रांची में झारखंड के मंत्री सुदिव्य सोनू के निधन के बाद एक बार फिर यह गंभीर सवाल खड़ा हो गया है कि दिल के दौरे के शुरुआती लक्षणों की पहचान करना कितना जरूरी है और मरीज को कितनी जल्दी अस्पताल पहुंचना चाहिए। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, दिल का दौरा एक ऐसी जानलेवा स्थिति है जिसमें समय सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। कई मामलों में इसके लक्षण बहुत ज्यादा तीव्र नहीं होते, जिसके कारण लोग सीने में उठने वाले दर्द या हल्की बेचैनी को सामान्य गैस, थकान या मामूली दर्द समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन सीने में दबाव या भारीपन, सांस फूलने की समस्या, अत्यधिक पसीना आना, कमजोरी महसूस होना या फिर दर्द का हाथ, पीठ, गर्दन, जबड़े या पेट तक फैल जाना दिल के दौरे के गंभीर चेतावनी संकेत हो सकते हैं। इस तरह के लक्षणों के सामने आने पर किसी भी प्रकार की देरी करने के बजाय तुरंत चिकित्सीय सहायता लेना बेहद आवश्यक होता है। विशेष रूप से उन लोगों को जिन्हें पहले से डायबिटीज, उच्च रक्तचाप या दिल से जुड़ी बीमारियां हैं, ऐसे संकेतों को बिल्कुल भी हल्के में नहीं लेना चाहिए।
गैस की गलतफहमी और शरीर के अलग-अलग हिस्सों में दर्द
रांची के जाने-माने कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. रंजन कुमार झा का कहना है कि दिल के दौरे से जुड़े शुरुआती और छोटे लक्षणों को लोग अक्सर अनदेखा कर देते हैं। इसी लापरवाही के कारण मरीज तीन घंटे के महत्वपूर्ण गोल्डन ऑवर को पूरी तरह बर्बाद कर देते हैं और अपनी जान गंवा बैठते हैं। उनका स्पष्ट रूप से यह सुझाव है कि अगर किसी व्यक्ति को शुगर या ब्लड प्रेशर की समस्या है और उसके शरीर में कान के नीचे से लेकर नाभि तक किसी भी हिस्से में दर्द महसूस हो रहा है, तो यह दिल के दौरे का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में इसे केवल पेट की गैस या सामान्य बीमारी समझना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। रांची रिम्स के कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के विभागाध्यक्ष डॉ. हेमंत नारायण भी इस बात पर जोर देते हैं कि दिल के दौरे की आशंका होने पर सबसे पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम मरीज को बिना किसी विलंब के अस्पताल पहुंचाना है, क्योंकि केवल सीने या शरीर का दर्द कम होने का इंतजार करना जानलेवा हो सकता है।
नियमित जांच और एहतियाती दवाइयों का महत्व
रिम्स के कार्डियोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. हेमंत नारायण हृदय स्वास्थ्य की नियमित जांच करवाने की आवश्यकता पर बार-बार जोर देते हैं। खास तौर पर उन लोगों को अपने हृदय की सेहत को लेकर बहुत अधिक सतर्क रहने की जरूरत है जो डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापे से ग्रस्त हैं, धूम्रपान करते हैं या जिनके परिवार में हृदय रोगों का पुराना इतिहास रहा है। डॉ. हेमंत नारायण ने लोगों को सलाह दी है कि हर किसी को समय-समय पर अपने दिल की जांच जरूर करवानी चाहिए क्योंकि समय पर की गई जांच से इस जानलेवा समस्या से बचा जा सकता है। इसके अलावा, डॉक्टरों के अनुसार दिल के मरीजों को हमेशा अपने पास दो विशेष दवाइयां रखनी चाहिए, जिनके नाम एस्पिरिन और सर्बिट्रेट हैं। चिकित्सक की सलाह के अनुसार इन दवाइयों को समय पर ले लेने से कई बार मरीज की जान बचाई जा सकती है। आंकड़ों के अनुसार लगभग 20 प्रतिशत मरीज केवल समय पर इन दवाइयों का सेवन करने से जीवित बच जाते हैं। हालांकि, एस्पिरिन के इस्तेमाल को लेकर भी डॉक्टरों की सलाह बेहद जरूरी होती है क्योंकि मरीज की एलर्जी, ब्लीडिंग का खतरा और अन्य मेडिकल स्थितियां इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इसलिए पहले आपातकालीन चिकित्सा सहायता प्राप्त करना और डॉक्टर के निर्देश के अनुसार ही दवा लेना सबसे सुरक्षित रास्ता है।
बदलती जीवनशैली और युवाओं में बढ़ते मामले
डॉ. हेमंत नारायण का यह भी मानना है कि केवल दवाइयां ही नहीं, बल्कि सही खान-पान और अनुशासित जीवनशैली भी व्यक्ति को दिल के दौरे से बचा सकती है। डॉक्टर बताते हैं कि वर्तमान समय में देश के युवाओं में दिल के दौरे के मामले सबसे तेजी से बढ़ रहे हैं। पर्याप्त नींद न मिलना और लगातार मानसिक तनाव में रहना किसी भी व्यक्ति के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। हर इंसान को स्वस्थ रहने के लिए हफ्ते में कम से कम 150 मिनट तक पैदल चलना चाहिए। इसके साथ ही अपने खान-पान का विशेष ध्यान रखना और तनाव मुक्त जीवन जीना बेहद जरूरी है। दूसरी तरफ, सुदिव्य सोनू के आकस्मिक निधन के बाद झारखंड कैबिनेट के अन्य मंत्री भी अपने स्वास्थ्य को लेकर काफी सतर्क और गंभीर नजर आ रहे हैं।
अस्पताल पहुंचने में देरी और मंत्रियों की प्रतिक्रिया
रिम्स के कार्डियोलॉजी विभाग में स्वास्थ्य जांच कराने पहुंचे राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने भी दिल के मामले में समय के महत्व पर विशेष रूप से प्रकाश डाला। उन्होंने स्पष्ट किया कि खास तौर पर 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को सीने में दर्द या किसी भी प्रकार की असामान्य बेचैनी को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए और तुरंत अस्पताल का रुख करना चाहिए। राधाकृष्ण किशोर का कहना था कि यदि सुदिव्य जी दो घंटे के उस महत्वपूर्ण गोल्डन ऑवर के भीतर अस्पताल पहुंच जाते, तो शायद उनकी जान बचाई जा सकती थी। यदि वे वक्त पर वहां पहुंच गए होते तो आज वे सभी के बीच सुरक्षित होते। हालांकि, सुदिव्य सोनू के मामले में यह निश्चित तौर पर पूरी तरह नहीं कहा जा सकता कि कुछ घंटे पहले अस्पताल पहुंचने पर उनकी जान बच ही जाती, लेकिन मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार दिल के दौरे में इलाज जितनी जल्दी शुरू किया जाए, गंभीर नुकसान और मौत के खतरे को उतना ही कम करने का प्रयास किया जा सकता है। सुदिव्य सोनू के असामयिक निधन से पूरा प्रदेश मर्माहत है, लेकिन इसके साथ ही डॉक्टरों की मुख्य सलाह यही है कि लोग हमेशा सतर्क रहें और समय पर अपनी स्वास्थ्य जांच करवाएं।





















