बीन्स की खेती में सबसे बड़ी दिक्कत कीड़ों और दाग-धब्बों की होती है, जिससे फसल की क्वालिटी गिर जाती है और बाजार में सही दाम नहीं मिलता. एक किसान दिलीप ने इसी समस्या का हल एक सीधी-सादी जुगाड़ू तरकीब से निकाला है और अब उनकी कमाई शानदार हो रही है.
बांस-रस्सी की तरकीब से पौधों को मिलता है सहारा
दिलीप बताते हैं कि खेत में सबसे पहले बांस के सहारे रस्सी को कई परतों में बांधा जाता है. इससे जब पौधे ऊपर की ओर बढ़ते हैं तो उनकी लताएं आसानी से रस्सी में फंस जाती हैं और उन्हें मजबूत सहारा मिल जाता है. इस पूरी प्रक्रिया में यह खास ख्याल रखा जाता है कि एक पौधे की लता दूसरे पौधे में न उलझे. ऐसा करने से बीन्स की फलियां आपस में अलग-अलग रहती हैं, जिससे न तो उन पर दाग पड़ते हैं और न ही कीड़े लगने का खतरा बढ़ता है.
खाद-पानी का सही संतुलन
फसल को पोषण देने के लिए दिलीप गोबर और कछुआ खाद अच्छी मात्रा में खेत में डालते हैं. इसके साथ ही वे डीएपी और थोड़ी मात्रा में यूरिया भी मिलाते हैं, ताकि पौधों को जरूरी पोषक तत्व मिलते रहें.
हर 10 दिन में जांच, कीड़े दिखते ही छिड़काव
दिलीप हर 10 दिन में पौधों की बारीकी से जांच करते हैं. अगर इस दौरान किसी पौधे पर कीड़े नजर आते हैं तो तुरंत पेस्टिसाइड का छिड़काव कर दिया जाता है, जिससे संक्रमण पूरे खेत में नहीं फैल पाता.
दिनभर खेत में डटे रहते हैं दिलीप
दिलीप के मुताबिक बीन्स की खेती में मेहनत बहुत ज्यादा लगती है. वे पूरे दिन खेत में मौजूद रहकर लताओं की देखभाल करते हैं, ताकि कोई भी समस्या नजरअंदाज न हो.
बरसात में जलजमाव रोकने के लिए ऊंची क्यारियां
बरसात के मौसम में फसल को अलग से सिंचाई की जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन इस बात का पूरा ध्यान रखा जाता है कि पौधों की जड़ों में पानी जमा न हो. इसके लिए खेत में क्यारियां जमीन से ऊंची उठाकर बनाई जाती हैं, ताकि अतिरिक्त पानी आसानी से नीचे निकल जाए और जड़ें सड़ने का खतरा न रहे.
10 डिसमिल जमीन से हो रही बंपर कमाई
दिलीप फिलहाल 10 डिसमिल जमीन पर बीन्स की खेती कर रहे हैं. इसी छोटी सी जमीन पर अपनाई गई इस जुगाड़ू तकनीक से उनकी फसल कीड़ों और दाग-धब्बों से सुरक्षित रहती है, जिसका सीधा फायदा उनकी कमाई पर दिख रहा है.



















