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जोधपुर बासनी फैक्ट्री अग्निकांड: गंभीर रूप से झुलसे फायर फाइटर सुरेंद्र की इलाज के दौरान मौतराजस्थान
28 सित॰ 2026, 12:04 pm (1 घंटे पहले)· 0

जोधपुर बासनी फैक्ट्री अग्निकांड: गंभीर रूप से झुलसे फायर फाइटर सुरेंद्र की इलाज के दौरान मौत

जोधपुर के बासनी औद्योगिक क्षेत्र की केमिकल फैक्ट्री में आग बुझाते समय 65 प्रतिशत झुलसे फायर फाइटर सुरेंद्र ने महात्मा गांधी अस्पताल में दम तोड़ दिया है।

जोधपुर के बासनी औद्योगिक क्षेत्र में हुई एक दिल दहला देने वाली घटना में, केमिकल फैक्ट्री की भीषण आग से जूझते हुए अपनी जान जोखिम में डालने वाले जांबाज फायर फाइटर सुरेंद्र ने अंततः दम तोड़ दिया है। आग की लपटों से मुकाबला करते हुए वह बुरी तरह घायल हो गए थे और उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया था। इस दुखद निधन से पूरे अग्निशमन विभाग के साथ-साथ पूरे शहर में शोक की लहर दौड़ गई है। सुरेंद्र का यह बलिदान उन तमाम अग्निशमन कर्मियों के अदम्य साहस को बयां करता है जो दूसरों की सुरक्षा के लिए अपनी जिंदगी को दांव पर लगा देते हैं।

केमिकल फैक्ट्री में बचाव अभियान के दौरान हुआ हादसा

बासनी इंडस्ट्रियल एरिया की उस केमिकल फैक्ट्री में जब आग ने विकराल रूप धारण किया, तब स्थिति बेहद खतरनाक हो चुकी थी। इस भयानक आग को नियंत्रित करने के लिए चलाए जा रहे अभियान में सुरेंद्र सबसे आगे रहकर मोर्चा संभाल रहे थे। इसी कठिन बचाव कार्य के दौरान एक दुर्भाग्यपूर्ण क्षण आया जब वह अचानक आग की चपेट में आ गए और गंभीर रूप से झुलस गए। घटना के तुरंत बाद उन्हें शहर के महात्मा गांधी अस्पताल की विशेष बर्न यूनिट में पहुंचाया गया, जहां शुरुआती जांच में सामने आया कि उनका शरीर 65 प्रतिशत से अधिक जल चुका था।

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अस्पताल में डॉक्टरों ने की बचाने की हरसंभव कोशिश

महात्मा गांधी अस्पताल के विशेषज्ञ चिकित्सकों की एक समर्पित टीम सुरेंद्र की जान बचाने के लिए लगातार संघर्ष कर रही थी। उन्हें तुरंत गहन चिकित्सा कक्ष यानी आईसीयू में शिफ्ट किया गया था जहाँ उन्हें उच्च श्रेणी की चिकित्सा सुविधाएं दी जा रही थीं। उनकी नाज़ुक हालत को देखते हुए डॉक्टरों की टीम चौबीसों घंटे उनकी निगरानी में जुटी थी। अस्पताल के चिकित्सा अमले ने उन्हें बचाने के लिए अपनी तरफ से पूरी ताकत झोंक दी थी, लेकिन शरीर का अधिकांश हिस्सा जल जाने के कारण संक्रमण फैल गया और उनकी हालत लगातार बिगड़ती चली गई। तमाम चिकित्सकीय प्रयासों और प्रार्थनाओं के बावजूद वह जिंदगी की जंग हार गए।

अधीक्षक ने की पुष्टि, साथियों में छाया गहरा सन्नाटा

महात्मा गांधी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. फतेह सिंह ने बेहद भारी मन से फायर फाइटर सुरेंद्र के निधन की आधिकारिक पुष्टि की है। जैसे ही यह मनहूस खबर अग्निशमन विभाग तक पहुंची, वहां तैनात उनके साथियों और सहकर्मियों में सन्नाटा पसर गया और सबकी आंखें नम हो गईं। विभाग के उच्च अधिकारियों और कर्मचारियों ने सुरेंद्र के अद्वितीय साहस और अपने कर्तव्य के प्रति उनकी निष्ठा को याद करते हुए उन्हें अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि दी है। इस भीषण दुर्घटना ने एक बार फिर से औद्योगिक इलाकों में सुरक्षा इंतजामों और दमकल कर्मियों के लिए आधुनिक सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सवाल-जवाब

यह दुर्घटना कहाँ हुई थी?
यह दुर्घटना जोधपुर के बासनी औद्योगिक क्षेत्र में स्थित एक केमिकल फैक्ट्री में हुई।
फायर फाइटर सुरेंद्र कितने प्रतिशत झुलसे थे?
आग बुझाने के दौरान फायर फाइटर सुरेंद्र का शरीर 65 प्रतिशत से अधिक झुलस गया था।
उनका इलाज किस अस्पताल में चल रहा था?
उनका इलाज जोधपुर के महात्मा गांधी अस्पताल के विशेष बर्न यूनिट और आईसीयू में चल रहा था।
उनके निधन की पुष्टि किसने की?
महात्मा गांधी अस्पताल के अधीक्षक डॉ. फतेह सिंह ने फायर फाइटर सुरेंद्र के निधन की आधिकारिक पुष्टि की।
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टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·14 मिनट पहले

फायर फाइटर सुरेंद्र का यूँ जाना बेहद दुखद है। क्या ऐसी फैक्ट्रियों में दमकल कर्मियों की सुरक्षा के लिए आधुनिक उपकरणों की कमी अब भी बनी हुई है?

Ravikash Gupta@ravikash·13 मिनट पहले

अर्जुन जी, बिल्कुल सही कहा आपने। आए दिन ऐसी औद्योगिक दुर्घटनाओं में जान जोखिम में डालने वाले इन कर्मियों के लिए आधुनिक सुरक्षा गियर और कॉर्पोरेट जवाबदेही तय होना बहुत जरूरी है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·35 मिनट पहले

ड्यूटी के दौरान जान गंवाना बहुत डरावना और दुखद है। बासनी जैसी औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा नियमों की अनदेखी अब बर्दाश्त नहीं होनी चाहिए, वरना ऐसे ही जांबाज अपनी जान गंवाते रहेंगे।

Rohan Verma@rohan-verma·35 मिनट पहले

बिल्कुल सही कहा करण, सुरक्षा मानकों की ऐसी अनदेखी सच में जानलेवा साबित हो रही है।

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