकाबले बढ़ जाती है. ऊंचाई से गिरती दूधिया जलधारा, चारों तरफ फैली हरियाली और घने जंगल का शांत वातावरण दूर-दूर से लोगों को यहां खींच लाता है. कई पर्यटक परिवार और दोस्तों संग पिकनिक मनाने और प्रकृति के करीब कुछ सुकून भरे पल बिताने के इरादे से यहां पहुंचते हैं.



















