झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली 20 साल की पुष्पा ने मिट्टी जैसी मामूली चीज़ को अपनी कमाई का जरिया बना लिया है. आज उनकी बनाई ज्वेलरी और पेंटिंग्स की मांग सिर्फ रांची तक सीमित नहीं, बल्कि देश के बड़े शहरों तक पहुंच गई है.
घर की तंगी से शुरू हुआ फाइन आर्ट्स का सफर
पुष्पा के माता-पिता खेती करते हैं और घर की आर्थिक हालत मजबूत नहीं थी. यही वजह रही कि उन्हें कम उम्र में ही कुछ कमाने की जरूरत महसूस हुई, ताकि परिवार को सहारा मिल सके. इसी सोच के साथ उन्होंने फाइन आर्ट्स में दाखिला लिया और बारह महीने का यह कोर्स पूरा किया. इस दौरान उन्होंने पेंटिंग बनाना, मूर्तियां तैयार करना और गहने डिजाइन करना सीखा. कोर्स खत्म होते ही नौकरी की तलाश करने के बजाय उन्होंने अपने नाम से एक ब्रांड शुरू करने की ठानी.
मिट्टी से बने गहनों को मिली अलग पहचान
पुष्पा अपने हाथों से मिट्टी के नेकलेस और इयररिंग्स तैयार करती हैं. इन गहनों को खास बनाने के लिए वे इन पर ऑर्गेनिक रंगों से पेंटिंग करती हैं. ये रंग किसी केमिकल से नहीं बल्कि फल और सब्जियों से बनाए जाते हैं, जिससे न सिर्फ उत्पाद टिकाऊ रहते हैं बल्कि उनका रंग भी आकर्षक बना रहता है.
सोहराई और वर्ली कला भी कलेक्शन में शामिल
पुष्पा के कलेक्शन में गहनों के अलावा सोहराई शैली और वर्ली अंदाज़ की पेंटिंग्स भी शामिल हैं. ये दोनों पारंपरिक कला रूप आदिवासी संस्कृति की झलक दिखाते हैं, जिन्हें पुष्पा अपने नजरिए से तैयार करती हैं.
सरकार से मिलते ऑर्डर, बड़े शहरों की महिलाओं की पहली पसंद
पुष्पा बताती हैं कि उन्हें सरकार की तरफ से भी ऑर्डर मिलते रहते हैं. इसके अलावा अमीर तबके की कई महिलाएं भी उनकी पेंटिंग, कलाकृति और ज्वेलरी को खासतौर पर पसंद करती हैं. कई ग्राहक अपनी पसंद के मुताबिक कस्टमाइज्ड प्रोडक्ट बनवाने की मांग भी करते हैं, जिसे पुष्पा पूरा करती हैं.
200 रुपये से 5000 रुपये के बीच है कीमत
अगर कीमत की बात करें तो पुष्पा के गहनों के दाम 200 रुपये से 1000 रुपये के बीच रहते हैं. वहीं पेंटिंग और अन्य क्राफ्ट आइटम के लिए ग्राहकों को 250 रुपये से 5000 रुपये तक चुकाने पड़ते हैं. इस तरह कम बजट में भी लोग उनकी कला के जरिए घर या खुद को सजा सकते हैं.





















